GK BUCKET

Aug 3, 2026

71th BPSC PYQ Science & Technology Short Q&A

निम्नलिखित प्रश्नों के लघु उत्तर लिखिए :

a) What role has the philosophy of Jai Anusandhan, Jai Anuprayog" played in the process of technological Indigenization in India? Critically analyze India's current state of  technological self reliance in the field of artificial Intelligence and Robotics. [6]

भारत में प्रौद्योगिकी के स्वदेशीकरण की प्रक्रिया में "जय अनुसन्धान, जय अनुप्रयोग" के दर्शन की क्या भूमिका रही है? कृत्रिम बुद्धिमता एवं रोबोटिक्स के क्षेत्र में भारत की वर्तमान तकनीकी स्वावलम्बन की स्थिति का आलोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत कीजिए।

उत्‍तर- प्रधानमंत्री द्वारा प्रतिपादित “जय अनुसंधान, जय अनुप्रयोग” का दर्शन अनुसंधान को उत्पाद, सेवा एवं सामाजिक समाधान में परिवर्तित करने पर बल देता है। यह “मेक इन इंडियासे आगे बढ़कर “इन्‍वेंट इन इंडियाअवधारणा का आधार है।

 

प्रौद्योगिकी के स्वदेशीकरण में भूमिका

  • अनुसंधान एवं उद्योग के बीच सेतु बनाकर प्रयोगशाला-से-बजार को जोड़ने का प्रयास।
  • इंडिया एआई मिशन, राष्‍ट्रीय क्‍वांटम मिशन, सेमीकंडक्‍टर मिशन द्वारा स्वदेशी तकनीकी क्षमता विकसित करने का प्रयास।
  • कोविन, यूपीआई, चन्‍द्रयान जैसे सफल उदाहरण से भारतीय अनुसंधान को वैश्विक मान्यता।

इस प्रकार स्टार्टअप एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देकर तकनीकी आत्मनिर्भरता को गति प्रदान किया जा रहा है। AI एवं रोबोटिक्स में भारत की स्थिति देखा जाए तो स्‍पष्‍ट होता है कि

 

सकारात्मक पक्ष

  • भारत विश्व के अग्रणी AI प्रतिभा केंद्रों में है तथा AI स्टार्टअप्स संख्या तेजी से बढ़ रही है।
  • IndiaAI Mission और भारतीय भाषायी AI मॉडल महत्वपूर्ण पहल हैं।
  • प्रज्ञान रोवर, Daksh जैसे स्वदेशी रोबोटिक प्लेटफॉर्म।

 

भारत में रक्षा, स्वास्थ्य, कृषि एवं शासन में AI का व्यापक उपयोग हो रहा है हांलाकि अभी कुछ चुनौतियाँ है जैसे-

  • AI चिप्स, GPU, सेंसर एवं सेमीकंडक्टर निर्माण में विदेशी निर्भरता।
  • R&D व्यय GDP के लगभग 0.7% तक सीमित।
  • औद्योगिक रोबोट घनत्व विकसित देशों की तुलना में अत्यंत कम।
  • पेटेंट, उच्च-स्तरीय कंप्यूटिंग अवसंरचना एवं डेटा गवर्नेंस में कमी।

 

निष्कर्ष भारत AI एवं रोबोटिक्स में शक्ति के रूप में उभर रहा है किंतु वास्तविक तकनीकी स्वावलम्बन के लिए हार्डवेयर निर्माण, अनुसंधान निवेश और नवाचार-व्यावसायीकरण को सुदृढ़ करना होगा तभी “जय अनुसंधान, जय अनुप्रयोग” विकसित भारत 2047 की तकनीकी आधारशिला बन सकेगा।

 


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b) To what extent has the expansion of STEM education in Bihar been successful in bridging regional educational disparities? Discuss the hurdles of 'Digital Divide' and 'Teacher capacity, in the context of providing quality education. [6]

बिहार में STEM शिक्षा का विस्तार क्षेत्रीय शैक्षणिक असमानताओं को दूर करने में किस सीमा तक सफल रहा है? गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के संदर्भ में 'डिजिटल डिवाइड' एवं 'शिक्षक क्षमता' की बाधाओं पर चर्चा कीजिए।

