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Monday, November 14, 2022

भारतीय लोकतंत्र के 75 वर्ष

 

भारतीय लोकतंत्र के 75 वर्ष

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विश्‍व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों में शामिल भारतीय लोकतंत्र के 75 वर्ष पूर्ण हो गए जिसके लोकतंत्र के मूल उद्देश्‍य में समाज के सभी वर्गों के लिए स्वीकार्य लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थापना करना सबसे महत्‍वपूर्ण है । हांलाकि विश्‍व के कई देश अपनी शासन व्यवस्था को लोकतांत्रिक बताते हैं लेकिन तानाशाही होने के कारण लोकतंत्र नहीं कहा जा सकता। पिछले कुछ समय पूर्व म्यांमार, ट्यूनीशिया तथा सूडान में सत्ता परिवर्तन तानाशाही का ही उदाहरण है।

इसके अलावा सऊदी अरब, चीन, उत्तर कोरिया जैसे देशों में शासक का चुनाव जनता द्वारा नहीं होता जबकि भारत के संदर्भ में बात करें तो यहां जनता शासक का चुनाव करती है साथ ही कई ऐसी व्यवस्थाएं है जो भारत को एक लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में स्थापित करती है।

लोकतांत्रिक राज्य की विशेषताएं

  • सार्वभौमिक मताधिकार द्वारा प्रत्येक नागरिक को मत देने का अधिकार।
  • स्वतंत्र निर्वाचन आयोग के माध्यम से चुनाव कराए जाने की व्यवस्था।
  • किसी भी भारतीय नागरिक के शासन के सर्वोच्च पद पर नियुक्त होने की संभावना ।
  • पंचायती राज्य के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वशासन की व्यवस्था।
  • अनुसूचित जाति एवं जनजाति, अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्गो, महिलाओं के हितों के लिए विशेष व्यवस्था।
  • मानव के मूलभूत अधिकारों को संविधान के द्वारा संरक्षण।
  • हित समूह, दबाव समूह को मान्यता ।
  • स्वतंत्र न्यायपलिका, विधायिक तथा कार्यपलिका से अलग कार्यक्षेत्र ।
  • नागरिक के प्रति राज्य के कर्तव्य को नीति निदेशक तत्व के माध्यम से संबोधित किया गया।

इस प्रकार उपरोक्त तथ्यों के आधार पर देखा जाए तो भारत में लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था है जिसमें जनता द्वारा जनता के लिए शासन की व्यवस्था की गई है और सभी समुदायों, वर्गों के हितों की रक्षा की गयी है।

लोकतांत्रिक देश का स्वरूप

  • जनता को शासक चुनने का अधिकार ।
  • चुनाव में एक से अधिक विकल्प की व्यवस्था ।
  • संसदीय व्यवस्था के माध्यम से उत्तरदायी स्वरूप वाले शासन की व्यवस्था ।
  • तानाशाही और हिंसा का स्थान नहीं।
  • विभिन्न मामलों पर चर्चा एवं बहस की गुंजाइश।
  • कानून के समक्ष समानता तथा जाति, धर्म लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं।
  • रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे न्यूनतम मानवीय साधनों की उपलब्धता।

भारतीय लोकतंत्र का विकास

पिछले कुछ वर्षों में भारतीय लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था को कई राजनीतिक और न्यायिक निर्णयों ने विकसित करने में महत्‍वपूर्ण योगदान दिया है जिसे सकारात्मक और नकारात्मक वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है।

भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करनेवाली सकारात्‍मक पहल

  1. पिछड़े वर्गों/अल्पसंख्यकों/आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो को शिक्षा और सार्वजनिक रोजगार में आरक्षण की व्‍यवस्‍था ।
  2. 73वें, 74वें संविधान संशोधन द्वारा सत्‍ता का विकेन्‍द्रीकरण एवं शासन में लोगों की भागीदारी ।
  3. बिहार में महिलाओं हेतु 50% आरक्षण ।
  4. आपातकालीन शक्तियों के दुरुपयोग को रोकने की व्‍यवस्‍था ।
  5. संविधान की मूल संरचना के सिद्धांत का प्रतिपादन एवं उसके माध्‍यम से संविधान का संरक्षण ।
  6. गरीब और कमजोर लोगों के लिए कई सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का अस्तित्व।
  7. अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा अधिनियम का क्रियान्‍वयन
  8. विभिन्न राज्यों में भूमि सुधार
  9. संघ और राज्य दोनों स्तरों पर गठबंधन सरकारों का अस्तित्व
  10. बहुदलीय व्यवस्था का अस्तित्व
  11. राज्य-नियंत्रित अर्थव्यवस्था से उदारीकृत और वैश्वीकृत अर्थव्यवस्था में बदलाव।
भारतीय लोकतंत्र को कमजोर करने वाली नकारात्‍मक पहल

  1. दलबदल विरोधी कानून प्रभावहींन होना तथा हाल की अनेक घटनाएं ।
  2. राजनीति का अपराधीकरण ।
  3. कमजोर होता विपक्ष एवं संवैधानिक संस्‍थाओं के प्रति कम होता विश्‍वास । 
  4. संसद और राज्य विधानमंडल में स्वायत्तता की कमी ।
  5. व्‍यक्तिवादी लोकतंत्र एवं तानाशाही को बढ़ावा।
  6. विभिन्न संवैधानिक और वैधानिक निकायों में जवाबदेही का अभाव।
  7. विधायिका और न्यायपालिका में महिलाओं का कम प्रतिनिधित्व, लैंगिक असमानता ।
  8. राज्यों के बीच विवादों के बढ़ते मामले और राज्य और केंद्र सरकारों के बीच लगातार टकराव।
  9. चुनावी में बढ़ते धन बल का प्रयोग एवं कदाचार के उदाहरण।
  10. रोक एवं संतुलन सिद्धांत का उल्‍लंघन कर कार्यपालिका क्षेत्र में न्यायपालिका का हस्तक्षेप।

वैश्विक स्तर पर लोकतंत्र की स्थिति

  • कई वैश्विक संस्थाएं जैसे फ्रीडम हाउस, वी डेम, इंटरनेशनल IDA आदि ने माना है कि विश्व में लोकतांत्रिक मूल्यों का पतन की घटनाएं तथा लोकतंत्र के विरोध की प्रवृत्ति अत्यंत तीव्र गति से बढ़ रही है। म्यांमार, ट्यूनीशिया तथा सूडान में सत्ता परिवर्तन इसका उदाहरण है।
  • विश्व में लोकतंत्र के नए नए मानदंड स्थापित हो रहे है। चीन जहां एक तरफ स्वयं को लोकतांत्रिक देश के रूप में मान्यता दे रहा है वहीं दूसरी ओर उइगर  मुसलमानों की समस्या, हांगकांग में स्वतंत्रता का नियंत्रण, दक्षिणी चीन सागर में अन्य देशों के साथ विवाद, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के निर्णय को न मानते हुए गैर लांकतांत्रिक प्रथाओं को बढ़ावा दे रहा है।
  • लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर रिपोर्ट देनेवाली फ्रीडम हाउस के अनुसार संपूर्ण विश्व में पिछले 15 वर्षों से निरंतर राजनीतिक अधिकारों तथा नागरिक स्वतंत्रता में व्यापक कमी आ रही है।
  • डेमोक्रेसी इंडेक्स 2020 के अनुसार विश्व का मात्र 9%  आबादी ही पूर्ण लोकतंत्र में रहती है।

भारतीय लोकतंत्र के हालिया संदर्भ में विभिन्न संस्थाओं की टिप्पणी

  • वी डेम रिपोर्ट के अनुसार भारत में अभिव्यक्ति की आज़ादी कम हुई है तथा दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र निर्वाचित निरंकुशता में बदल गया है।
  • ग्लोबल स्टेट आफ डेमोक्रेसी 2021 के अनुसार भारत उन शीर्ष 10 देशों में  है जहां लोकतंत्र बहुत तेजी से कमजोर हो रहा है।
  • फ्रीडम हाउस द्वारा भारत को 'स्वतंत्र लोकतंत्र' की श्रेणी से हटाकर 'आंशिक तौर पर स्वतंत्र लोकतंत्र' की श्रेणी में डाल दिया गया है। 
  • एक रिपोर्ट के अनुसार सेंसरशिप के मामले में भारत अब पाकिस्तान के समान है जबकि भारत की स्थिति बांग्लादेश और नेपाल से बदतर है।

