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Sunday, December 04, 2022

बिहार में आपदा प्रबंधन की आवश्‍यकता एवं प्रयास

 बिहार में आपदा प्रबंधन की आवश्‍यकता एवं प्रयास 

प्रश्‍न "आपदाओं के प्रति सुभेद्य होने के कारण बिहार में आपदा प्रबंधन अत्‍यंत आवश्‍यक है जिसके परिप्रेक्ष्‍य में बिहार सरकार के अनेक प्रयास किए गए है।" कथन की विवेचना करें।

सामान्‍यत: ऐसी घटनाएं जिसमें जीवन एवं संपत्ति की बड़ी हानि होती है और व्‍यापक स्‍तर पर जनजीवन प्रभावित होता है आपदा कहलाती है। आपदाएं मानव जनित एवं प्राकृतिक दोनों हो सकती है । बिहार में अनेक ऐसी परिस्थितियां है जो इसे आपदाओं के प्रति सुभेद्य बनाती है इसी कारण से बिहार में आपदा प्रबंधन अत्‍यंत आवश्‍यक हो जाता है।

  • बिहार अपनी भौगौलिक अवस्थिति जैसे हिमालय का भ्रंश, हिमालय की सदानीरा नदियां, दक्षिण में बंगाल की खाड़ी और जल तथा मौसम संबंधी अनिश्चितताओं के कारण बाढ़, सूखा, भूकंप, चक्रवात, लू, आदि आपदाओं के प्रति सुभेद्य है ।  
  • बिहार में जलवायु प्रेरित आपदाओं जैसे बाढ़, सूखा, चक्रवात  में भी हाल के वर्षों में वृद्धि हुई है । जिसने बिहार के जनजीवन के साथ आर्थिक विकास की गति को भी प्रभावित किया है।
  • वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 1106 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर बिहार में उच्च जनसंख्या घनत्व पाया जाता है जिसके कारण राज्य के आर्थिक एवं प्राकृतिक संसाधनों पर अत्यधिक दबाव रहता है ।
  • अप्रैल 2021 में जारी राष्ट्रीय जलवायु भेद्यता आकलन रिपोर्ट के अनुसार सुभेद्यता सूचकांक में बिहार 6th स्थान पर है ।
  • बिहार के 28 जिले बाढग्रस्त है तथा 17 जिले सूखे से प्रभावित हैं ।बिहार में कुल बाढ़ प्रवण क्षेत्र इसके कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 73.06% तथा भारत का 16.5% है । बाढ़ से प्रभावित कुल भारतीय आबादी का 22% बिहार के लोग है।
  • वर्ष 2019-20 में बिहार में आंधी तूफान एवं बिजली गिरने के कारण कुल 459 लोगों की मृत्यु हुई।
  • बिहार में 7.15% ऐसा क्षेत्र है जहां आग लगने का जोखिम ज्यादा है। जलवायु परिवर्तन तथा बढ़ते तापमान के कारण ऐसी घटनाओं में वृद्धि दर्ज हो रही है।
  • वर्ष 2020-21 में आपदा प्रबंधन के कारण राज्य सरकार पर 3227.79 करोड़ रुपए का वित्तीय बोझ नकद सहायता, कृषि लागत सामग्रियों हेतु सब्सिडी आदि के रूप में पड़ा ।
  • हाल ही में बाढ़ के साथ साथ कोविड महामारी का भी सामना बिहार को करना पड़ा जिसके कारण बिहार सरकार पर अत्यधिक आर्थिक  बोझ पड़ा लेकिन सरकार द्वारा संसाधनों के कुशलतापूर्वक प्रबंधन से इस पर नियंत्रण पाया जा सका । 

उपरोक्त तथ्यों एवं आकड़ों से बिहार में आपदाओं के कारण होनेवाले जानमाल की क्षति तथा कुशल आपदा प्रबंधन की आवश्‍यकता को समझा जा सकता है । इसी कारण आपदाओं के कुशल प्रबंधन को राज्य सरकार प्राथमिकता देती है। बिहार में आपदा प्रबंधन गतिविधियों के सुदुद्दीकरण के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं।

 

आपदा प्रबंधन  की दिशा में बिहार सरकार के प्रयास                                       

बिहार में आपदाओं के गंभीरता को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग का गठन किया गया है जो आपदाओं तैयारी, आपदाओं के दौरान संकट प्रबंधन तथा आपदाओं के बाद राहत और पुनर्वास कार्य देखता है ।

  • सेंडाई  फ्रेमवर्क के तहत 15 वर्षीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण रोडमैप 2015-2030 लागू करने वाला बिहार प्रथम राज्य है। इसके तहत वर्ष 2030 तक आपदा जोखिम न्यूनीकरण हेतु लक्ष्‍य निर्धारित किए गए।
  • आपदाओं के दौरान विभिन्न कार्यों के संचालन हेतु राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल SDRF  की पूर्णकालिक बटालियन का गठन ।
  • आपदा प्रबंधन हेतु बाढ़, सूखा और पेयजल संकट के लिए कार्यसंचालन कार्याविधि का निर्माण किया गया।
  • आपदा के समय क्विक रिस्पांस हेतु स्वास्थ्य एवं आपदा विभाग के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुए।
  • बाढ़ और सूखा जैसी स्थितियों से निपटने हेतु जल संरक्षण के उपायों को सक्षम बनाने के लिए उत्तर बिहार में  तालाबों और जलाशयों तथा दक्षिण बिहार में आहर, पइन को पुनर्जीवित करने हेतु पहल की जा रही है।
  • राज्य आपदा प्रबंधन योजना में समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन को सक्षम बनाने हेतु संकल्प केन्द्र की योजना को अमल में लाने के महत्व पर जोर ।
  • राज्य आपदा अनुक्रिया बल को मोटरबोट, लाइफ जैकेट, गोताखोरी, खोज, राहत और बचाव के अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध कराया गया।

इस प्रकार बिहार सरकार द्वारा आपदा प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विभिन्न आपदाओं से निबटने हेतु अनेक योजनाएँ बनाई गई है। आपदाओं के कारण बिहार को प्रति वर्ष भारी मात्रा में  राशि खर्च करना पड़ता है। अतः 15वें वित्त आयोग द्वारा भी इसको समझते हुए आपदा प्रबंधन की राशि वृद्धि की अनुशंसा की गयी है । 15वें वित्त आयोग द्वारा बिहार को आपदा प्रबंधन के लिए 10,432 करोड़ रु. की अनुशंसा की गयी है जो पिछले वित्त आयोग की तुलना में चार गुना ज्यादा है । आपदा प्रबंधन राशि की यह वृद्धि बिहार के लिए काफी फायदेमंद है।

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