उत्‍तर- बिहार में NEP-2020, अटल टिंकरिंग लैब्स, विज्ञान-गणित प्रयोगशालाओं तथा डिजिटल शिक्षण पहलों के माध्यम से STEM (Science, Technology, Engineering and Mathematics) शिक्षा के विस्तार से शैक्षिक अवसरों का विस्तार हुआ है किंतु क्षेत्रीय असमानताएं अभी भी है।

 

STEM शिक्षा विस्तार की उपलब्धियाँ

  • विज्ञान एवं गणित विषयों में नामांकन तथा उत्तीर्णता दर में सुधार हुआ है।
  • बालिकाओं तथा वंचित वर्गों की STEM शिक्षा में भागीदारी बढ़ी है।
  • अटल टिंकरिंग लैब्स, विज्ञान प्रयोगशालाओं और तकनीकी संस्थानों (IIT पटना, NIT पटना) ने नवाचार संस्कृति को बढ़ावा दिया है।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्मों (DIKSHA, PM eVIDYA) ने गुणवत्तापूर्ण सामग्री तक पहुँच।

 

हालाँकि शिक्षा की पहुंच में वृद्धि हुई है, परंतु गुणवत्ता और समानता  के स्तर पर सफलता सीमित रही है। पटना, गया एवं मुज़फ्फरपुर जैसे शहरी क्षेत्रों की तुलना में सीमांचल, कोसी और अन्य दूरस्थ जिलों में प्रयोगशालाओं, इंटरनेट तथा प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता कम है जिससे STEM अवसर अभी असमान है।

 

डिजिटल डिवाइड

  • विद्यालयों में कंप्यूटर, स्मार्ट कक्षाएँ एवं इंटरनेट सुविधा का अभाव।
  • ग्रामीण-शहरी, लैंगिक तथा डिजिटल असमानताएँ से STEM शिक्षा पहुँच में बाधा।
  • डिजिटल डिवाइड से कोडिंग, रोबोटिक्स, वर्चुअल प्रयोगशाला जैसी आधुनिक शिक्षण पद्धतियाँ सीमित।

शिक्षक क्षमता

  • गणित एवं विज्ञान के प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी।
  • STEM आधारित प्रयोगात्मक शिक्षण में दक्षता का अभाव।
  • सतत प्रशिक्षण एवं डिजिटल शिक्षण कौशल कमी।

 

निष्कर्षत: बिहार में STEM शिक्षा का विस्तार शैक्षिक पहुँच बढ़ा रहा है लेकिन क्षेत्रीय असमानताओं को समाप्त करने में आंशिक रूप से सफल रहा है। वास्तविक परिवर्तन के लिए डिजिटल अवसंरचना का सार्वभौमिक विस्तार, STEM शिक्षकों की क्षमता-वृद्धि, तथा सीमांचल-कोसी जैसे पिछड़े क्षेत्रों पर लक्षित निवेश आवश्यक है।

 

c) Explain how the integration of nano technology with environmental monitoring systems can meaningfully address pollution and degradation in India's Industrial belts. Support your answer with examples of emerging innovations. [6]

भारत के औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण तथा पर्यावरणीय क्षरण से निपटने में नैनो प्रौद्योगिकी को पर्यावरण निगरानी प्रणालियों के साथ जोड़ने से किस प्रकार सार्थक समाधान प्राप्त हो सकते हैं। स्पष्ट कीजिए। अपने उत्तर को उभरते नवाचारों के उदाहरणों से समर्थित कीजिए।

 

उत्‍तर- भारत के औद्योगिक क्षेत्र जैसे वापी, अंकलेश्वर, कानपुर आदि वायु, जल एवं मृदा प्रदूषण की गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में नैनो प्रौद्योगिकी को पर्यावरण निगरानी प्रणालियों के साथ एकीकृत करना प्रदूषण नियंत्रण एवं पर्यावरणीय क्षरण रोकने की दिशा में एक प्रभावी समाधान प्रदान करता है जिसे निम्‍न प्रकार समझ सकते हैं :-

 

