बिहार – तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्था
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BPSC Mains special Notes
भारत के पूर्वी हिस्से
में स्थित बिहार ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और कृषि परंपराओं के लिए जाना जाता रहा है। पिछले कुछ वर्षों
में राज्य ने आर्थिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। मजबूत नीतिगत
सुधार, बढ़ता निवेश, बेहतर अवसंरचना और
मानव पूंजी विकास के कारण बिहार अब देश के तेज़ी से बढ़ने वाले राज्यों में शामिल
हो चुका है।
बिहार आर्थिक
सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार राज्य में आर्थिक वृद्धि,
क्षेत्रीय विविधीकरण, रोजगार सृजन और निवेश
में निरंतर सुधार देखा जा रहा है। यह संकेत देता है कि बिहार की अर्थव्यवस्था
धीरे-धीरे एक संतुलित और टिकाऊ विकास मॉडल की ओर बढ़ रही है।
बिहार की आर्थिक वृद्धि दर
पिछले कुछ वर्षों में
बिहार की आर्थिक वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रही है।
- 2024-25 के त्वरित अनुमान के अनुसार 2011-12 के स्थिर मूल्य पर राज्य का GSDP
8.6% बढ़कर 5,31,372 करोड़ रुपये हो गया।
- वर्तमान मूल्य पर यह 13.1% बढ़कर 9,91,997 करोड़ रुपये
तक पहुँच गया।
यदि हम भारत की
अर्थव्यवस्था से तुलना करें तो यह वृद्धि और भी महत्वपूर्ण दिखाई देती है।
|
वर्ष |
बिहार की वृद्धि
दर |
भारत की वृद्धि
दर |
|
2022-23 |
17.9% |
14.0% |
|
2023-24 |
14.9% |
12.0% |
|
2024-25 |
13.1% |
9.8% |
|
इन आँकड़ों से
स्पष्ट है कि बिहार लगातार राष्ट्रीय औसत से तेज़ गति से बढ़ रहा है। |
||
क्षेत्रीय संरचना में
परिवर्तन
बिहार की अर्थव्यवस्था
मुख्य रूप से तीन प्रमुख क्षेत्रों पर आधारित है:
1. प्राथमिक क्षेत्र (कृषि, पशुपालन आदि)
2. द्वितीयक क्षेत्र (उद्योग, निर्माण)
3. तृतीयक क्षेत्र (सेवाएँ)
1. द्वितीयक क्षेत्र की तेज़ वृद्धि
2024-25 में
द्वितीयक क्षेत्र की वृद्धि दर:
- स्थिर मूल्य पर: 11.1%
- वर्तमान मूल्य पर: 15.5%
यह वृद्धि मुख्य रूप
से निर्माण कार्य और विनिर्माण उद्योगों के विस्तार के कारण हुई है।
सड़कों, पुलों, भवनों और औद्योगिक परियोजनाओं के निर्माण ने आर्थिक गतिविधियों को तेज़
किया है।
2. तृतीयक क्षेत्र (सेवा क्षेत्र)
सेवा क्षेत्र भी बिहार
की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा हिस्सा बना हुआ है।
- स्थिर मूल्य पर वृद्धि: 8.9%
- वर्तमान मूल्य पर वृद्धि: 13.5%
इस क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन,
व्यापार और पर्यटन जैसी सेवाओं का महत्वपूर्ण योगदान है।
3. प्राथमिक क्षेत्र
प्राथमिक क्षेत्र की
वृद्धि दर:
- स्थिर मूल्य पर: 4.1%
- वर्तमान मूल्य पर: 9.6%
हालाँकि इसका योगदान
धीरे-धीरे घट रहा है, फिर भी
कृषि राज्य की अर्थव्यवस्था की आधारशिला बनी हुई है।
आर्थिक संरचना में बदलाव
2020-21 से 2024-25
के बीच बिहार की आर्थिक संरचना में उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ है।
