बिहार में कृषि आधुनिकीकरण/तकनीकी विकास
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तकनीक आधारित एवं नवाचारी कृषि
- बिहार में पहली बार सहरसा में तालाब में नीचे मछली और ऊपर सब्जी का उत्पादन शुरू कर हाइड्रोपोनिक्स खेती की शुरुआत।
- दुल्हिन बाजार प्रखंड, पटना में न्यूट्रिशनल विलेज के तहत पोषक तत्वों से भरपूर फसलों की जैविक खेती द्वारा कुपोषण की समस्या का समाधान होगा एवं किसानों की आय वृद्धि।
- पौधा संरक्षण सेवाओं को किसानों तक सहजता से पहुँचाने के लिए विशेष पहल के लिए अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक का प्रयोग ।
- समस्तीपुर, पूसा स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित खेती की तकनीक पर प्रयोग शुरू करने पर जोर दिया है। यहां पर डेटा संचालित स्मार्ट खेती के लिए एक मशीन लगाया गया जिसका नाम फसल है और यह किसानों की फसलों की भविष्यवाणी करेगा।
डिजिटल सेवाएँ, मृदा एवं जल प्रबंधन
- बिहार में मौसम बिहार एप लांच किया गया जिसकी सहायता से किसानों और आम लोगों को 5 दिन पहले ही मौसम की जानकारी (ऐसा मोबाइल एप विकसित करनेवाला भारत का पहला राज्य) मिल जाएगी । मौसम की सटीक जानकारी से राज्य में किसानों को कृषि में सुविधा होगी वहीं प्राकृतिक आपदाओं की पूर्व सूचना को प्रसारित करके होनेवाले नुकसान को कम किया जा सकेगा ।
- बिहार के सभी 38 जिलों में 6 लाख मिट्टी के नमूनों की जांच कर किसानों को उर्वरक के प्रयोग को लेकर सुझाव दिए जाने की योजना है। किसान 'मिट्टी बिहार' एप से खेत की मिट्टी के स्वास्थ्य व उर्वरक की अनुशंसित मात्रा ऑनलाइन प्राप्त कर सकेंगे।
- भूगर्भ जल के अनुश्रवण के लिए राज्य के जिला मुख्यालयों तथा प्रखण्डों में कुल 562 टेलिमेट्री सिस्टम लगाये गये हैं, जिससे भूगर्भ जल स्तर के आंकड़े प्राप्त हो रहे हैं।
जलवायु अनुकूल कृषि एवं संसाधन संरक्षण
- बाढ़ और सूखे से निपटने के लिए बिहार कृषि विश्वविद्यालय द्वारा द्वारा फसलों की नई प्रजाति तैयार करने की योजना है। इसके लिए कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चरल बायोटेक्नोलॉजी की स्थापना किए जाने के साथ फसलों की नई प्रजाति को तैयार करने की दिशा में एक रोडमैप तैयार किया जाएगा ।
- रोहतास द्वारा खेतों में जलाए जानेवाले फसल अवशेष को किसानों के लिए आमदनी का जरिया बनाया गया जिसके लिए कृषि विज्ञान केंद्र को पुआल प्रबंधन में उत्कृष्ट कार्य हेतु इको एग्रीकल्चर अवार्ड-2021 से सम्मानित किया गया।
फसल विविधीकरण, बीज एवं बागवानी विकास
- मोटे अनाज, तिल, दलहन आदि फसलों के बीज उत्पादन पर भी सरकार ध्यान दे रही है। बिहार सरकार द्वारा बिहार में 100 बीज हब बनाने की योजना है। बिहार में मक्का उत्पादन करने वाले इलाके कोसी में मक्का बीज जबकि मगध में धान-गेहूं बीज का केंद्र (हब) बनाया जाएगा।
- बागवानी विकास के तहत बिहार में विशिष्ट फसल उत्पाद आधारित सात आदर्श बागवानी केन्द्र स्थापित किए जाने की घोषणा की है। ये केंद्र शहद, मशरूम, मखाना, आम, पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट, सब्जी एवं फल के होंगे।
बिहार में पशुपालन, मत्स्यन क्षेत्र में नवाचार एवं तकनीक