रियल-टाइम निगरानी एवं पूर्व चेतावनी

  • कार्बन नैनोटयूब, तथा क्‍वांटम डॉट सेंसर हानिकारक एवं भारी धातुओं को सूक्ष्‍म स्तर तक पहचान सकते हैं।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्‍ता और इंटरनेट ऑफ थिंग्‍स आधारित सेंसर नेटवर्क प्रदूषण के पैटर्न का विश्लेषण कर पूर्व चेतावनी जारी करते हैं। उदाहरण के लिए IIT खड़गपुर का ग्राफीन आधारित सेंसर तथा IIT मद्रास की स्मार्ट मॉनिटरिंग प्रणाली।
  • प्रदूषण बढ़ने पर चेतावनी और प्रतिक्रियास्‍वरूप ऑटोमेटिक फिल्टर सक्रिय होना या इकाई बंद होना प्रभावी समाधान है।

 

प्रदूषित जल एवं मृदा का उपचार

  • नैनोमैटेरियल मृदा शुद्धिकरण में उपयोगी है वहीं नैनोकार्बन फ्लोरेट्स, नैनो फाइबर फिल्‍टर आदि भारी धातु, माइक्रोप्लास्टिक एवं विषैले रसायनों को हटाने में सहायक है।
  • Nano Zero-Valent Iron आर्सेनिक, क्रोमियम एवं सीसा जैसी भारी धातुओं को निष्क्रिय करता है। जैसे CSIR-NGRI द्वारा भूजल उपचार, IIT मुंबई के अपशिष्ट जल शोधन संबंधी अनुसंधान।

 

इस प्रकार सूक्ष्म स्तर का हस्तक्षेप व्यापक पर्यावरणीय प्रभाव दे सकता है और यही नैनो प्रौद्योगिकी की वास्तविक शक्ति है। उभरते नवाचार के रूप में नैनो प्रौद्योगिकी और पर्यावरण निगरानी का समन्वय स्मार्ट एवं सतत औद्योगिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। हालाँकि, नैनोकणों की संभावित विषाक्तता, उच्च लागत तथा नियामक ढाँचे का अभाव चुनौतियाँ बने हुए हैं।




Jul 30, 2026

71th BPSC Mains प्रश्‍न- भारत के पूर्वी तट पर स्थित प्रमुख बंदरगाहों पर चर्चा कीजिए। उपयुक्त उदाहरणों सहित उत्तर पूर्वी भारत और बांग्लादेश के विकास में श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह, कोलकाता (एसएमपीके) की भूमिका का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (38)

Discuss the major ports on eastern coast of India. Critically examine the role of Syama Prasad Mookerjee Port, Kolkata (SMPK) in the development of North East India and Bangladesh, giving suitable examples. [38]

71th BPSC Mains प्रश्‍न- भारत के पूर्वी तट पर स्थित प्रमुख बंदरगाहों पर चर्चा कीजिए। उपयुक्त उदाहरणों सहित उत्तर पूर्वी भारत और बांग्लादेश के विकास में श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह, कोलकाता (एसएमपीके) की भूमिका का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (38)

 

उत्‍तर- भारत का पूर्वी तट बंगाल की खाड़ी के साथ लगभग 3,000 किमी तक फैला है जो दक्षिण-पूर्व एशिया, बांग्लादेश तथा उत्तर-पूर्वी भारत के साथ व्यापारिक एवं सामरिक संपर्क का प्रमुख माध्यम है। इस तट पर स्थित प्रमुख बंदरगाह भारत की ब्लू इकोनॉमी, लॉजिस्टिक्स, निर्यात तथा Act East Policy को गति प्रदान करते हैं।

 

भारत के पूर्वी तट के प्रमुख बंदरगाह

बंदरगाह

राज्य

प्रमुख विशेषता

श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह

पश्चिम बंगाल

भारत का एकमात्र प्रमुख नदी बंदरगाह

पारादीप बंदरगाह

ओडिशा

कोयला एवं खनिज निर्यात का प्रमुख केंद्र

विशाखापत्तनम बंदरगाह

आंध्र प्रदेश

प्राकृतिक गहरे पानी का बंदरगाह

चेन्नई बंदरगाह                  

तमिलनाडु

कंटेनर एवं ऑटोमोबाइल निर्यात केंद्र

कामराजार बंदरगाह

तमिलनाडु

भारत का पहला कॉर्पोरेट बंदरगाह

वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह

तमिलनाडु   

दक्षिणी समुद्री व्यापार का प्रमुख केंद्र

 

उत्तर-पूर्वी भारत एवं बांग्‍लादेश के विकास में श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह की भूमिका


उत्तर-पूर्व भारत का “समुद्री द्वार”

