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Monday, October 03, 2022

बिहार में आपदा प्रबंधन

 

बिहार में आपदा प्रबंधन


बिहार में आपदा प्रबंधन संबंधी इस लेख में आप महत्‍वपूर्ण लेख को पढ़ सकते हैं जो बिहार लोक सेवा आयोग की मुख्‍य परीक्षा हेतु उपयोगी है । इसके अलावा नीचे दिए गए लिंक से अन्‍य पोस्‍ट को पढ़ सकते हैं तथा वीडियो के माध्‍यम से भी अपनी संपूर्ण बिहार सामान्‍य ज्ञान की तैयारी कर सकते हैं ।


प्राकृतिक घटनाएं जिसमें जीवन एवं संपत्ति की बड़ी हानि होती है और हजारों लोगों का जीवन भी प्रभावित होता है प्राकृतिक आपदा कहलाती है। अपनी भौगौलिक अवस्थिति और जल तथा मौसम संबंधी अनिश्चितताओं के कारण बिहार बाढ़, सूखा, भूकंप, चक्रवात, लू, आदि आपदाओं के प्रति सुभेद्य है । बिहार में जलवायु प्रेरित आपदाओं में हाल के वर्षों में वृद्धि हुई है जिसमें बाढ़ और सूखा प्रति वर्ष आनेवाली आपदाएं हैं जो राज्य के जनजीवन के साथ आर्थिक विकास की गति को भी प्रभावित करती है।

बिहार आपदा प्रबंधन की आवश्यकता

  1. अपनी भौगौलिक अवस्थिति और जल तथा मौसम संबंधी अनिश्चितताओं के कारण बिहार आपदाओं के प्रति सुभेद्य है तथा जलवायु के दृष्टिकोण से देश के सबसे संवेदनशील राज्यों में से एक है। इस कारण जलवायु प्रेरित आपदाओं जैसे बाढ़, सूखा, आंधी तूफान, लू की बारंबारता और गंभीरता हाल के वर्षों में बढ़ी है।
  2. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 1106 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर बिहार में उच्च जनसंख्या घनत्व पाया जाता है जिसके कारण राज्य के आर्थिक एवं प्राकृतिक संसाधनों पर अत्यधिक दबाव रहता है ।
  3. संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों में पर्यावरण संबंधी सुस्थिरता  सुनिश्चित करने तथा आपदाओं के दौरान सुरक्षित आबादी के बीच अनुकूलता विकसित करने की जरूरत पर बल दिया गया है।
  4. अप्रैल 2021 में जारी राष्ट्रीय जलवायु भेद्यता आकलन रिपोर्ट के अनुसार सुभेद्यता सूचकांक में बिहार 6th स्थान पर है । इस  रिपोर्ट के अनुसार बिहार का कटिहार जिला सबसे ज्यादा सुभेद्य है।

उपरोक्त कारणों से बिहार में आपदाओं के प्रबंधन हेतु आपदा प्रबंधन नीति महत्वपूर्ण हो जाता है । बिहार में आपदाएं और उनके प्रभावों को निम्न प्रकार समझा जा सकता है।

