परमाणु ऊर्जा
भारत में परमाणु ऊर्जा
विकासशील देश होने के कारण
भारत की विद्युत आवश्यकताओं का एक बड़ा भाग गैर पारम्परिक स्रोतों से पूरा होता है
क्योंकि ऊर्जा की बढ़ती मांग को पूरा करने में पारम्परिक स्रोत सक्षम नहीं है। अतः
इस परिप्रेक्ष्य में परमाणु
ऊर्जा की महत्वपूर्ण तथा एक निश्चित भूमिका है।
विकासशील देशों में
भारत एकमात्र ऐसा देश है, जहां स्वदेशी रूप से विकसित रिएक्टरों का उपयोग
करके बिजली उत्पन्न की जाती है। यूरेनियम-233 का
उपयोग कर दुनिया का पहला थोरियम आधारित नाभिकीय संयंत्र, "भवनी", कलपक्कम में
स्थापित किया जा रहा है।
भारत में प्राकृतिक यूरेनिमय
का भंडार लगभग 70,000 टन है जबकि थोरियम का भंडार लगभग 3,60,000 टन है तथा भारत के परमाणु ऊर्जा में झारखंड, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक, मेघालय, नागालैंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों का महत्वपूर्ण योगदान है।
वर्तमान में भारत में 24 परमाणु रिएक्टरों के माध्यम से 8,180
मेगावाट क्षमता का उत्पादन हो रहा है। पिछले एक दशक में परमाणु ऊर्जा क्षमता में 70% वृद्धि हुई है। भारत के 2070
तक नेट जीरो ऊर्जा संक्रमण लक्ष्य
के तहत 2047 तक 1 लाख मेगावाट परमाणु
क्षमता की आवश्यकता हो सकती है।
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केंद्रीय
बजट 2025-26 में परमाणु ऊर्जा मिशन की घोषणा- मुख्य
बिंदु
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भारत में परमाणु ऊर्जा की आवश्यकता
- भारत में जीवाश्म ईंधनों की उपलब्धता सीमित है।
- जल विद्युत उत्पादन क्षमता सीमित है और मानसून पर निर्भर है।
- प्रदूषण रहित, स्वच्छ ऊर्जा की आवश्यताओं की पूर्ति हेतु।
- भारत में प्रति व्यक्ति विद्युत खपत वैश्विक प्रति व्यक्ति विद्युत खपत से काफी कम है।
- प्रति व्यक्ति ऊर्जा की बढ़ती मांग को पूरा करने हेतु।
- ऊर्जा आयात में कमी लाने हेतु।
- भारत में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु।
भारत सरकार ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाभिकीय ऊर्जा को
महत्वपूर्ण मानती है और इस कारण जहां अनेक देश सुरक्षा कारणों से परमाणु ऊर्जा संयंत्रें को बंद करने
पर विचार कर रहे हैं वही भारत नाभिकीय ऊर्जा पर बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रही
है।
वित्त वर्ष 2025-26 बजट में परमाणु ऊर्जा के लिए महत्वपूर्ण निणय के तहत भारत ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य तय किया। इसके लिए सरकार ने “न्यूक्लियर एनर्जी मिशन” की घोषणा किए हैं। इस मिशन के अंतर्गत 2033 तक पाँच स्वदेशी स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर तैयार होंगे, जो सस्ते, लचीले और सुरक्षित होंगे।
अप्रैल 2026 में
तमिलनाडु के कल्पक्कम स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर द्वारा
क्रिटिकैलिटी प्राप्त करने के साथ भारत परमाणु ऊर्जा के दूसरे चरण में प्रवेश कर
चुका है। भारत की यह उपलब्धि उल्लेखनीय है और भारत का लक्ष्य है कि 2050 तक परमाणु ऊर्जा को 25% तक लाया
जाए जिसके लिए निम्न प्रकार से भारत में परमाणु ऊर्जा क्षमता को बढ़ा सकता है।
- अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए रियक्टर की स्थापना।
- स्थानीय समुदायों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए कठोर मानकों के साथ ।
- ऊर्जा के अन्य रूपों के साथ नाभिकीय ऊर्जा को अधिक लागत-प्रतिस्पर्द्धी बनाकर ।
- रिएक्टर डिज़ाइन, अपशिष्ट प्रबंधन और सुरक्षा प्रणालियों में नवाचार।
- उन्नत प्रौद्योगिकियों
की स्थापना में निवेश
- विभिन्न देशों के साथ सहयोग एवं अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान पहलों में भागीदारी कर