पूर्वोत्तर के अधिकांश राज्य स्थलरुद्ध (Landlocked) हैं। असम की चाय, त्रिपुरा का रबर, मेघालय का चूना पत्थर तथा पेट्रोलियम उत्पाद इसी के माध्यम से वैश्विक बाजार तक पहुँचते हैं।


अंतर्देशीय जलमार्ग

यह बंदरगाह राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (गंगा) एवं राष्ट्रीय जलमार्ग-2 (ब्रह्मपुत्र) को जोड़ता है। भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल रूट के माध्यम से कम लागत पर माल परिवहन संभव हुआ है।


Act East Policy

यह भारत की Act East Policy का प्रमुख लॉजिस्टिक आधार है। उदाहरण के लिए कलादान मल्टीमॉडल परियोजना, BBIN (Bangladesh-Bhutan-India-Nepal) संपर्क में महत्‍वपूर्ण है।


लागत एवं व्‍यापार प्रवाह

ट्रांजिट एवं ट्रांसशिपमेंट सुविधा से बांग्‍लादेश के चटगाँव एवं मोंगला बंदरगाह का संपर्क बढ़ा जिससे दोनों देशों के व्यापार लागत में कमी आयी और व्‍यापार प्रवाह बढ़ा।


क्षेत्रीय विकास

श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह कोलकाता उत्तरपूर्वी भारतबांग्लादेशनेपाल भूटान के भीतर व्यापार आपूर्तिश्रृंखलाओं को जोड़ क्षेत्रीय विकास और रोज़गार बढ़ता है।

यह बंदरगाह अन्य हाईसीडिंग लाइनों के साथ मिलकर यह कम समय में एवं कम लागत में भारी माल को चीन और दक्षिणपूर्व एशिया से उत्तरपूर्वी भारत तक पहुँचाती हैं।

 


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चुनौतियाँ

  1. तकनीक निर्भरता- श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह में हाईसीडिंग जहाजहैंडलिंग, नदीसफ़ाई, तकनीकगहन हैं जो रखरखावलागत और तकनीकी निर्भरता बढ़ाते हैं।
  2. स्थानीय बाधाएँ- हुगली में नदीसफ़ाई, जलवितरण और नदीकटाव होने से समय और लागत बढ़ने के साथ “स्थानीयसंचालन” पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

 

निष्कर्षत: श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह पूर्वोत्तर भारत और बांग्लादेश के लिए आर्थिक जीवनरेखा है। यह क्षेत्रीय संपर्क, व्यापार, जलमार्ग आधारित लॉजिस्टिक्स तथा Act East Policy का केंद्रीय स्तंभ बन चुका है।

 

भविष्‍य में आधुनिकीकरण एवं क्षेत्रीय सहयोग के साथ, सागरमाला परियोजना के तहत आधुनिकीकरण, हल्दिया डॉक का विस्तार, AI आधारित पोर्ट प्रबंधन, रेल-सड़क-जलमार्ग का एकीकरण जैसे उपायों को बढ़ाया जाए तो यह बंदरगाह उत्‍तर-पूर्वी भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने वाला “गेटवे बंदरगाहबन सकता है।




Jul 29, 2026

प्रश्‍न- चौथी औद्योगिक क्रांति (उद्योग 4.0) की अवधारणा का वर्णन कीजिए। भारत में उद्योग 4.0 प्रौद्योगिकियों को अपनाने के सबसे बड़े लाभों और जोखिमों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।

71th BPSC प्रश्‍न- चौथी औद्योगिक क्रांति (उद्योग 4.0) की अवधारणा का वर्णन कीजिए। भारत में उद्योग 4.0 प्रौद्योगिकियों को अपनाने के सबसे बड़े लाभों और जोखिमों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। [38]


उत्‍तर- चौथी औद्योगिक क्रांति औद्योगिक (उद्योग 4.0)  विकास का वह चरण है जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), बिग डेटा, रोबोटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग तथा साइबर-फिजिकल सिस्टम जैसी तकनीकों का एकीकृत उपयोग है जिसके माध्यम से उत्पादन, सेवाओं और शासन को “स्मार्ट” बनाया जा रहा है। इसमें उत्पादन प्रक्रिया अधिक तेज, लचीली और उपभोक्ता की आवश्यकता के अनुरूप बनती है।