भारतीय लोकतंत्र की आंतरिक चुनौतियां

  • भारत के अंदर नक्सलवाद, आतंकवाद, क्षेत्रवाद जैसी समस्याएं लोकतंत्र को कमजोर कर रही हैं।
  • हाल ही में नागालैंड में हुई हिंसा, नागालैंड सहित कई राज्यों में अफस्पा का लगाना लोकतांत्रिक मूल्यों के गिरावट को प्रदर्शित करती हैं।
  • भारत में सरकार द्वारा देशद्रोह, मानहानि और आतंकवाद के क़ानूनों का  इस्तेमाल की बढ़ती घटनाएं लोकतंत्र विरोधी घटनाएं है।
  • कोविड के दौरान लगाए गए लॉकडाउन के कारण लाखों प्रवासी मज़दूरों का खतरनाक और बेपरवाह तरीके से विस्थापन, सरकार द्वारा संसद में सत्र के दौरान प्रश्नकाल को रोकना, संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग, अनुच्छेद 356 का अनावश्यक प्रयोग, जम्मू कश्मीर से एकतरफा 370 हटाना इत्यादि कई मुद्दे हैं जिनपर आलोचकों का मानना है कि भारत में लोकतंत्र कमजोर हो रहा है।
  • समाज में बढ़ता ध्रुवीकरण,धार्मिक, जातीय विभाजन तथा बढ़ती असहिष्‍णुता एवं अभिव्‍यक्ति की आजादी पर प्रहार लोकतंत्र पर सवाल खड़े करता है।
  • समाज में बढ़ती असमानता और आर्थिक विभाजन की खाई चिंता का विषय है जिसे विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाएं भी पाटने और असमानता को कम करने में असमर्थ रही हैं।
  • कॉरपोरेट्स, सार्वजनिक संपत्तियों का मौद्रीकरण, सरकार की दोषपूर्ण नीतियों द्वारा कल्याणकारी राज्य की कमजोर साख भी चिंता बढ़ा रहे हैं।

हांलाकि एक लोकतांत्रिक देश के स्वरूप के मापदंडों पर देखा जाए तो पिछले कुछ समय से जिस प्रकार से भारत में लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग के आरोप, राजद्रोह के मामले, बिना बहस के अध्यादेशों एवं कानूनों का निर्माण, कोरोना काल में न्यायालय एवं सरकार की उदासीनता, रोजगार, स्वास्थ्य के क्षेत्र में हालात रहे हैं उसने सारी दुनिया का ध्यान भारतीय शासन व्यवस्था की ओर खींचा है।

फिर भी वर्तमान संदर्भ में भारत में अनेक ऐसी लोकतांत्रिक परम्पराएं तथा व्यवस्थाएं है जिनके आधार पर भारत आर्थिक तथा स्वास्थ्य के मोर्चे पर विपरित परिस्थितियों के होने के बावजूद अपने मजबूत लोकतांत्रिक मूल्यों एवं आदर्शों को सहेजे हुए हैं तभी तो यहां अन्य देशों जैसे म्यांमार, ट्यूनीशिया तथा सूडान में सत्ता परिवर्तन आदि के तरह घटनाएं नहीं देखी जाती। 

