GK BUCKET

Jul 8, 2026

71th BPSC PYQ The-UN-Sustainable-Development-Goals-71th BPSC

71th BPSC प्रश्‍न- संयुक्त राष्ट्र स्थायी विकास लक्ष्य (SDGs), जिन्हें ग्लोबल गोल्स भी कहा जाता है, सितंबर 2015 में उनके स्वीकृत होने के बाद से पिछले दस वर्षों से प्रभावी है। संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में भारत की प्रगति और चुनौतियों का विश्लेषण करें। [38]

उत्‍तर- सितंबर 2015 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्वीकृत 17 सतत विकास लक्ष्य (SDGs) वर्ष 2030 तक गरीबी उन्मूलन, पर्यावरण संरक्षण और सर्वांगीण विकास का रोडमैप प्रस्तुत करते हैं। भारत ने इन लक्ष्यों को अपनी राष्ट्रीय नीतियों में समाहित करते हुए सबका साथ, सबका विकास” दृष्टिकोण के साथ इनके कार्यान्वयन को आगे बढ़ाया और कई SDGs में प्रगति दर्ज की है।

 

भारत की प्रमुख प्रगति

  1. SDG 1 – गरीबी उन्मूलन: लगभग 24 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले। प्रधानमंत्री जन धन योजना एवं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना ने वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत किया।
  2. SDG 2 – भूख उन्मूलन: पीएम पोषण (मिड-डे मील) एवं पोषण अभियान (POSHAN Abhiyan) से बाल कुपोषण में कमी आई है। हालांकि Global Hunger Index में भारत की स्थिति अभी भी चिंता का विषय है।
  3. SDG 4 – गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: नई शिक्षा नीति 2020 और “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान से साक्षरता एवं बालिका नामांकन में सुधार हुआ है।
  4. SDG 6 – स्वच्छ जल एवं स्वच्छता: जल जीवन मिशन तथा स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में नल जल कनेक्शन और स्वच्छता कवरेज में वृद्धि हुई है।
  5. SDG 7 – स्वच्छ ऊर्जा: भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा है तथा सौर ऊर्जा क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल हुआ है।

 

भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, JAM Trinity तथा आकांक्षी जिला कार्यक्रम ने अंतिम व्‍यक्ति तक पहुंच और सतत विकास लक्ष्‍यों का स्‍थानीयकरण किया जिसके फलस्‍वरूप भारत ने लक्ष्‍यों की प्राप्ति में प्रगति दर्ज की है। हांलाकि भारत कई लक्ष्‍यों से अभी दूर है जिनकी राह में कई चुनौतियाँ अब भी विद्यमान हैं।

 

प्रमुख चुनौतियाँ

  1. SDG 10 – असमानता: आय, लिंग एवं क्षेत्रीय विषमताएँ अभी भी गहरी हैं।
  2. SDG 13 – जलवायु परिवर्तन: बाढ़, सूखा जैसी आपदाओं की बढ़ती तीव्रता विकास को प्रभावित कर रही हैं।
  3. SDG 8 – रोजगार: युवाओं एवं महिलाओं में बेरोजगारी गंभीर चुनौती बनी हुई है।
  4. SDG 3 – स्वास्थ्य: ग्रामीण स्वास्थ्य अवसंरचना एवं मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ अभी कमजोर हैं।
  5. SDG निगरानी हेतु विश्वसनीय एवं अद्यतन डेटा का अभाव।

 

स्‍पष्‍ट है कि भारत ने सतत विकास लक्ष्‍यों की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है किंतु 2030 तक सतत, समावेशी एवं जलवायु-संवेदनशील विकास सुनिश्चित करने हेतु नीति-क्रियान्वयन, वित्त पोषण तथा सामाजिक समावेशन को और सुदृढ़ करने के साथ “सबका साथ, सबका विकास” की भावना से कार्य करना होगा।

Jul 7, 2026

71th BPSC PYQ प्रश्‍न-हाल के वर्षों में छठ पूजा के त्यौहार में वैश्विक ध्यानाकर्षण किया है। छठ के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक प्रभावों तथा प्रवासियों द्वारा इसके प्रसार पर विस्तृत चर्चा करें। [38]

प्रश्‍न-हाल के वर्षों में छठ पूजा के त्यौहार में वैश्विक ध्यानाकर्षण किया है। छठ के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक प्रभावों तथा प्रवासियों द्वारा इसके प्रसार पर विस्तृत चर्चा करें।  [38]

Jul 6, 2026

71th BPSC प्रश्‍न- देश में बिहार 'प्रधानमंत्री फॉरमालाईज़ेशन माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेज अपग्रेडेशन' (PMFME) योजना में टॉप परफॉर्मिंग राज्य के रूप में उभरा है। बिहार के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में आर्थिक विकास में योगदान में PMFME की संभावित भूमिका का विश्लेषण करें। [38]