हांलाकि अत्यधिक लागत, पर्यावरणीय प्रभाव तथा सार्वजनिक समर्थन की कमी आदि परमाणु ऊर्जा के खिलाफ तर्क प्रस्तुत करते हैं फिर भी परमाणु ऊर्जा के अपने लाभ भी है तथा भारत अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को बढ़ा सकता है।
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भारत के परमाणु कार्यक्रम के
लिए चुनौतियाँ |
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सीमा
पर तनाव और आतंकवादी मुद्दे |
भारत
को पाकिस्तान और चीन से परमाणु खतरे का सामना करना पड़ रहा है, विशेषकर सीमा पर जारी तनाव और आतंकवादी
गतिविधियों के कारण। ये देशों के परमाणु हथियारों का विस्तार और भारत के खिलाफ
उनके संभावित रणनीतिक उद्देश्यों से स्थिति जटिल हो जाती है। |
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हाइपरसोनिक
मिसाइलों और एआई की प्रगति |
हाइपरसोनिक
मिसाइलों, स्वायत्त हथियारों और कृत्रिम
बुद्धिमत्ता (एआई) में तीव्र प्रगति ने परमाणु निवारण रणनीतियों के लिए नई
चुनौतियाँ उत्पन्न की हैं। इन तकनीकों से परमाणु सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन में
जटिलताएँ बढ़ी हैं। |
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साइबर
हमलों का खतरा |
बढ़ते
साइबर हमलों के कारण परमाणु प्रणालियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण हो
गया है। यदि इन प्रणालियों में कोई कमजोरी आई, तो इसके गंभीर परिणाम हो
सकते हैं, जैसा कि 2019 में कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा
संयंत्र पर हुए कथित साइबर हमले से देखा गया। |
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पर्यावरणीय
और स्वास्थ्य प्रभाव |
भारत
के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को रेडियोधर्मी संदूषण और पर्यावरणीय, स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों जैसी
चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है, जो परमाणु ऊर्जा संयंत्रों
के संचालन से उत्पन्न होते हैं। |
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परमाणु ऊर्जा का पुनरुत्थान अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की हालिया रिपोर्ट
"परमाणु ऊर्जा का एक नया युग" यह संकेत देती है कि वैश्विक ऊर्जा
परिदृश्य में परमाणु ऊर्जा एक बार फिर प्रमुख विकल्प के रूप में उभर रही है।
ऊर्जा सुरक्षा, कार्बन कटौती और
टिकाऊ विकास के संदर्भ में परमाणु ऊर्जा को रणनीतिक समाधान माना जा रहा है।
रिपोर्ट के प्रमुख बिन्दु को निम्न प्रकार देख सकते हैं बढ़ती वैश्विक स्वीकृति और निवेश प्रवृत्तियाँ F विश्व के 40+ देशों ने अपने ऊर्जा मिश्रण में परमाणु ऊर्जा की
हिस्सेदारी बढ़ाने की योजना बनाई है। F स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs)
की वैश्विक क्षमता 2040 तक 80 गीगावॉट तक पहुँच सकती है, जो कुल परमाणु क्षमता का 10% होगी। F 2030 तक परमाणु
ऊर्जा क्षेत्र में वार्षिक निवेश बढ़कर दोगुना होने की संभावना है। F 2024 के अंत तक
निर्माणाधीन 63
परमाणु रिएक्टरों में से तीन-चौथाई उभरती अर्थव्यवस्थाओं में हैं जिनमें चीन
अग्रणी है।
2023 में वैश्विक बिजली उत्पादन में परमाणु ऊर्जा की 9% हिस्सेदारी रही
और यह कम-कार्बन उत्सर्जन वाले स्रोतों में जलविद्युत के बाद दूसरे स्थान पर है।
विकासशील देशों में परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी केवल 5% है, जबकि विकसित देशों में यह 17% तक है। |
भारत में परमाणु ऊर्जा की समस्याएं
- परमाणु ऊर्जा हेतु यूरेनियम,आवश्यक उपकरण,तकनीकी मामले में विदेशों पर निर्भरता।
- कम क्षमतायुक्त नभिकीय ऊर्जा का प्रयोग, घरेलू प्राकृतिक यूरेनियम की गुणवत्ता निम्न होना।
- दक्ष एवं कुशल मानव संसाधन का अभाव।
- कुछ देश नहीं चाहते कि NTP का गैर हस्ताक्षरकर्ता देश भारत को यूरेनियम प्राप्त हो।
- भारत थोरियम आधारित कार्यक्रम के बजाए यूरेनियम कार्यक्रम की ओर बढ़ रहा है।