बिहार में आपदाएं एवं उनका प्रभाव

  1. बिहार देश का सर्वाधिक बाढ़ प्रवण राज्य है जहां कुल 38 जिले में 28 बाढग्रस्त है
  2. उत्तर बिहार के अधिकांश जिले जहां बाढ़ से प्रभावित है वहीं दक्षिण बिहार के 17 जिले सूखे से प्रभावित हैं ।
  3. बिहार में कुल बाढ़ प्रवण क्षेत्र इसके कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 73.06% तथा भारत का 16.5% है । बाढ़ से प्रभावित कुल भारतीय आबादी का 22% बिहार के लोग है।
  4. वर्ष 2020-21 में प्राकृतिक आपदाओं में बाढ़ के कारण 19 जिलों को क्षति पहुंची जिससे फसल उत्पादन को 727.88 करोड का और सार्वजनिक संपत्ति को 3218.87 करोड़ का नुकसान हुआ । कुल मिलाकर 100.23 लाख लोग इनसे प्रभावित हुए। 
  5. वर्ष 2020 में  आंधी तूफान के कारण 459 लोगों की मृत्यु हुई ।
  6. हाल ही में बाढ़ के साथ साथ कोविड महामारी का भी सामना बिहार को करना पड़ा जिसके कारण बिहार सरकार पर अत्यधिक आर्थिक  बोझ पड़ा लेकिन सरकार द्वारा संसाधनों के कुशलतापूर्वक प्रबंधन से इस पर नियंत्रण पाया जा सका । 
  7. बिहार में 7.15% ऐसा क्षेत्र है जहां आग लगने का जोखिम ज्यादा है। जलवायु परिवर्तन तथा बढ़ते तापमान के कारण ऐसी घटनाओं में वृद्धि दर्ज हो रही है।
  8. वर्ष 2019-20 में बिहार में आंधी तूफान एवं बिजली गिरने के कारण कुल 459 लोगों की मृत्यु हुई।
  9. वर्ष 2020-21 में आपदा प्रबंधन के कारण राज्य सरकार पर 3227.79 करोड़ रुपए का वित्तीय बोझ नकद सहायता, कृषि लागत सामग्रियों हेतु सब्सिडी आदि के रूप में पड़ा ।

उपरोक्त तथ्यों एवं आकड़ों से बिहार में आपदाओं के कारण होनेवाले जानमाल की क्षति को समझा जा सकता है । इसी कारण आपदाओं के कुशल प्रबंधन को राज्य सरकार प्राथमिकता देती है। बिहार में आपदाओं के गंभीरता को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग का गठन किया गया है जो आपदाओं तैयारी, आपदाओं के दौरान संकट प्रबंधन तथा आपदाओं के बाद राहत और पुनर्वास का काम देखता है। बिहार में आपदा प्रबंधन गतिविधियों के सुदुद्दीकरण के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं।


आपदा प्रबंधन  की दिशा में बिहार सरकार के प्रयास

  • बिहार सरकार ने सेंडई (जापान) में आपदा जोखिम न्यूनीकरण विषय पर आयोजित विश्व सम्मेलन में तय किए गए वैश्विक लक्ष्यों के आलोक में 15 वर्षो का रोडमैप तैयार किया है जिसे ‘‘बिहार आपदा जोखिम न्यूनीकरण रोड मैप, 2015-2030 कहा जाता है। सेंडाई  फ्रेमवर्क एग्रीमेंट के तहत 15 वर्षीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण रोडमैप 2015-2030 लागू करने वाला बिहार प्रथम राज्य है।
  • आपदा जोखिम प्रबंधन न्यूनीकरण रोड मैप के तहत आवश्यक तंत्र का गठन तथा एशियन डिजास्टर प्रिपेरेडनेस सेंटर बैंकॉक के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर।

बिहार सरकार द्वारा आपदाओं के न्यूनीकरण के लिए भविष्य का रोडमैप

बिहार आपदा जोखिम न्यूनीकरण रोड मैप, 2015-2030 के अन्तर्गत 2015-30 तक के लिए 4 लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।  इन लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु 2020 तक अल्पकालीन वर्ष, 2025 तक मध्यकालीन वर्ष तथा 2030 तक के लिए दीर्घकालीन क्रियाकलापों जैसे सुरक्षित ग्राम, सुरक्षित शहर सुरक्षित अजीविका, सुरक्षित बुनियादी सेवाएँ एवं सुरक्षित अत्यावश्यक आधारभूत संरचनाएँ को रोडमैप में शामिल किया गया है। आपदा जोखिम न्यूनीकरण क्रियाकलापों को सही ढंग से प्रतिपादित करने तथा इसके सतत अनुश्रवण एवं मूल्यांकन की भी व्यवस्था की गई है।


