प्रश्न-बिहार बजट 2025–26 में घोषित महिला सशक्तिकरण से जुड़ी पहलें किस प्रकार आर्थिक आत्मनिर्भरता, सुरक्षा और सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा देती हैं? 8 अंक
उत्तर- बिहार बजट 2025–26 में महिला सशक्तिकरण को आर्थिक भागीदारी और सामाजिक
सुरक्षा से जोड़ते हुए अनेक बहुआयामी पहलें की गई हैं। यह दृष्टिकोण “सशक्त महिला, सक्षम महिला” की
अवधारणा को व्यवहारिक रूप देता है जिसे निम्न प्रकार समझ सकते हैं:-
कन्या विवाह मंडप योजना
- इसके तहत प्रत्येक पंचायत में विवाह मंडप का निर्माण और उसका संचालन महिला
स्वयं सहायता समूहों द्वारा किया जाना, गरीब परिवारों को विवाह सुविधा देने
के साथ-साथ महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित करता है।
- यह घोषणा सामाजिक सहयोग और आर्थिक सशक्तिकरण का अच्छा संयोजन है।
महिला हाट
- महिला हाट का लक्ष्य महिला उद्यमिता को संस्थागत बाजार उपलब्ध कराना है जहाँ
हस्तशिल्प, घरेलू उत्पाद और नवाचार आधारित वस्तुओं की सालभर बिक्री हो सके। इससे
महिलाओं को स्थायी स्टॉल, राष्ट्रीय स्तर के खरीदार और
पर्यटन से जुड़ने के अवसर मिलेंगे जिससे वित्तीय स्वतंत्रता को बल मिलेगा।
महिला सुरक्षा एवं अन्य सुविधाएं
- बजट में घोषित पिंक टॉयलेट, महिला सिपाहियों के लिए आवास और पिंक बस सेवा महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करते हैं जिससे उनकी गतिशीलता और कार्यस्थल तक पहुँच बढ़ेगी।
- चलंत व्यायामशाला, कामकाजी महिला छात्रावास, महिलाओं के स्वास्थ्य एवं जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाती हैं।
- ई-रिक्शा व दोपहिया वाहन पर अनुदान, महिला ड्राइविंग प्रशिक्षण केंद्र और पर्यटन गाइड प्रशिक्षण से महिलाओं के लिए स्वरोजगार विकल्प खुलेंगे।
इस प्रकार बजट घोषणाएँ सुरक्षा, रोजगार और उद्यमिता को जोड़ते हुए
महिला सशक्तिकरण को सामाजिक नीति से आगे बढ़ाकर आर्थिक परिवर्तन के साधन के रूप
में स्थापित करती हैं।
Join our BPSC Mains special Telegram Group
For more whatsapp 74704-95829
BPSC Mains special Notes
प्रश्न-बजट 2025–26 के आलोक में बिहार में सुशासन की दिशा में किए गए
प्रमुख प्रयास किस प्रकार दीर्घकालिक सामाजिक स्थिरता और विकास को प्रोत्साहित कर
सकती है? चर्चा करें। 38 अंक
उत्तर- सुशासन का आशय केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने से नहीं, बल्कि
प्रभावी प्रशासन, पारदर्शिता, नागरिक
सुरक्षा और सेवा वितरण की गुणवत्ता से है। बिहार बजट 2025–26 में सुशासन की दिशा में अनेक प्रावधान किए गए हैं जो यह दर्शाते हैं कि बिहार
अब सुशासन को बहुआयामी दृष्टि से आगे बढ़ा रहा है।
पुलिस सुधार और नागरिक सुरक्षा- सुरक्षित समाज सुशासन की पहली शर्त है और इस दिशा में
बिहार में अनेक कार्य हुए हैं जिससे कानून-व्यवस्था संवेदनशील, त्वरित और
भरोसेमंद बनी है जैसे-
- पुलिस बल 2005 के 42,481 से बढ़कर 2024 में 1.10 लाख हुआ।
- 30,000 से अधिक महिलाएँ पुलिस में जो देश में सर्वाधिक है
- 44 नए साइबर थाने, नए यातायात थाने और थानों का उन्नयन
- डायल-112, ‘सुरक्षित सफर सुविधा’ और घरेलू हिंसा मामलों में त्वरित सहायता
डिजिटल पुलिसिंग और फॉरेंसिक क्षमता- बिहार में अपराध नियंत्रण
को वैज्ञानिक बनाने हेतु साक्ष्य आधारित जांच और साइबर अपराध नियंत्रण को मजबूत किया
गया है। इस दिशा में निम्न किए गए –
- 968 थानों में CCTNS के तहत FIR व स्टेशन डायरी डिजिटल
- राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय ऑफ-कैंपस
- पटना व राजगीर में साइबर फॉरेंसिक प्रयोगशालाएँ
उत्तरदायी प्रशासन -उत्तरदायी प्रशासन और शिकायत निवारण सुशासन का मूल
तत्व जवाबदेही है जो नागरिकों को प्रशासनिक संरक्षण भरोसा देती है।
- दिसंबर 2024 तक 15.74 लाख शिकायतों का
निष्पादन
- 1,337 लोक सेवकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और दोषी अधिकारियों पर जुर्माना लगाया गया।
ई-गवर्नेंस- प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाने हेतु ई-गवर्नेंस व्यवस्था अपनायी
गयी जिससे औपचारिक अर्थव्यवस्था मजबूत हुई, राजस्व दक्षता बढ़ी और भ्रष्टाचार की
गुंजाइश घटी।
- Online Registration, e-payment को प्रोत्साहन
- औद्योगिक भूखंडों के निबंधन पर पूर्ण छूट
- स्टाम्प ड्यूटी में छूट, GST में बायोमेट्रिक सत्यापन, ऑडिट
मैनुअल
मद्यनिषेध
- अवैध शराब रोकथाम हेतु चेकपोस्ट व CCTV और ‘नशामुक्त
बिहार’ अभियान के तहत जनभागीदारी से शासन की नैतिक वैधता बढ़ी
हैं।
निष्कर्ष इस प्रकार बिहार बजट 2025–26 में सुशासन को सुरक्षा,
तकनीक, जवाबदेही, सामाजिक
विश्वास और प्रशासनिक सुधार के समन्वित मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह
बदलाव दर्शाता है कि राज्य अब नियंत्रण आधारित शासन से आगे बढ़कर सेवा आधारित,
डिजिटल और नागरिक-केंद्रित शासन की दिशा में अग्रसर है, जो दीर्घकालिक सामाजिक स्थिरता और विकास के लिए अनिवार्य है।

No comments:
Post a Comment