बिहार बजट 2026-27
कृषि विभाग की उपलब्धियां एवं कार्यक्रम
BPSC Mains special Notes
बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है, जहाँ लगभग 89% आबादी ग्रामीण
क्षेत्रों में निवास करती है और 76% लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष
रूप से कृषि पर निर्भर हैं।
कृषि क्षेत्र की प्रमुख उपलब्धियाँ और कार्यक्रम
- वर्ष 2005 से
लागू कृषि रोडमैप के परिणामस्वरूप खाद्यान्न उत्पादन में तीन गुना से अधिक वृद्धि हुई
है।
- वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य में 326.62 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन
दर्ज किया गया, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है।
- देश में मखाना और लीची उत्पादन में बिहार प्रथम स्थान पर है, जबकि मक्का में दूसरा, शहद में चौथा, चावल में पाँचवा और गेहूँ उत्पादन में
छठ्ठा स्थान प्राप्त है।
- मखाना का लगभग 85% उत्पादन अकेले बिहार में होता है, जिसके प्रोत्साहन हेतु
“राष्ट्रीय मखाना बोर्ड” का गठन किया गया है।
- कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र के डेटाबेस का एकीकृत रूप में
डिजिटल प्रबंधन के लिए “डिजिटल कृषि निदेशालय” स्थापित किया गया है।
- सभी 38 जिलों के 190 गाँवों को जलवायु अनुकूल मॉडल कृषि गाँव के रूप में विकसित किया जा रहा है।
- मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत 3 लाख मिट्टी नमूनों का विश्लेषण कर मृदा स्वास्थ्य
कार्ड वितरित किए गए।
- वित्तीय वर्ष में 32 अनुमंडल स्तरीय मिट्टी जाँच प्रयोगशालाएँ स्थापित की जा रही हैं।
- बिहार मशरूम उत्पादन में अग्रणी, वर्तमान उत्पादन 44,000 मीट्रिक टन।
- भंडारण, कोल्ड
स्टोरेज, प्रसंस्करण और विपणन सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर।
कृषि यांत्रिकीकरण एवं निवेश
- 91 प्रकार के कृषि यंत्रों पर 40–80% तक अनुदान।
- कृषि यंत्रीकरण सुदृढ़ करने हेतु “ए.आई. युक्त यांत्रिक कृषि मिशन” की स्थापना की योजना।
- “बिहार एग्री इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन” के अंतर्गत 1 लाख करोड़ रुपये निवेश का लक्ष्य।
- छँटाई–ग्रेडिंग
यूनिट, कोल्ड चेन, प्रोसेसिंग सेंटर का
निर्माण प्रस्तावित।
- सोनाचूर, कतरनी,
मर्चा जैसी सुगंधित चावल की किस्मों के निर्यात को बढ़ावा।
- श्री अन्न के उत्पादन को दुगना करना, फलों जैसे स्ट्रॉबेरी, ड्रैगन फ्रुट के उत्पादन एवं निर्यात बढ़ाना तथा प्रोसेसिंग प्लांट का
स्थापित करना।
बाजार एवं विपणन सुधार
- 53 कृषि उपज बाजार प्रांगणों का आधुनिकीकरण।
- 20 बाजार प्रांगण ई-नाम से जुड़े, 34 और जोड़े जाएंगे।
- ग्रामीण हाटों के विकास हेतु विभिन्न विभागों से समन्वय एवं बिहार कृषि एक्सीलेरेशन मिशन के गठन की कार्रवाई प्रक्रियाधीन।
- जी.आई. टैग उत्पादों
के लिए समर्पित बाजार व्यवस्था प्रस्तावित।
नई योजनाएँ
- केन्द्र के प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की तर्ज पर
बिहार सरकार द्वारा जननायक कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि की शुरुआत कर किसानों को
प्रतिवर्ष ₹3000 अतिरिक्त सहायता देने की
योजना।
- सात निश्चय-3 के अंतर्गत लक्ष्य (2025–2030) के तहत दलहन, तेलहन, मक्का, फल और सब्जी उत्पादन को बढ़ाने का लक्ष्य।
चतुर्थ कृषि रोडमैप
(2023–28)
- आगामी वर्षों में बीज विकास, फसल विविधीकरण, दलहन–तेलहन मिशन,
जैविक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, यांत्रिकीकरण, बागवानी विकास, कृषि
अनुसंधान एवं आधुनिक तकनीक के व्यापक कार्यक्रमों का क्रियान्वयन किया जाएगा।
इस प्रकार बिहार सरकार कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण, उत्पादन वृद्धि, किसानों