प्रश्‍न- देश में बिहार 'प्रधानमंत्री फॉरमालाईज़ेशन माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेज अपग्रेडेशन' (PMFME) योजना में टॉप परफॉर्मिंग राज्य के रूप में उभरा है। बिहार के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में आर्थिक विकास में योगदान में PMFME की संभावित भूमिका का विश्लेषण करें।  [38]

 

Jul 3, 2026

भारत-यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) ट्रेड और इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (TEPA), जो 10 मार्च 2024 को हस्ताक्षरित हुआ और 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी हुआ, पर चर्चा करें। साथ ही, भारत-यूरोपियन यूनियन (EU) संबंधों के आर्थिक और रणनीतिक प्रभावों का विश्लेषण करें। 71th BPSC PYQ

 भारत-यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) ट्रेड और इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (TEPA), जो 10 मार्च 2024 को हस्ताक्षरित हुआ और 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी हुआ, पर चर्चा करें। साथ ही, भारत-यूरोपियन यूनियन (EU) संबंधों के आर्थिक और रणनीतिक प्रभावों का विश्लेषण करें। (38) 

Jul 2, 2026

भारत-अफगानिस्तान संबंधों और अफगानिस्तान के विदेश मंत्री की यात्रा के साथ संबंधों के रणनीतिक पुनर्संरचनाओं का विस्तृत वर्णन करें। [7] 71th BPSC PYQ

भारत-अफगानिस्तान संबंधों और अफगानिस्तान के विदेश मंत्री की यात्रा के साथ संबंधों के रणनीतिक पुनर्संरचनाओं का विस्तृत वर्णन करें। [7] 

Jun 30, 2026

प्रश्‍न- नेहरू की विदेश नीति किस हद तक आदर्शवाद और व्यावहारिकता को प्रतिबिंबित करती थी? इसकी मुख्य विशेषताओं के संदर्भ में परीक्षण करें।

प्रश्‍न- नेहरू की विदेश नीति किस हद तक आदर्शवाद और व्यावहारिकता को प्रतिबिंबित करती थी? इसकी मुख्य विशेषताओं के संदर्भ में परीक्षण करें। [38] 71th BPSC

उत्‍तर- स्वतंत्र भारत की विदेश नीति के शिल्पकार जवाहरलाल नेहरू थे। उनकी विदेश नीति पर जहां गांधीवादी नैतिकता, उपनिवेशवाद-विरोध, विश्वशांति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का गहरा प्रभाव था वहीं भारत की सुरक्षा, आर्थिक विकास और रणनीतिक स्वायत्तता जैसे  व्यावहारिक आधार भी थे। इसलिए नेहरू की विदेश नीति को "आदर्शवादी यथार्थवाद"का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।

 


नेहरू की विदेश नीति की मुख्य विशेषताएँ

गुटनिरपेक्षता (Non-Alignment)

  • शीतयुद्ध काल में विश्व अमेरिकी और सोवियत गुटों में विभाजित था तो नेहरू ने किसी भी सैन्य गुट में शामिल होने के बजाय स्वतंत्र विदेश नीति अपनाई।
  • इसके आदर्शवादी पक्ष में विश्व शांति, स्वतंत्र निर्णय और उपनिवेशवाद-विरोध था जबकि व्यावहारिक पक्ष में भारत ने दोनों गुटों से आर्थिक, तकनीकी तथा औद्योगिक सहायता प्राप्त कर विकास को गति दी और रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखी।


पंचशील और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व

  • पंचशील समझौता के पाँच सिद्धांत में संप्रभुता का सम्मान, अनाक्रमण, अहस्तक्षेप, समानता तथा शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व नेहरू की विदेश नीति के नैतिक आधार थे।
  • यह जहां अंतरराष्ट्रीय संबंधों में नैतिकता का आदर्श प्रस्तुत करता था वहीं सीमाओं पर स्थिरता और विकास हेतु शांतिपूर्ण वातावरण सुनिश्चित करने का प्रयास भी था।

उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद और रंगभेद का विरोध

  • भारत ने एशिया और अफ्रीका के स्वतंत्रता आंदोलनों का समर्थन किया तथा दक्षिण अफ्रीका की रंगभेदी नीतियों का विरोध किया।
  • यह नीति जहां मानवतावाद और न्याय के आदर्शों का प्रतीक था वहीं नव स्वतंत्र देशों के बीच भारत के नेतृत्व को मजबूत करता था।

वैश्विक नेतृत्व

  • बांडुंग सम्मेलन तथा गुटनिरपेक्ष आंदोलन में नेहरू की महत्वपूर्ण भूमिका से भारत को जहां वैश्विक दक्षिण की आवाज़ के रूप में प्रतिष्ठा मिली वहीं यह नैतिक नेतृत्व और रणनीतिक प्रभाव का माध्यम बना।