 

भारत में चौथी औद्योगिक क्रांति औद्योगिक (उद्योग 4.0)  के प्रमुख लाभ

विनिर्माण एवं उत्पादकता में वृद्धि

AI और रोबोटिक्स से उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ती है तथा लागत कम होती है। इससे “Make in India” और “आत्मनिर्भर भारत” को बल मिलता है। उदाहरणत के लिए  Tata Motors एवं Maruti Suzuki ने स्मार्ट विनिर्माण तकनीकों को अपनाया है।


कृषि एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में परिवर्तन

IoT सेंसर, ड्रोन और AI उपयोग से कृषि में जहां जल एवं उर्वरक की बचत हो रही है वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में AI आधारित रोग पहचान, टेलीमेडिसिन एवं रोबोटिक सर्जरी ने सेवाओं की पहुँच बढ़ाई है।


शासन दक्षता

फास्‍टटैग, प्रत्‍यक्ष लाभ हस्‍तांतरण तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म से पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता बढ़ी है। Industry 4.0 स्मार्ट लॉजिस्टिक्स एवं डेटा आधारित नीति निर्माण को भी प्रोत्साहित करता है।


स्टार्टअप एवं नवाचार को बढ़ावा

भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र  है। रेजरपे, ओला तथा जोमैटो जैसे स्टार्टअप डिजिटल अर्थव्यवस्था को गति दे रहे हैं।

 

चौथी औद्योगिक क्रांति पारंपरिक “मानव-श्रम आधारित उत्पादन” को “डेटा-संचालित एवं स्वचालित प्रणाली” में परिवर्तित कर रही है। भारत के लिए जहां यह वैश्विक विनिर्माण शक्ति बनने का अवसर भी है वहीं इसके साथ कुछ जोखिम भी उत्पन्न होते हैं।

 

Industry 4.0 के प्रमुख जोखिम

रोजगार विस्थापन

स्वचालन से निम्न-कौशल नौकरियाँ जैसे बीपीओ, टेक्सटाइल एवं असंगठित क्षेत्र में प्रभावित हो सकती हैं। यह उत्पादकता बढ़ाता है किंतु “रोजगारविहीन वृद्धिका खतरा भी है।


डिजिटल विभाजन एवं असमानता

शहरी एवं बड़े उद्योग नई तकनीकों का लाभ उठा रहे हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्र एवं MSMEs संसाधनों एवं कौशल की कमी से पीछे रह सकते हैं। इससे सामाजिक-आर्थिक असमानता बढ़ने की आशंका है।

साइबर सुरक्षा

अधिक डेटा उपयोग से साइबर हमले, डेटा चोरी तथा निगरानी का खतरा बढ़ा है।


तकनीकी निर्भरता

भारत सेमीकंडक्टर, क्लाउड सेवाओं एवं उन्नत AI प्लेटफॉर्म के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर है। शिक्षा एवं कौशल प्रणाली अभी Industry 4.0 के अनुरूप पूर्णतः तैयार नहीं है जिससे “तकनीकी उपनिवेशवादका खतरा है।


पर्यावरणीय चुनौतियाँ

डेटा सेंटर एवं ई-वेस्‍ट पर्यावरणीय दबाव बढ़ा रहे हैं।

 

स्‍पष्‍ट है कि यह भारत के लिए अवसर है वहीं यह बेरोजगारी, असमानता और डिजिटल निर्भरता को बढ़ा सकता है। हांलाकि भारत सरकार ने India AI Mission, Digital India, Skill India, Semiconductor Mission तथा DPDP Act, 2023 जैसी पहलों के माध्यम से Industry 4.0 के लिए आवश्यक डिजिटल एवं तकनीकी आधार विकसित करने का प्रयास कर रही है।

 

Jul 27, 2026

प्रश्‍न- खाद्य सुरक्षा के घटक क्या है? देश में भविष्य की घरेलू मांगों को पूरा करने में जलपौधों (हाइड्रोपोनिक) की खेती कितनी सहायक होगी? उपयुक्त उदाहरणों के साथ इसका औचित्य सिद्ध कीजिए। [38]

71th BPSC प्रश्‍न- खाद्य सुरक्षा के घटक क्या है? देश में भविष्य की घरेलू मांगों को पूरा करने में जलपौधों (हाइड्रोपोनिक) की खेती कितनी सहायक होगी? उपयुक्त उदाहरणों के साथ इसका औचित्य सिद्ध कीजिए। [38]

