GK BUCKET

BPSC, BSSC, Railway, SSC, सचिवालय सहायक जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए समर्पित GK BUCKET अति महत्‍वपूर्ण, अपडेटेड तथा परीक्षापयोगी अध्‍ययन सामग्री उपलब्‍ध कराने का प्रयास करता है। इस मंच के माध्‍यम से आप प्रारंभिक परीक्षा के साथ-साथ मुख्‍य परीक्षा की भी तैयारी कर सकते हैंं। अध्‍ययन सामग्री उपलबध कराने हेतु बजट, आर्थिक समीक्षा, समाचार पत्र, सरकार के आंकड़ों तथा इंटरनेट पर उपलब्‍ध डाटाओं, महत्वपूर्ण रिपोर्ट इत्यादि के अद्यतन आकड़ों का उपयोग किया जाता है।

Monday, November 21, 2022

मुक्‍त व्‍यापार समझौते के महत्‍व एवं लाभ

प्रश्‍न - मुक्‍त व्‍यापार समझौते के महत्‍व एवं लाभ पर प्रकाश डाले तथा बताए कि भारत के लिए यह किस प्रकार नए युग की आवश्यकताओं के साथ संतुलन बनाने में महत्‍वपूर्ण उपकरण साबित हो सकता हैं।

मुक्‍त व्‍यापार समझौता दो या दो से अधिक देशों के बीच व्यापार बाधाओं को कम करने हेतु किया गया एक समझौता होता है जिसमें  सदस्य देशों को तरजीही व्यापार शर्तें, न्‍यून सरकारी शुल्‍क, टैरिफ रियायतें आदि प्रदान की जाती है। मुक्त व्यापार की अवधारणा व्यापार संरक्षणवाद के विपरीत है जिसको अधिमान्य व्यापार समझौता, व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता, व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।


मुक्त व्यापार समझौतों का महत्व

  • एक व्यापार नीति उपकरण के रूप में नए युग की आवश्यकताओं के साथ संतुलन बनाने में सहायक ।
  • संरक्षणवाद के विपरीत व्‍यापार बाधाओं को कम करने में सहायक ।
  • व्‍यापार हेतु अधिक उदार, सुविधाजनक एवं प्रतिस्पर्द्धी एवं पारदर्शी व्यवस्था बनाने में सहायक।
  • पारस्परिक आर्थिक लाभ और बढ़ी हुई व्यापार सुविधा पर आधारित होने के कारण सुगम व्यापार की सुविधा प्रदान करने में सहायक है।

 

मुक्‍त व्‍यापार समझौते का अपना महत्‍व है और इसके कई लाभ भी है । मुकत व्‍यापार समझौते जिन देशों के बीच होती है उनकी उत्पादन लागत अन्‍य देशों की तुलना में सस्ती हो जाती है। कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाए तो यह व्यापार को बढ़ाने सहायक होती है जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिलती है और वैश्विक व्यापार में वृदिध होती है । इसके लाभ को देखते हुए ही वर्तमान में कई देश आपस में मुक्त व्यापार संधि कर रहे हैं।

 

भारत भी कई देशों के साथ मुक्‍त व्‍यापार समझौतों को कर रहा है । पिछले कुछ समय से भारत द्वारा कई देशों जैसे यूनाइटेड किंगडम, श्रीलंका, संयुक्‍त अरब अमीरात, आस्‍ट्रेलिया और व्यापार समूहों जैसे आसियान के साथ मुक्‍त व्‍यापार समझौते पर चर्चा की गयी है ।  विश्‍व व्‍यापार संगठन की प्रासंगिकता तथा संरक्षणवादी नीतियों के परिप्रेक्ष्‍य में मुक्‍त  व्‍यापार समझौते भारत के लिए कई प्रकार से लाभदायक है जिसे निम्‍न प्रकार समझा जा सकता है ।

 

जहां आत्मनिर्भर भारत अभियान से भारत की संरक्षणवादी बंद बाज़ार अर्थव्यवस्था की बनती छवि बनती जा रही है तो वहीं हालिया रिपोर्ट के अनुसार विश्‍व की पांचवी बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था वाला भारत वर्ष 2030 तक एशिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की क्षमता है । अतः भारत के पास आनेवाले वर्षों में अपनी अर्थव्यवस्था को बदलने का एक अवसर है।

 

भारत के लिए मुक्त व्यापार समझौतों का महत्व

  • मुक्त व्यापार समझौते एक व्यापार नीति उपकरण के रूप में नए युग की आवश्यकताओं के साथ संतुलन बनाने में सहायक हो सकते हैं।
  • इसके माध्‍यम से भारत को वैश्विक एवं घरेलू दोनों बाजारों में एक भरोसेमंद उत्पादन क्षमता स्थापित करने में मदद मिलेगी ।
  • इससे भारत के रत्न, आभूषण , इंजीनियरिंग, कृषि-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, कपड़ा, प्रौद्योगिकी और वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों को लाभ होने की संभावना है।
  • 2030 तक 2 ट्रिलियन डॉलर के निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है जिसमें इन समझौतों की भूमिका महत्‍वपूर्ण है ।
  • भारत  क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) जैसे प्रमुख FTA से बाहर निकलने के बाद भारत के लिए मुक्त व्यापार समझौता एक विकल्प प्रदान करेगा तथा तथा भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंच स्थापित करने में सहायक होगा।
  • वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय समझौते भारतीय घरेलू उद्योग के लिए लाभकारी नहीं हो रहा है। पिछले कई वर्षों से भारत का आयात तो बढ़ा  लेकिन निर्यात में वृद्धि अत्यंत धीमी है । अत: इन समझौते से भारत के निर्यात में वृदिध हो सकती है ।
  • मुक्‍त व्‍यापार समझौता न  केवल विकास एवं रोज़गार को प्रोत्साहित करेगा बल्कि व्यवसाय को सुगम एवं सस्ता बनाकर आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने में मदद करेगा।
  • आत्मानिर्भर भारत योजना का लक्ष्य 2030 तक वन ट्रिलियन डॉलर के निर्यात के साथ भारत को निर्यात हब बनाना है। मुक्‍त व्‍यापार समझौता इस लक्ष्य को प्राप्त करने में मददगार हो सकता है।
  • बढ़ते वैश्वीकरण तथा संरक्षणवाद के नाम पर भारत  वैश्विक बाजार से पृथक नहीं रह सकता तथा भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने तथा निर्यात को बढ़ाने हेतु हेतु भारत को निर्यात बाजारों पर ध्यान देना होगा जिसके लिए मुक्त व्यापार समझौते मददगार है।

स्‍पष्‍टत: वर्तमान में जहां विश्व व्यापार संगठन में बहुपक्षीय व्यापार वार्ता अवरुद्ध है तथा संगठन की भूमिका शिथिल हो रही है वैसी अवस्था में मुक्‍त व्‍यापार समझौते महत्वपूर्ण हैं जो नए युग की आवश्यकताओं के साथ संतुलन बनाने में महत्‍वपूर्ण उपकरण साबित हो सकता हैं।

सभी प्रश्‍न एवं उत्‍तर हमारे संस्‍थान के नोटस पर आधारित है जिसको आर्डर कर आप अपने घर पर प्राप्‍त कर सकते हैं । 

No comments:

Post a Comment