आंतरिक स्तर पर लोकतात्रिक देश की कसौटी पर भारत

  • भारत में बहुदलीय लोकतांत्रिक व्यवस्था पायी जाती है।
  • अनुच्छेद 324 के तहत स्वतंत्र निर्वाचन आयोग की व्यवस्था ।
  • 1975 का आपातकाल को छोड़कर भारत में निर्वाचन प्रक्रिया का निरंतर तथा निर्बाध रुप से संचालन।
  • भारत में विधि का शासन स्थापित है तथा संविधान की सर्वोच्चता लोकतांत्रिक मूल्यों को प्रदर्शित करती है। 
  • प्रत्येक नागरिकों के मौलिक अधिकारों को संवैधानिक मान्यता दी गयी है।
  • न्यायपालिका को मौलिक अधिकारों का संरक्षक बनाया गया है।
  • भारत में मूल अधिकारों के उल्लंघन पर अनुच्छेद 32 तथा 226 के अंतर्गत संवैधानिक उपचारों का अधिकार । 
  • वयस्क मताधिकार के आधार पर सभी वर्गों, जाति, धर्म के लोगों को सार्वभौमिक मताधिकार ।
  • अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रेस मीडिया की स्वतंत्रता, राजनीतिक दल, समूह बनाने की स्वतंत्रता ।
  • शक्ति के पृथ्क्करण का सिद्धांत के तहत सरकार के तीनों अंगों की एक दूसरे से स्वतंत्र कार्यप्रणाली ।
  • विश्व का सबसे बड़े लोकतांत्रिक अभियान के रूप में 73वें तथा 74वें संविधान संशोधन के माध्यम लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण ।
  • पांचवी तथा छठी अनुसूची द्वारा जनजातीय क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व ।
  • शिक्षा, मनरेगा द्वारा रोजगार गांरटी, सूचना का अधिकार अधिनियम द्वारा तथा समाज के अत्यंत पिछड़े वर्ग के लोगों का मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री तथा राष्ट्रपति पदों तक पहुंचना यह स्पष्ट करता है कि भारत में लोकतंत्र बहुत ही मजबूती के साथ स्थापित है।
  • संविधान की प्रस्तावना में वर्णित, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य शब्द तथा नीति-निर्देशक तत्व, मौलिक अधिकार आदि ऐसे प्रावधान में जो लोकतंत्र में जनता की शक्ति तथा जनता के शासन को प्रदर्शित करते हैं ।

वैश्विक स्तर पर लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने हेतु भारत के प्रयास

  • भारत की सॉफ्ट पावर कूटनीति द्वारा लोकतांत्रिक मूल्यों का विश्व में प्रसार ।
  • भारत द्वारा अफगानिस्तान में संसद का निर्माण कराया, सार्क सेटेलाइट, कोविड में विभिन्न देशों की सहायता, नेपाल और भूटान के अलावा अफ्रीकी देशों में भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा सहायता ।
  • लोकतंत्र का समर्थन करने हेतु  संयुक्त राष्ट्र डेमोक्रेसी फंड, कम्युनिटी ऑफ डेमोक्रेसी के निर्माण में भारत की महत्त्वपूर्ण भूमिका है।
  • भारत द्वारा वैश्विक लोकतांत्रिक संस्थाओं को वित्तीय सहायता, संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में योगदान ।
  • संयुक्त राष्ट्र में लोकतांत्रिक देशों के डेमोक्रेसी कॉकस नामक संगठन को स्थापित करने में योगदान ।
 भारतीय लोकतंत्र के प्रोत्‍साहन हेतु सुझाव

  • भारत के चुनाव आयोग और अधिक स्वायत्तता और सक्षम बनाया जाए ।
  • चुनाव सुधार के तहत भ्रष्ट आचरण के दोषी उम्मीदवारों का स्थायी निष्कासन, चुनाव निधि में सुधार ।
  • सरकार को लोकतांत्रिक अधिकारों एवं मूल्यों को दबाने के बजाए प्रोत्‍साहन देने पर बल दिया जाए।
  • लोकतंत्र के महत्‍वपूर्ण स्तंभ प्रेस और न्यायपालिका को कार्यकारी हस्तक्षेप से स्वतंत्र ।
  • नागरिक अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति समान रूप से सतर्क और कर्तव्यनिष्ठ रहे ।

भारत विश्व की सबसे बड़ी जनसंख्या वाला लोकतांत्रिक देश है । अतः भारतीय लोकतंत्र में व्याप्त बाधाओं को दूर कर समावेशन, पारदर्शिता, मानवीय गरिमा, उत्तरदायित्वपूर्ण शासन, विवाद निदान तथा विकेंद्रीकरण के माध्यम से इसे और समृद्ध करने की आवश्यकता है। 


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