|
क्षेत्र |
2020-21 में योगदान |
2024-25 में योगदान |
|
प्राथमिक
क्षेत्र |
21.9% |
18.3% |
|
द्वितीयक
क्षेत्र |
21.1% |
26.8% |
|
तृतीयक क्षेत्र |
57.0% |
54.8% |
इन आँकड़ों से स्पष्ट
है कि:
- उद्योग और निर्माण क्षेत्र तेजी से बढ़ रहे
हैं।
- कृषि का हिस्सा धीरे-धीरे कम हो रहा है।
- सेवा क्षेत्र अभी भी प्रमुख बना हुआ है।
यह परिवर्तन राज्य की
अर्थव्यवस्था में विविधीकरण को दर्शाता है।
प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि
राज्य की आर्थिक
प्रगति का एक महत्वपूर्ण संकेतक प्रति व्यक्ति आय भी है।
- 2020-21:
46,412 रुपये (वर्तमान मूल्य)
- 2024-25:
76,490 रुपये (वर्तमान मूल्य)
स्थिर मूल्य पर भी यह
आय बढ़ी है जो
30,159 रुपये से बढ़कर 40,973
रुपये हो गयी।
यह वृद्धि दर्शाती है
कि राज्य में आर्थिक अवसर बढ़ रहे हैं और लोगों की आय में सुधार हो रहा है।
जिलों की आर्थिक स्थिति
· राज्य के विभिन्न जिलों में आर्थिक गतिविधियों का स्तर अलग-अलग है। सर्वाधिक सकल जिला घरेलू उत्पाद वाले जिले में पटना, बेगूसराय, मुंगेर शामिल है। राजधानी पटना राज्य की आर्थिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र है, जहाँ व्यापार, सेवाएँ और प्रशासनिक गतिविधियाँ अधिक केंद्रित हैं।
|
प्रति व्यक्ति
आय (वर्तमान मूल्य) |
|
|
जिला |
प्रति व्यक्ति आय |
|
पटना |
₹2,41,220 |
|
बेगूसराय |
₹1,05,600 |
|
मुंगेर |
₹93,921 |
बिहार की आर्थिक प्रगति के
प्रमुख कारण
बिहार की अर्थव्यवस्था
में तेजी से वृद्धि के पीछे कई महत्वपूर्ण कारक हैं:
1. अवसंरचना
विकास- सड़क, पुल, बिजली और
परिवहन नेटवर्क में सुधार से निवेश को बढ़ावा मिला है।
2. निवेश में
वृद्धि- राज्य सरकार
द्वारा उद्योगों को आकर्षित करने के लिए नई नीतियाँ लागू की गई हैं।
3. मानव
पूंजी विकास- शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास कार्यक्रमों ने
कार्यबल को मजबूत बनाया है।
4. रोजगार
सृजन- निर्माण, सेवा और छोटे उद्योगों के विस्तार से
रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
बिहार की अर्थव्यवस्था की
चुनौतियाँ- हालाँकि विकास की गति तेज़ है, फिर भी कुछ चुनौतियाँ मौजूद हैं:
- औद्योगिकीकरण की गति अभी भी सीमित है
- कृषि पर निर्भरता अधिक है
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर
बढ़ाने की आवश्यकता
- शहरी-ग्रामीण आय असमानता
इन चुनौतियों को दूर
करना आने वाले वर्षों में राज्य की प्राथमिकता होगा।
उपरोक्त आंकड़े स्पष्ट
रूप से दर्शाते हैं कि बिहार की अर्थव्यवस्था तेज़ी से विकसित हो रही है।
उच्च आर्थिक वृद्धि दर, क्षेत्रीय
विविधीकरण, बढ़ते निवेश, अवसंरचना
विकास और मानव पूंजी में सुधार ने राज्य को विकास की नई दिशा दी है।
यदि यह विकास गति इसी
प्रकार जारी रहती है, तो आने
वाले वर्षों में बिहार सतत (Sustainable) और
समावेशी (Inclusive) विकास का एक
मजबूत मॉडल बन सकता है।

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