भारत में
जनसांख्यिकीय संक्रमण और राज्य वित्त:RBI रिपोर्ट
भारत की जनसांख्यिकीय
स्थिति
- भारत
की औसत आयु लगभग 28 वर्ष है, जो इसे अपेक्षाकृत युवा देश बनाती है।
- वर्तमान में कार्यशील आयु वाली आबादी (15–64 वर्ष) अपने ऐतिहासिक शिखर पर है।
- यह
स्थिति भारत को जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) प्राप्त
करने का अवसर प्रदान करती है।
राज्यों की
जनसांख्यिकीय स्थिति
- युवा आबादी वाले राज्य -बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में युवा आबादी का अनुपात अधिक है। इससे इन राज्यों के पास आर्थिक विकास और श्रम उत्पादकता बढ़ाने का बड़ा अवसर मौजूद है।
- मध्य आयु की आबादी वाले राज्य-तेलंगाना और उत्तराखंड जैसे राज्यों में जनसंख्या धीरे-धीरे मध्यम आयु की ओर बढ़ रही है। ऐसे राज्यों में जनसांख्यिकीय लाभांश का अवसर धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।
- वृद्ध होती आबादी वाले राज्य- केरल और तमिलनाडु जैसे राज्य जनसांख्यिकीय संक्रमण के उन्नत चरण में प्रवेश कर चुके हैं। इन राज्यों में कार्यशील आयु वाली आबादी का हिस्सा कम होने लगा है जिससे आर्थिक और राजकोषीय चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
जनसांख्यिकीय संक्रमण
का राज्यों की वित्तीय स्थिति पर प्रभाव
- संकुचित होता कर आधार -वृद्ध होती आबादी वाले राज्यों में श्रम बल का आकार घटने लगता है। इससे आर्थिक संवृद्धि की गति धीमी पड़ सकती है और कर देने वाले लोगों की संख्या कम होने से कर आधार संकुचित हो सकता है।
- बढ़ता हुआ प्रतिबद्ध व्यय- वृद्ध आबादी वाले राज्यों में पेंशन और ब्याज भुगतान जैसे व्ययों का बोझ बढ़ता है। उदाहरण के लिए 2024–25 में इन राज्यों ने अपने सामाजिक क्षेत्र के व्यय का लगभग 30% केवल पेंशन पर खर्च किया।
- बढ़ती राजकोषीय सुभेद्यता- ऐसे राज्यों में GSDP के अनुपात में ऋण और राजस्व प्राप्तियों के अनुपात में ब्याज भुगतान
अपेक्षाकृत अधिक होता है। इससे दीर्घकाल में उनकी वित्तीय स्थिरता पर दबाव बढ़
सकता है।
राज्यों के लिए नीतिगत
सुझाव
- युवा आबादी वाले राज्यों के लिए- शिक्षा, कौशल
विकास और स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े पैमाने पर निवेश करना चाहिए। इससे युवा आबादी
को उत्पादक कार्यबल में परिवर्तित किया जा सकता है।
- मध्य आयु की आबादी वाले राज्यों के लिए- आर्थिक विकास को बनाए रखते हुए सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य देखभाल के लिए वित्तीय बफर तैयार करने चाहिए। अर्थात् इन राज्यों को विकास और सामाजिक सुरक्षा की दोहरी रणनीति अपनानी चाहिए।
- वृद्ध होती आबादी वाले राज्यों के लिए- कार्य जीवन की अवधि बढ़ाना और सेवानिवृत्ति आयु को जीवन प्रत्याशा के अनुरूप बढ़ाना आवश्यक है। बुजुर्गों के लिए लचीली कार्य व्यवस्था और सिल्वर इकोनॉमी को प्रोत्साहित करना चाहिए।
निष्कर्ष
भारत में जनसांख्यिकीय संक्रमण राज्यों की आर्थिक और राजकोषीय नीतियों को गहराई से
प्रभावित कर रहा है। युवा आबादी वाले राज्यों के लिए यह जनसांख्यिकीय लाभांश
प्राप्त करने का अवसर है जबकि वृद्ध होती आबादी वाले राज्यों को सामाजिक सुरक्षा, पेंशन
और स्वास्थ्य व्यय के बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ेगा। इसलिए विभिन्न राज्यों को
अपनी जनसांख्यिकीय संरचना के अनुसार अलग-अलग नीतिगत रणनीतियाँ अपनानी होंगी ताकि
दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और विकास सुनिश्चित किया जा सके।

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