की आय में सुधार और विपणन तंत्र को सशक्त बनाने हेतु दीर्घकालिक एवं समग्र रणनीति के
साथ आगे बढ़ रही है।
पशुपालन, मत्स्य
एवं दुग्ध विकास
बिहार में पशुपालन एवं मत्स्य क्षेत्र निरंतर प्रगति कर रहा
है जिसे निम्न प्रकार समझ सकते हैं
- वर्तमान में राज्य में दुग्ध उत्पादन 133.98 लाख मीट्रिक टन, अंडा उत्पादन 378.39 करोड़ तथा मांस उत्पादन
4.21 लाख मीट्रिक टन तक पहुँच गया है। मत्स्य उत्पादन भी बढ़कर
9.59 लाख मीट्रिक टन हो गया है।
- भारत सरकार के आँकड़ों के अनुसार वार्षिक वृद्धि दर के
संदर्भ में बिहार अंडा उत्पादन में देश में प्रथम, मत्स्य उत्पादन में चौथे, दुग्ध उत्पादन में छठे और मांस
उत्पादन में नौवें स्थान पर है।
प्रमुख पहल एवं उपलब्धियाँ
- उन्नत नस्ल के बकरों से सीमेन स्ट्रॉ तैयार कर कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा देने हेतु गोट सिमेन स्टेशन की स्थापना की स्वीकृति।
- बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में “वन हेल्थ प्लेटफॉर्म” के अंतर्गत जुनोटिक रोगों – तपेदिक, ब्रुसेलोसिस, रेबीज आदि की सतत निगरानी की व्यवस्था।
- अनुमंडल स्तरीय पशु चिकित्सालयों में डिजिटल एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड मशीन लगाने की योजना।
- 24×7 पशु चिकित्सा सेवाओं का विस्तार एवं त्वरित रोग निदान प्रणाली का विकास।
- पशुओं में प्रजनन सेवाओं के नियमन हेतु बिहार पशु प्रजनन विनियमन
अधिनियम, 2025 लागू।
रोजगार एवं उद्यमिता विकास
- “समग्र गव्य विकास योजना” के तहत किसानों और बेरोजगार युवाओं को ऋण-सह-अनुदान आधारित डेयरी फार्मिंग सहायता।
- कुक्कुट अनुसंधान एवं प्रशिक्षण के लिए उत्कृष्टता केन्द्र की स्थापना प्रस्तावित।
- बकरी विकास हेतु प्रजनन एवं प्रशिक्षण संस्थान, सीमेन स्टेशन और बकरी फेडरेशन का गठन प्रस्तावित।
- सूकर विकास योजना के अंतर्गत अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना।
सात निश्चय–3 के अंतर्गत आगामी लक्ष्य (2026-27 के लिए)
- चतुर्थ कृषि रोडमैप के अंतर्गत डेयरी और मत्स्य पालन पर विशेष फोकस।
- प्रत्येक गाँव में दुग्ध उत्पादन समिति का गठन।
- प्रत्येक पंचायत में सुधा बिक्री केन्द्र की स्थापना।
- मधेपुरा में 50 किलोलीटर प्रतिदिन क्षमता के शीतक केन्द्र की स्थापना का कार्य किया जाएगा।
इस प्रकार बिहार सरकार पशुपालन, डेयरी और मत्स्य क्षेत्र को आधुनिक तकनीक,
बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन और संस्थागत सहयोग के माध्यम से सशक्त बना रही
है, जिससे रोजगार सृजन, किसानों की आय वृद्धि
और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
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सहकारिता विभाग की प्रमुख उपलब्धियाँ एवं योजनाएँ
बिहार में सहकारिता विभाग कृषि, बागवानी, मत्स्यपालन और
ग्रामीण उद्यमिता को संगठित एवं सशक्त बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को बेहतर बाजार, आधारभूत
संरचना, तकनीकी सहयोग और उचित मूल्य उपलब्ध कराने हेतु अनेक योजनाएँ
संचालित की जा रही हैं।
सब्जी उत्पादक सहकारी समितियों का विस्तार
- राज्य के सभी 38 जिलों के 534 प्रखंडों में प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी
समिति लिमिटेड (PVCS) का गठन किया जा चुका है।
- इन समितियों से 55,000 से अधिक सब्जी उत्पादक किसानों को सदस्य बनाया गया है।
- किसानों को संगठित कर सब्जी उत्पादन एवं विपणन की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
प्रसंस्करण एवं आधारभूत संरचना विकास
- सब्जियों के प्रसंस्करण हेतु हल्दी प्रसंस्करण इकाई तथा डिहाइड्रेशन यूनिट की स्थापना के अलावा संरक्षित कृषि को बढ़ावा देने के लिए पॉली हाउस निर्माण की योजना बनाई गई है।