विश्व शांति एवं निरस्त्रीकरण

  • नेहरू ने परमाणु हथियारों की दौड़ का विरोध किया तथा संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को मजबूत करने का समर्थन किया। भारत ने कोरिया, स्वेज संकट और कांगो जैसे अंतरराष्ट्रीय प्रश्नों पर मध्यस्थता और शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया।
  • यह उनके अंतरराष्ट्रीयतावादी आदर्शवाद को दर्शाता है, साथ ही वैश्विक स्थिरता के माध्यम से भारत के विकास हेतु अनुकूल वातावरण तैयार करने का प्रयास था।




आदर्शवाद और व्यावहारिकता का परीक्षण

नेहरू की विदेश नीति में आदर्शवाद प्रमुख था जो राष्ट्रीय हितों से पृथक नहीं था। भारत ने पश्चिम से खाद्यान्न एवं तकनीकी सहायता तथा सोवियत संघ से भारी उद्योगों और सार्वजनिक क्षेत्र के विकास हेतु सहयोग प्राप्त किया। कश्मीर प्रश्न को संयुक्त राष्ट्र में ले जाना और दोनों महाशक्तियों के साथ संबंध बनाए रखना व्यावहारिक निर्णय थे।


  • नेहरू की विदेश नीति से जहां रणनीतिक स्वायत्तता और निर्णय-स्वतंत्रता बनी रही वहीं भारत की स्वतंत्र वैश्विक पहचान स्थापित हुई और विश्वशांति, उपनिवेशवाद-विरोध और सह-अस्तित्व के मूल्यों को बढ़ावा मिला। 
  • हालाँकि, भारत-चीन युद्ध ने नेहरूवादी आदर्शवाद की सबसे बड़ी परीक्षा ली। "हिंदी-चीनी भाई-भाई" की भावना और चीन पर अत्यधिक विश्वास के कारण भारत पर्याप्त सामरिक तैयारी नहीं कर सका। युद्ध के बाद रक्षा व्यय बढ़ाना तथा सैन्य आधुनिकीकरण अपनाना उनकी विदेश नीति के व्यावहारिक पुनर्संतुलन को दर्शाता है।

 

निष्कर्षतः, नेहरू की विदेश नीति न तो पूर्णतः आदर्शवादी थी और न ही केवल यथार्थवादी,  बल्कि यह आदर्शवाद और राष्ट्रीय हितों पर आधारित व्यावहारिकता का संतुलित समन्वय थी। गुटनिरपेक्षता, पंचशील, उपनिवेशवाद-विरोध और विश्वशांति की अवधारणाओं ने भारत को नैतिक नेतृत्व प्रदान किया, जबकि रणनीतिक स्वायत्तता और विकासोन्मुख कूटनीति ने उसे व्यावहारिक आधार दिया। आज भारत की रणनीतिक स्वायत्तता, बहु-संरेखण (Multi-Alignment) तथा वैश्विक दक्षिण के नेतृत्व की नीति में नेहरूवादी विदेश नीति की मूल भावना स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।




Jun 29, 2026

प्रश्‍न- प्रारम्भिक संवैधानिक आंदोलन से लेकर जन-आंदोलन तक भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के रूपांतरण की चर्चा कीजिए तथा विभिन्न ऐतिहासिक चरणों में विहार की भूमिका को रेखांकित कीजिए। 71th BPSC [38]

प्रश्‍न- प्रारम्भिक संवैधानिक आंदोलन से लेकर जन-आंदोलन तक भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के रूपांतरण की चर्चा कीजिए तथा विभिन्न ऐतिहासिक चरणों में विहार की भूमिका को रेखांकित कीजिए। 

Jun 28, 2026

प्रश्‍न- मौर्य कला और वास्तुकला की प्रमुख विशेषताओं का विश्लेषण करें और आकलन करें कि उन्होंने उस काल के राजनीतिक और सांस्कृतिक मूल्यों को किस हद तक व्यक्त किया। [38] 71th BPSC

प्रश्‍न- मौर्य कला और वास्तुकला की प्रमुख विशेषताओं का विश्लेषण करें और आकलन करें कि उन्होंने उस काल के राजनीतिक और सांस्कृतिक मूल्यों को किस हद तक व्यक्त किया। [38] 71th BPSC

Jun 25, 2026

प्रश्‍न- 1857 के विद्रोह के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक कारणों का विश्लेषण कीजिए तथा बिहार के योगदान का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। 71th BPSC PYQ

प्रश्‍न- 1857 के विद्रोह के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक कारणों का विश्लेषण कीजिए तथा बिहार के योगदान का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। [38] 71th BPSC PYQ