भारत-अफगानिस्तान संबंधों और अफगानिस्तान के विदेश मंत्री की यात्रा के साथ संबंधों के रणनीतिक पुनर्संरचनाओं का विस्तृत वर्णन करें। [7]
उत्तर-
2021 में तालिबान की सत्ता वापसी के बाद भारत-अफगानिस्तान संबंधों में अनिश्चितता
उत्पन्न हुई। किंतु 2025 में अफगानिस्तान
के विदेश मंत्री की भारत यात्रा ने व्यावहारिक संवाद की दिशा में दोनों देशों के
संबंधों के रणनीतिक पुनर्संरचना को प्रदर्शित किया है जिसे निम्न प्रकार समझ सकते
हैं
राजनयिक एवं आर्थिक पुनर्संरचना
- भारत
ने काबुल तकनीकी मिशन को “पूर्ण भारतीय दूतावास” का दर्जा देते हुए सीमित
लेकिन निरंतर राजनयिक संपर्क बढ़ाया।
- भारत-अफगानिस्तान
एयर फ्रेट कॉरिडोर,
जल, ऊर्जा एवं आधारभूत संरचना परियोजनाओं में
सहयोग पर चर्चा।
- कृषि, स्वास्थ्य
एवं मानवीय सहायता आधारित सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति।
सुरक्षा एवं क्षेत्रीय रणनीति
दोनों
पक्षों ने आतंकवाद के विरुद्ध समन्वित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। अफगानिस्तान
ने अपनी भूमि का उपयोग भारत-विरोधी आतंकी गतिविधियों के लिए न होने देने का
आश्वासन दिया जिसके रणनीतिक महत्व निम्न हैं
- पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेटवर्क पर दबाव।
- क्षेत्रीय स्थिरता एवं सुरक्षा सहयोग को मजबूती।
- भारत की पश्चिम एवं मध्य एशिया नीति को बल।
- रणनीतिक स्वायत्ता आधारित क्षेत्रीय कूटनीति को समर्थन।
इस
प्रकार भारत ने तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता देने से बचते हुए “संतुलित एवं
सावधानीपूर्ण सहभागिता” की नीति अपनायी। इस यात्रा से जहां भारत की “विकास सहयोगी”
की छवि मजबूत हुई वहीं मध्य एशिया तक क्षेत्रीय संपर्क को भी बढ़ावा मिला है।

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