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Mar 17, 2026

71th BPSC test bihar election result 2025

 

प्रश्न-बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों के आलोक मेंकल्याणकारी राजनीतिकी चुनावी प्रासंगिकता का मूल्यांकन कीजिए। (8 अंक)

उत्तर -भारतीय राजनीति में कल्याणकारी योजनाएँ लंबे समय तकलोकलुभावनवादके रूप में देखी जाती रही हैं लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव 2025 ने यह सिद्ध किया कि यदि कल्याण योजनाएँ जमीनी प्रभाव पैदा करें, तो वे स्थायी राजनीतिक समर्थन का आधार बन सकती हैं। बिहार चुनाव परिणाम के संदर्भ में इसे निम्‍न प्रकार समझ सकते हैं।

 

  • बिहार चुनाव परिणामों से स्पष्ट है कि सात निश्‍चय,  महिला-केंद्रित और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण आधारित योजनाओं ने मतदाताओं के निर्णय को गहराई से प्रभावित किया। इस चुनाव में महिला मतदान 71% से अधिक रहा जो इस बात का संकेत है कि कल्याणकारी नीतियों ने महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त किया।
  • चूनाव पूर्व 10-10 हजार रुपये की प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं ने केवल उपभोग नहीं, बल्कि छोटे आर्थिक प्रयासों को भी बढ़ावा दिया। इससे कल्याण कोअनुग्रहनहीं, बल्किअधिकारके रूप में देखा जाने लगा।
  • इसी क्रम में विपक्ष द्वारा रोजगार और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को उठाने के बावजूद, कल्याणकारी योजनाओं की विश्वसनीय प्रभाव मतदाताओं के लिए अधिक ठोस अनुभव बनी। यह दर्शाता है कि आज का मतदाता घोषणाओं से अधिक शासन-क्षमता और उसके प्रभाव को महत्व देता है।

 

हांलाकि कल्‍याणकारी राजनीति राजकोषीय बोझ को बढ़ाता है फिर भी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से स्‍पष्‍ट है कि प्रभावी, लक्षित और भरोसेमंद कल्याणकारी राजनीति लोकतांत्रिक समर्थन और राजनीतिक स्थिरता का मजबूत आधार बन सकती है।

 

 

प्रश्न-बिहार में विज्ञान, प्रावैधिकी तथा तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में हाल के सुधार राज्य के मानव संसाधन विकास और रोजगारपरक शिक्षा को किस प्रकार सुदृढ़ कर रहे हैं? स्पष्ट कीजिए। 38 अंक 

उत्तर-आर्थिक विकास के लिए केवल अवसंरचना पर्याप्त नहीं होती, बल्कि कुशल मानव संसाधन उसका वास्तविक आधार होता है। इसी सोच के तहत बिहार सरकार ने विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा को विकास की धुरी बनाते हुए संस्थागत विस्तार, आधुनिक पाठ्यक्रम और उद्योगोन्मुख प्रशिक्षण पर विशेष बल दिया है जिसे निम्‍न प्रकार देख सकते हैं:

 

संस्थागत विस्तार और समान अवसर

  • सात निश्चय कार्यक्रम औरअवसर बढ़े आगे पढ़ेपहल के तहत राज्य के हर जिले में एक अभियंत्रण महाविद्यालय और कम से कम एक पॉलीटेक्निक स्थापित किया गया है।
  • वर्तमान में 38 राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय, 46 पॉलीटेक्निक संस्थान कार्यरत हैं जिससे तकनीकी शिक्षा की पहुँच ग्रामीण और पिछड़े जिलों तक संभव हुई है।

 

उभरती तकनीकों पर आधारित प्रशिक्षण

  • राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में IIT पटना को नॉलेज पार्टनर बनाकर 33 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जा रहे हैं जहाँ AI, IoT,रोबोटिक्स, 3D प्रिंटिंग, ड्रोन तकनीक, इलेक्ट्रिक वाहन और इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन जैसी तकनीकों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
  • नवीन तकनीकों पर आधारित प्रशिक्षण से छात्रों को उद्योग की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप कौशल मिल रहा है।

 

अभियंत्रण शिक्षा में पाठ्यक्रम सुधार

  • इंजीनियरिंग कॉलेजों में अब पारंपरिक शाखाओं के साथ-साथ डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन, मेकाट्रॉनिक्स और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग जैसे पाठ्यक्रम शामिल किए गए हैं जिससे छात्र भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार हो रहे हैं।

 

स्वास्थ्य शिक्षा में विविधता

  • नालंदा में स्थापित पहला राजकीय यूनानी चिकित्सा महाविद्यालय एवं 200 बेड अस्पताल स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ परंपरागत चिकित्सा शिक्षा को संस्थागत आधार प्रदान करता है।
  • इस प्रकार के प्रयास से गैर-एलोपैथिक चिकित्सा पद्धतियों की पहुँच और रोजगार दोनों बढ़ेंगे।

 

इस प्रकार स्पष्ट है कि बिहार में तकनीकी शिक्षा अब केवल डिग्री आधारित न होकर कौशल, नवाचार और रोजगारोन्मुखता की ओर बढ़ रही है। संस्थागत विस्तार, आधुनिक पाठ्यक्रम और उद्योग-संरेखित प्रशिक्षण से राज्य की युवा शक्ति को प्रतिस्पर्धी बनाने की ठोस नींव रखी गई है जो दीर्घकाल में बिहार के औद्योगिक और आर्थिक विकास को गति देगी।

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