बिहार आपदा जोखिम न्यूनीकरण रोड मैप, 2015-2030 के अन्तर्गत  लक्ष्य

  1. वर्ष 2030 तक प्राकृतिक आपदाओं में मानव क्षति को आधार लाईन (Base Line) आंकड़ों की तुलना में 75% कम करना
  2. वर्ष 2030 तक परिवहन संबंधी आपदाओं (सड़क, रेल एवं दुर्घटना) में आधार लाईन आंकड़ों की तुलना में पर्याप्त कमी लाना।
  3. वर्ष 2030 तक आपदाओं से प्रभावित व्यक्तियों को संख्या में आधार लाईन आंकड़ों की तुलना में 50% की कमी करना ।
  4. वर्ष 2030 तक बिहार राज्य में आपदाओं से होने वाली क्षति में मूलाधर आंकड़ों की तुलना 50% को कमी करना ।

  • आपदाओं के दौरान विभिन्न कार्यों के संचालन हेतु राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल यानी SDRF  की पूर्णकालिक बटालियन का गठन कर ऐसा करने वाला बिहार प्रथम राज्य बना तथा  इस बटालियन के लिए बिहटा, पटना में 75 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गयी ।
  • उत्तरी बिहार में प्रभावी खोज एवं बचाव अभियान को बल देने हेतु सुपौल जिले में राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल को नियमित कंपनी स्थापित करने की प्रक्रिया आरंभ की गयी।
  • 2018 में बिहार प्रशासनिक सेवा के सभी स्तरों के पदाधिकारियों को आपदा प्रबंधन के आयामों जैसे- आपदा रोकथाम, शमन, न्यूनीकरण, त्वरित रेस्पोंस, पुर्नस्थापन, पुर्ननिर्माण आदि के बारे में पूर्ण जानकारी देने हेतु आपदा प्रबंधन एवं जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन पर व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
  • आपदा प्रबंधन हेतु बाढ़, सूखा और पेयजल संकट के लिए कार्यसंचालन कार्याविधि का निर्माण किया गया।
  • आपदा के समय क्विक रिस्पांस हेतु स्वास्थ्य एवं आपदा विभाग के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुए।
  • बाढ़ और सूखा जैसी स्थितियों से निपटने हेतु जल संरक्षण के उपायों को सक्षम बनाने के लिए उत्तर बिहार में  तालाबों और जलाशयों तथा दक्षिण बिहार में आहर, पइन को पुनर्जीवित करने हेतु पहल की जा रही है।
  • राज्य सरकार प्रदेश के 12 जिलों में स्थित 26 जलाशय/तालों (वेट लैंड) के हेल्थ कार्ड बनाने जा रही है. यह वैसे ही कार्ड होंगे, जैसे किसी व्यक्ति का या सॉयल हेल्थ कार्ड बनाये जाते हैं ।
  • इसमें जलाशयों के जल की सेहत से लेकर उसके प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरणीय संतुलन में उसकी क्षमता का भी आकलन किया जायेगा।
  • राज्य आपदा प्रबंधन योजना में समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन को सक्षम बनाने हेतु संकल्प केन्द्र की योजना को अमल में लाने के महत्व पर जोर दिया गया है।
  • कृषि संबंधी आपदाओं से बचाने एवं किसानों को सहायता हेतु बिहार कृषि विपदा किसान सहायता योजना 2015 को लाया गया।
  • आपदा प्रभावित मृतक परिवार को 24 घंटे के अंदर अनुग्रह राशि देने की व्यवस्था।
  • कोरोना में जिन बच्चों ने अपने मातापिता या इनमें से किसी को भी खोया है ऐसे बच्चों को 18 वर्ष का होने तक बिहार सरकार द्वारा हर महीने 1500 रुपये देने की घोषणा । इसके अलावा ऐसे बच्चे जिनके अभिभावक नहीं हैं उनकी देखभाल सरकारी बाल गृह में की जाएगी तथा ऐसे अनाथ बच्चियों का कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में प्राथमिकता के आधार पर नामांकन भी कराया जाएगा।
  • राज्य आपदा अनुक्रिया बल को मोटरबोट, लाइफ जैकेट, गोताखोरी, खोज, राहत और बचाव के अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध कराया गया।
  • इस प्रकार बिहार सरकार द्वारा आपदा प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विभिन्न आपदाओं से निबटने हेतु अल्पकालीन और दीर्घकालीन दोनों तरह की योजनाएँ बनाई गई है। 