- पूंजी प्रधान तकनीक होने के कारण उन्नत तकनीक का अभाव।
- उच्च प्रारंभिक लागत एवं दीर्घकालीन परियोजना।
- न्यूक्लियर वेस्ट, परमाणु दुर्घटना का खतरा, पर्यावरणीय चिताएं एवं तथा स्थानीय विरोध।
- भारत में जादूगुड़ा, तारापुर, रावतभाटा और कलपक्कम के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों से आस-पास के गाँवों, बस्तियों में लोगों को परमाणु विकिरण के प्रभाव से अनेक बीमारियां भी हो रही है।
परमाणु ऊर्जा के लाभ
- निर्बाध रूप से ऊर्जा आपूर्ति में सक्षम होने के कारण ऊर्जा का एक नियमित स्रोत तथा विश्वसनीय स्रोत।
- यूरेनियम के एक परमाणु के विखंडन से मुक्त ऊर्जा कोयले के एक अणु से प्राप्त ऊर्जा की तुलना में कई गुना ज्यादा।
- परमाणु ऊर्जा द्वारा हरितगृह गैस, कार्बन उत्सर्जन नहीं होता तथा ग्लोबल वर्मिंग में कम योगदान।
- कई देश परमाणु ऊर्जा द्वारा उत्पन्न विद्युत ऊर्जा का उपयोग कर रहे हैं।
- परमाणु ऊर्जा दीर्घकाल तक ऊर्जा संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम है।
- अन्य स्रोतों की अपेक्षा कम खर्च पर ऊर्जा, विदेशी ऊर्जा आयात पर निर्भरता में कमी ।
- बेहतर कचरा प्रबंधन से सुरक्षित ऊर्जा प्राप्त ।
- जलवायु परिवर्तन से निपटने तथा पेरिस समझौते के लक्ष्यों को हासिल करने में सहायक।
परमाणु ऊर्जा से हानि
- परमाणु ऊर्जा संयंत्र पूर्ण रूप से सुरक्षित नहीं माना जा सकता। फुकुशिमा की घटना इसका उदाहरण है।
- फुकुशिमा घटना के बाद विश्व के कई देशों ने अपने परमाणु कार्यक्रमों पर पुनर्विचार शुरू कर दिया। जर्मनी ने शून्य परमाणु ऊर्जा हेतु पहल शुरू कर दी है तथा अमेरिका ने हाल के वर्षों में कोई नया परमाणु संयंत्र नहीं लगाया ।
- परमाणु ईंधन को शीतल रखने
हेतु भारी मात्रा में पानी का प्रयोग से जल प्रदूषित का खतरा।
- परमाणु ऊर्जा की आरंभिक लागत, रखरखाव तथा परमाणु कचरे के निपटान बहुत ज्यादा खर्चीली होना।
- एक समय के बाद परमाणु संयंत्रों को बंद करने की स्थिति में परमाणु संयंत्र को तोड़ना, रेडियोएक्टिव कचरे को डंप करना अधिक खर्चीला है।
- रिएक्टर में प्रयुक्त रेडियोधर्मी परमाणु ईंधन की विशाल मात्रा के रिसाव से वातावरण प्रदूषित होने का खतरा, तापीय प्रदूषण में वृद्धि ।
- परमाणु ऊर्जा तैयार करने से परमाणु हथियार का भी रास्ता खुलता है जिससे परमाणु हथियारों की होड़ बढ़ सकती है।
परमाणु ऊर्जा के साथ जोखिम/चुनौतियां
- विखंडनीय पदार्थों का अप्रत्याशित व्यवहार।
- आतंकवादियों के हमले का केन्द्र बनने की आशंका।
- विकिरण का पक्षियों, जीव-जंतुओं पर नकारात्मक प्रभाव, पर्यावरणीय चिंताएं एवं जोखिम ।
- शीतलक के बाधित होने तथा अन्य कारणों से चेरनोबिल तथा फुकुशिमा जैसी दुर्घटना का खतरा।
- परमाणु हथियारों से संबंधित खतरा ।
- विकिरण के रिसाव से उत्पन्न जोखिम।
- भूकंप, तथा सूनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा।
- रियक्टरों से उत्पन्न कचरे के सुरक्षित निपटारे का जोखिम ।
इस प्रकार नाभिकीय रियक्टरों के साथ अनेक जोखिम जुड़े हुए होते हैं फिर भी इसके जोखिम को कम करने हेतु संयंत्रों के पास सुरक्षा मानकों के पालन हेतु अनेक प्रयास किए जाते हैं जैसे- नाभिकीय रियक्टरों का ढांचा अत्यधिक मजबूत बनाना, भूकंप से सुरक्षित क्षेत्रों में NPP की स्थापना किया जाना, समुद्र तटीय क्षेत्रों में रियक्टरों में सुरक्षा दीवार को ऊंचा बनाना, अंतर्राष्ट्रीय मानकों का पालन इत्यादि ।
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अर्थव्यवस्था को गति देने
तथा सीमित ऊर्जा संसाधनों के संदर्भ में आवश्यक है कि गैर-परम्परागत
स्रोतों के दोहन द्वारा राष्ट्रीय विद्युत की आवश्यकताओं को पूरा किया जाए और इस संदर्भ
में परमाणु ऊर्जा में व्यापक संभावनाएं एवं क्षमताओं को समझते हुए तीन चरणों वाला परमाणु
ऊर्जा कार्यक्रम अपनाया गया।

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