 

उत्‍तर- संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के अनुसार, “खाद्य सुरक्षा वह स्थिति है जब प्रत्येक व्यक्ति को हर समय पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध हो।”

भारत में बढ़ती जनसंख्या, घटती कृषि भूमि, जल संकट तथा जलवायु परिवर्तन के कारण खाद्य सुरक्षा एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में हाइड्रोपोनिक (जलपौध) खेती भविष्य की खाद्य मांगों को पूरा करने हेतु एक महत्त्वपूर्ण पूरक तकनीक के रूप में उभर रही है।

 

खाद्य सुरक्षा के मुख्य घटक

  1. खाद्य उपलब्धता (Availability)-देश में पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न, फल एवं सब्जियों का उत्पादन, भंडारण तथा वितरण। उदाहरण: भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा बफर स्टॉक।
  2. खाद्य पहुँच (Access)-प्रत्येक व्यक्ति की भोजन प्राप्त करने की आर्थिक एवं भौतिक क्षमता। उदाहरण: सार्वजनिक वितरण प्रणाली, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना।
  3. खाद्य उपयोगिता (Utilization)-भोजन का पोषणात्मक उपयोग, स्वच्छ जल एवं स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता। उदाहरण: मध्याह्न भोजन योजना।
  4. खाद्य स्थिरता (Stability)-समय के साथ खाद्य आपूर्ति और उपलब्धता में निरंतरता बनी रहना। उदाहरण के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य।

 


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हाइड्रोपोनिक खेती

हाइड्रोपोनिक खेती ऐसी तकनीक है जिसमें मिट्टी के स्थान पर पोषक तत्वयुक्त जल में पौधे उगाए जाते हैं। बढ़ते जल संकट, जलवायु परिवर्तन की स्थिति में यह भविष्‍य में भारत की घरेलू मांगों को पूरा करने में सहायक हो सकती है।

 

हाइड्रोपोनिक खेती की उपयोगिता

  • जल संरक्षण- पारंपरिक कृषि की तुलना 80–90% तक कम जल उपयोग। जैसे राजस्थान एवं शहरी क्षेत्रों में सीमित जल के बावजूद सब्जी उत्पादन।
  • अधिक उत्पादकता- कम भूमि में अधिक उत्पादन संभव है और वर्टिकल फार्मिंग द्वारा बहु-स्तरीय खेती की जा सकती है। उदाहरण के लिए मुंबई एवं बेंगलुरु के रूफटॉप फार्म।
  • जलवायु परिवर्तन से सुरक्षा- नियंत्रित वातावरण होने से सूखा, अनियमित वर्षा एवं तापमान परिवर्तन का कम प्रभाव और वर्षभर उत्पादन संभव।
  • शहरी खाद्य सुरक्षा- शहरों के निकट उत्पादन से परिवहन लागत एवं खाद्य बर्बादी कम होती है।
  • पोषण सुरक्षा- नियंत्रित पोषक तत्वों से उच्च गुणवत्ता वाली सब्जियाँ एवं फल की प्राप्ति।

 

इस प्रकार हाइड्रोपोनिक खेती सब्जियों और फल‑सब्जियों के लिए अग्रणी है लेकिन इसकी यह पारंपरिक कृषि का पूर्ण विकल्प नहीं बल्कि पूरक तकनीक है क्‍योंकि

  • पूँजी‑गहन- प्रारंभिक स्थापना व्‍यय उच्च होना इसे कम‑आय और पारंपरिक किसानों के लिए अव्यवहारिक बनाता है।
  • सीमित क्षेत्र- यह अभी भी धान, गेहूँ, मक्का आदि अनाजों के उत्पादन के लिए उपयुक्त नहीं है।

 

हाइड्रोपोनिक खेती भविष्य की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हालांकि भारत में यह पारंपरिक कृषि का प्रतिस्थापन नहीं बन सकती। इसलिए आवश्यक है कि हाइड्रोपोनिक तकनीक को सतत कृषि एवं नवाचार के साथ एक पूरक मॉडल के रूप में विकसित किया जाए ताकि “कम संसाधनों में अधिक उत्पादन” के लक्ष्य प्राप्त किया जा सके।