 

बाढ़ एवं सूखा नियंत्रण हेतु प्रयास

बिहार के 28 जिले बाढ़ प्रवण है जिनमें अधिकांश उत्तर बिहार में स्थित है वहीं दक्षिण बिहार के 17 जिले सूखे से प्रभावित हैं । अतः बाढ़ तथा सूखे के कारण फसल क्षति को कम करने हेतु सरकार द्वारा अनेक उपाए किए गए हैं।

  1. बाढ़ प्रवण जिलों के लिए बाढ़ जोखिम नक्शे तथा आकस्मिक फसल प्रबंधन योजनाओं का निर्माण।
  2. सुखा प्रवण जिलों के लिए आकस्मिक फसल प्रबंधन योजनाओं का निर्माण तथा प्रचार प्रसार।
  3. कृषि वैज्ञानिकों की प्रतिनियुक्ति कर बाढ़ तथा सूखे के समय कृषकों को तकनीकी सहायता पहुंचाने की व्यवस्था।
  4. सूखे के समय किसानों को नहर के अंतिम छोर पर उपलब्ध जल मुहैया कराने हेतु उपयुक्त प्रशासनिक उपाय।
  5. आपदा राहत कोष से क्षतिग्रस्त फसलों के लिए सब्सिडी मुहैया कराने की व्यवस्था।
  6. बाढ़ एवं सूखा ग्रस्त क्षेत्रों में फसल बीमा योजना का क्रियान्वयन।
  7. विशेष परिस्थितियों में कम समय में होने वाले फसलों के लिए बिहार राज्य बीज निगम में बीज बैंक की स्थापना।
  8. सुखा प्रवण क्षेत्रों में सूखा प्रतिरोधी तथा बाढ़ प्रवण क्षेत्रों में नमी प्रतिरोधी फसलों को बढ़ावा।
  9. मानव जनित आपदाओं के प्रति बेहतर तत्परता के लिए आपदा प्रबंधन कोषांग द्वारा निगरानी रखी जा रही है।

15वां वित्त आयोग एवं आपदा प्रबंधन

बिहार भारत का सबसे आपदाग्रस्त राज्य है जो प्रति वर्ष बाढ़ और सूखाड़ के साथ साथ चक्रवात, वज्रपात आदि आपदाओं का सामना करता है। इन आपदाओं के कारण बिहार को प्रति वर्ष भारी मात्रा में  राशि खर्च करना पड़ता है। अतः 15वें वित्त आयोग द्वारा भी इसको समझते हुए आपदा प्रबंधन की राशि वृद्धि की अनुशंसा की गयी है ।

15वें वित्त आयोग द्वारा बिहार को आपदा प्रबंधन के लिए 10,432 करोड़ रु. की अनुशंसा की गयी है जो पिछले वित्त आयोग की तुलना में चार गुना ज्यादा है । आपदा प्रबंधन राशि की यह वृद्धि बिहार के लिए काफी फायदेमंद है।


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  2. सरलस्पष्ट  एवं बेहतर प्रस्तुतीकरण 
  3. प्रासंगिक एवं परीक्षा हेतु उपयोगी सामग्री का समावेश 
  4. सरकारी डाटासर्वेसूचकांकोंरिपोर्ट का आवश्यकतानुसार समावेश
  5. आवश्यकतानुसार टेलीग्राम चैनल के माध्यम से इस प्रकार के PDF द्वारा अपडेट एवं महत्वपूर्ण मुद्दों को आपको उपलब्ध कराया जाएगा 
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