- सात निश्चय-2 के तहत बिहार में दुधारू पशुओं के लिए पशु धन बीमा योजना की शुरुआत की जा रही है। इस प्रकार बिहार में पहली बार दुधारू पशुओं का बीमा कराया जा रहा है । पशुधन बीमा होने से जहां पशुपालन को बढ़ावा मिलेगा वहीं पशुपालकों की आय एवं आर्थिक सुरक्षा बढ़ने के साथ साथ उनकी खेती पर उनकी निर्भरता कम होगी।
- ग्रामीण इलाकों में पशु चिकित्सकों की भारी कमी को देखते हुए पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग द्वारा जीविका दीदियों को पशु देखभाल का प्रशिक्षण । प्रशिक्षण के बाद दीदीयों को पशु सखी का दर्जा दिया जाएगा तथा पशुओं के प्राथमिक उपचार के लिए किट भी दी जाएगी।
- बिहार में प्रत्येक 7 किमी पर एक पशु अस्पताल खोले जाने तथा एम्बुलेट्री वाहनों द्वारा पशुपालकों के दरवाजे पर उपचार की सुविधा उपलब्ध करायी जाने योजना।
- पशुपालन क्षेत्र को प्रोत्साहन देने हेतु बिहार e-Gopala App को लांच किया गया। e-Gopala App किसानों के प्रत्यक्ष उपयोग के लिए एक समग्र नस्ल सुधार, बाज़ार और सूचना पोर्टल है।
- प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ के तहत बिहार की स्वदेशी नस्लों के विकास एवं संरक्षण हेतु अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त वीर्य केंद्र (सीमेन स्टेशन) का उद्घाटन बिहार के पूर्णिया में किया गया।
- राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के तकनीकी सहयोग से मरंगा, पूर्णियाँ में नया फ्रोजेन सिमेन स्टेशन स्थापित किया गया है। कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के तहत वर्ष 2022-23 में 30 लाख से ज्यादा पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान किया गया है।
- बिहार में पहली बार मवेशियों के नस्ल संवर्धन एवं संरक्षण के लिए एम्ब्रियो ट्रांसफर इन विट्रो फर्टिलाइजेशन तकनीक की शुरुआत 2020 में बेगूसराय जिले में हुई जिसके फलस्वरूप बिहार में पहली बार IVF तकनीक से बछिया का जन्म हुआ ।
- पटना स्थित पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में आईवीएफ लैब स्थापित किया गया।
- राष्ट्रीय पशुधन रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत गोजाति एवं भैंसजाति पशुओं को ईयर टैगिंग किया है।
- कॉल सेंटर एवं मोबाइल ऐप की मदद से डोर स्टेप सेवा हेतु प्रत्येक 8-10 पंचायतों पर पशु अस्पताल व्यवस्था, पशुओं के लिए चिकित्सा सुविधा, टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान, कृमिनाशन जैसी सेवा की व्यवस्था।
- विशेष- मुजफ्फरपुर वन अरण्य, शेरपुर में बिहार का पहला वन्य जीव अस्पताल बनाए जाने की योजना है जिससे जंगल में बीमार या दुर्घटना में घायल वन्य जीव को समुचित इलाज मिल पाएगा ।
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बिहार में मत्स्य पालन क्षेत्र से संबंधित
पहल |
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मछली ब्रूड बैंक |
सीतामढ़ी |
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एक्वाटिक डिजीज रेफरल प्रयोगशाला |
किशनगंज |
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फिश फीड मिल एक इकाई |
मधेपुरा |
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फिश ऑन व्हील्स की दो इकाई |
पटना |
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व्यापक मछली उत्पादन प्रौद्योगिकी केंद्र |
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि
विश्वविद्यालय, पूसा, बिहार |
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