- निर्यात को प्रोत्साहित करने हेतु मेगा फूड पार्क, रेफ्रिजेरेटेड वाहन तथा जिला स्तर पर हब/मदर वेयर हाउस का निर्माण किया जाएगा।
- प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समिति लिमिटेड से जुड़े सभी किसानों को कौशल विकास और क्षमतावर्धन संबंधी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन योजना
- बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन योजना के तहत 114 प्रखंडों में आधारभूत ढाँचे का निर्माण किया
जा रहा है।
- इन प्रखंडों में सब्जी हाट, मिनी कोल्ड स्टोरेज, सॉर्टिंग–ग्रेडिंग
शेड और प्रबंधन कार्यालय स्थापित किए जा रहे हैं।
- 200 प्रखंडों में “तरकारी आउटलेट्स” की स्थापना की जा रही है, जिससे किसानों को उचित मूल्य और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण सब्जियाँ उपलब्ध होंगी। इस योजना का विस्तार भविष्य में सभी प्रखंडों तक किया जाएगा।
धान अधिप्राप्ति में उपलब्धि
- खरीफ विपणन मौसम 2025-26 के अंतर्गत 24 जनवरी 2026 तक
6,841 समितियों के माध्यम से 2.42 लाख किसानों
से 17.98 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है।
- इससे किसानों को सीधा लाभ और पारदर्शी विपणन व्यवस्था सुनिश्चित हुई है।
सहकार भवन एवं कृषि संयंत्र बैंक
- राज्य में कुल 36 सहकार भवनों की स्वीकृति दी गई।
- मुख्यमंत्री हरित कृषि संयंत्र योजना के तहत 8,463 पैक्सों में कृषि संयंत्र बैंक स्थापित
किए जाने हैं जिससे किसानों को आधुनिक कृषि उपकरण उपलब्ध होंगे।
पैक्सों के माध्यम से जन औषधि केन्द्र
- 420 पैक्सों द्वारा जन औषधि केन्द्र खोलने हेतु आवेदन किया गया तथा अब तक 24 जन औषधि केन्द्र खोले जा चुके हैं।
किसान उत्पादक संगठन (FPO) का गठन
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के सहयोग से 21 जिलों के 100 पंचायतों
में 100 FPO गठित किए गए हैं। वर्तमान में 15 क्लस्टर आधारित व्यवसाय संगठन (CBBO) गठित किए गए
हैं जिसके द्वारा FPO को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। FPO के माध्यम से विभिन्न जिलों
में स्थानीय उत्पादों का व्यावसायिक उत्पादन प्रारंभ हुआ है, जैसे –
- पश्चिम चंपारण में चनपटिया मिक्स एवं मरचा चुड़ा
- भागलपुर में बटन मशरूम
- नालंदा में आँवला मुरब्बा
- कटिहार में मखाना उत्पाद
मत्स्यपालन सहकारी व्यवस्था
- मत्स्यपालन के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग और नेतृत्व प्रदान करने
हेतु प्रमंडल/जिला स्तर पर संघ तथा राज्य स्तर
पर परिसंघ का गठन प्रस्तावित है।
- इससे मत्स्य सहकारी समितियों को बेहतर प्रबंधन और बाजार सुविधा प्राप्त होगी।
शहद उत्पादन एवं विपणन
- राज्य में 145 प्रखंड
स्तरीय प्राथमिक शहद सहकारी समितियाँ गठित की गई हैं।
- शहद प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और विपणन के लिए “बिहार राज्य शहद प्रसंस्करण एवं विपणन सहकारी संघ लिमिटेड” का गठन किया गया है।
बंद चीनी मिलों का पुनरुद्धार
- मधुबनी के सकरी तथा दरभंगा के रैयाम में बंद पड़ी चीनी मिलों की भूमि पर सहकारी चीनी मिल स्थापित करने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है।
- इससे स्थानीय रोजगार सृजन और गन्ना किसानों को लाभ मिलेगा।
निष्कर्षत: सहकारिता विभाग द्वारा संचालित योजनाएँ बिहार के
किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम हैं।
सहकारी समितियों के माध्यम से संगठित विपणन, प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, कौशल विकास, और आधारभूत संरचना के विस्तार से किसानों की आय में वृद्धि, रोजगार सृजन और कृषि क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित हो रहा है।
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