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Feb 5, 2026

बिहार बजट में घोषित नई औद्योगिक नीतियाँ-बिहार में मृदा क्षरण

प्रश्न-बिहार बजट 2025–26 में घोषित नई औद्योगिक नीतियाँ राज्य के आर्थिक ढांचे में किस प्रकार संरचनात्मक परिवर्तन ला सकती हैं? औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और सतत विकास के संदर्भ में विश्लेषण कीजिए। 38 अंक 

उत्तर- लंबे समय तक कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था पर निर्भर रहने वाला बिहार अब औद्योगिक विविधीकरण और निवेश आधारित विकास की ओर अग्रसर हो रहा है। बिहार बजट 2025–26 में घोषित नई औद्योगिक नीतियाँ राज्य को विनिर्माण, कृषि-आधारित उद्योग और हरित ऊर्जा के माध्यम से संतुलित विकास पथ पर लाने का प्रयास करती हैं जिसे निम्‍न प्रकार समझ सकते हैं-

 

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क्षेत्रीय औद्योगिक विविधीकरण

  • फार्मास्युटिकल प्रमोशन नीति 2025 से राज्य में शून्य दवा उत्पादन की स्थिति बदलकर स्वास्थ्य आधारित उद्योग विकसित होंगे और R&D को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • खाद्य प्रसंस्करण नीति 2025 से कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन होगा, फसल बर्बादी घटेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग विकसित होंगे।
  • बायोफ्यूल्स नीति (संशोधन) 2025 कृषि अपशिष्ट के उपयोग से स्वच्छ ऊर्जा, कार्बन उत्सर्जन में कमी और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देगी।

 

निवेश अनुकूल वातावरण

  • औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति 2025 द्वारा टैक्स छूट, सब्सिडी, सरल प्रक्रियाओं से निवेश आकर्षित।
  • बिहार बिजनेस कनेक्ट 2024 के अंतर्गत ₹1.8 लाख करोड़ से अधिक के एमओयू राज्य में भविष्य के निवेश संकेत देते हैं।

 

भौतिक अवसंरचना

  • डोभी (गया) में औद्योगिक पार्क और फतुहा में मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक हब से आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होंगे।
  • अमृतसर–कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर से राष्ट्रीय बाजार से जुड़ाव बढ़ेगा।

 

स्थानीय उद्यमिता और समावेशन

  • मुख्यमंत्री उद्यमी योजना और लघु उद्यमी योजना से छोटे उद्योगों को पूंजी समर्थन मिल रहा है।
  • खादी मॉल नेटवर्क विस्तार से ग्रामोद्योग और कारीगरों को बाजार उपलब्ध होगा।
  • स्टार्टअप पॉलिसी से नवाचार आधारित रोजगार को बढ़ावा मिल रहा है।

 

इस प्रकार बिहार की नई औद्योगिक नीतियाँ केवल निवेश आकर्षण तक सीमित नहीं, बल्कि कृषि–उद्योग एकीकरण, हरित ऊर्जा, अवसंरचना विकास और स्थानीय उद्यमिता को एक साथ जोड़ने का प्रयास हैं। यदि भूमि, बिजली, कौशल विकास और लॉजिस्टिक्स में समानांतर सुधार किए जाएँ  तो ये नीतियाँ बिहार को प्रवास-आधारित अर्थव्यवस्था से उत्पादन-आधारित विकास की ओर ले जा सकती हैं।

 

प्रश्न- बिहार में मृदा क्षरण की समस्या के प्रमुख कारणों का विश्लेषण कीजिए तथा मृदा संरक्षण हेतु सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की संक्षिप्त में बताएं। 8 अंक 

उत्‍तर- कृषि प्रधान राज्य बिहार में मिट्टी की गुणवत्ता खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका का आधार है लेकिन अवैज्ञानिक कृषि, नदियों की सक्रियता और वन क्षरण के कारण मृदा क्षरण एक गंभीर समस्या बन चुकी है। बिहार की लगभग 32% भूमि किसी न किसी रूप में क्षरण से प्रभावित है जिसके भौगोलिक कारण मैदानी और पठारी दोनों क्षेत्रों में स्पष्ट दिखाई देते हैं जिसे निम्‍न प्रकार समझ सकते हैं:

 

  • मैदानी क्षेत्रों में नदियों के तटबंध कटाव और मार्ग परिवर्तन से उपजाऊ मिट्टी का क्षरण होता है।
  • कोसी नदी के मार्ग परिवर्तन से सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, मधुबनी, कटिहार और पूर्णिया में गंभीर मृदा क्षरण हुआ है।
  • गंगा, गंडक, घाघरा और महानंदा नदियाँ भी तटीय कटाव को बढ़ाती हैं।
  • दक्षिणी पठारी भागों में अधिक ढाल के कारण वर्षा जल तीव्र गति से बहता है, जिससे ऊपरी उपजाऊ मिट्टी नष्ट होती है।
  • कैमूर, गया, नवादा, मुंगेर, जमुई और बांका में वनस्पति की कमी से मृदा क्षरण की समस्या और बढ़ जाती है।
  • कई मानवीय गतिविधियाँ जैसे रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग, फसल चक्र का अभाव तथा अनियोजित भूमि उपयोग भी समस्‍या को बढ़ाती है।

 

इस प्रकार बिहार में मृदा क्षरण प्राकृतिक और मानवीय कारकों का संयुक्त परिणाम है जिसके समाधान हेतु सरकार जलजीवनहरियाली अभियान और हर खेत को पानी के माध्यम से जल व मृदा संरक्षण को बढ़ावा दे रही है वहीं जैविक कृषि, हरित आवरण विस्तार, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, जैव उर्वरक तथा एकल-उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंध से मृदा संरक्षण के प्रयास किए जा रहे हैं।

इस प्रकार सरकार मृदा संरक्षण की दिशा में प्रयासरत है। हांलाकि स्‍थायी समाधान हेतु इन उपायों के साथ किसान जागरूकता, वन संरक्षण और वैज्ञानिक खेती जैसे उपायों को अपनाए जाने की भी आवश्‍यकता है।

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