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Apr 28, 2023

चीन की भारत के प्रति नीतियों में आक्रमकता

 चीन की भारत के प्रति नीतियों में आक्रमकता 

प्रश्‍न- पिछले कुछ वर्षों में भारत के प्रति चीन की नीतियों में आक्रमकता बढ़ने के कारणों का उल्‍लेख करें तथा बताए कि चीन को संतुलित करने हेतु भारत द्वारा क्‍या प्रयास किया जा सकता है?


भारत तथा चीन एशिया की महत्वपूर्ण शक्ति होने के साथ साथ आपस में पड़ोसी देश भी है । वर्ष 1950 के बाद भारत एवं चीन के संबंधों को देखा जाए तो काफी उतार चढ़ाव वाले रहे हैं। कई बार दोनों देशों में विवाद की स्थिति रहीं है तथा अनेक ऐसे अवसर आए है जब चीन अपनी नीतियों में आक्रामक रहा ।




2014 के पूर्व के वर्षों को देखा जाए तो भारत चीन के संबध सामान्‍य रहे लेकिन 2014 में चीन के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के बाद से ही भारत चीन संबंधों में गिरावट आने लगी तथा चीन की नीतियां भारत के प्रति आक्रमक रही जिसके पीछे अनेक कारण माने जाते है-


चीन विश्व महाशक्ति बनाना चाहता है लेकिन भारत उसकी राह में एक बाधा है। अतः इस प्रकार की कार्यवाही को कर न केवल भारत को परेशान करने की कोशिश करता है बल्कि वह संदेश देना चाहता है कि एशिया की वह सबसे बड़ी शक्ति है।


भारत  द्वारा जम्मू कश्मीर की वैधानिक स्थिति को बदलकर चीन व पाकिस्तान के कब्जे से भारत की भूमि वापस लेने की  बात कई बार दोहराई गई जिससे पाकिस्तान व चीन को डर है कि भारत अपनी भूमि को वापस प्राप्त करने हेतु कोई बड़ी सैनिक कार्रवाई कर सकता है। अतः तनाव पैदा करने हेतु चीन द्वारा यह साजिश रची गई । इसी समय नेपाल द्वारा कालापानी भूमि विवाद उठाया गया तथा पाकिस्तान द्वारा भी इस समय सीमा पर तनाव बढ़ाया गया था।


2017 में डोकलाम विवाद के समय  भारत द्वारा चीन को मुंहतोड़ जवाब दिया था जिसके फलस्वरूप चीन बौखलाया हुआ था और इसी का बदला लेने के लिए उसके द्वारा ऐसा किया गया है 


कोविड 19 पर विश्व में चीन की आलोचना, हांगकांग तथा ताइवान की मुश्किले, कम्यूनिस्ट पार्टी के भीतर शी जिनपिंग के खिलाफ विरोध इत्यादि समस्याओं से जनता एवं विश्व का ध्यान हटाने के लिए ऐसा किया गया।


वर्तमान संदर्भ में देखा जाए तो वैश्विक परिदृश्‍य में बदलाव आ रहा है और नया वर्ल्‍ड आर्डर और नए वैश्विक समीकरण बन रहे हैं जिसमें चीन वैश्विक शक्ति के रूप में अपने का स्‍थापित करना चाहता है जिसमें भारत को एक बड़ी बाधा मानता है और इसी कारण से चीन की नीतियों में भारत के प्रति आक्रमकता बढ़ी है । उल्‍लेखनीय है कि भारत एशिया की महत्‍वपूर्ण शक्ति है और अघोषित प्रतिद्वंद्वी के रूप में भारत के लिए यह बहुत ही आवश्‍यक है कि चीन को संतुलित करने हेतु प्रभावी नीतियों को अपनायी जाए जिसके लिए निम्‍न प्रयास किए जा सकते हैं-

·        सीमाओं को परिभाषित करने, सीमांकन और परिसीमन किये जाने हेतु अंतर्राष्ट्रीय मंचों द्वारा चीन पर दबाव बनाएं।

·        शक्ति संतुलन हेतु भारत को अपनी रक्षा/सैन्य शक्ति बढ़ानी चाहिए।

·        बहुध्रुवीय विश्व की स्थापना ताकि चीन की साम्रज्यवादी सोच पर अंकुश ।

·        अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर चीन की साम्राज्यवादी नीति का विरोध की नीति।

·        सांस्कृतिक, धार्मिक संबंधों द्वारा चीन तथा पड़ोसी देशों में आपनी साफ्ट पावर बढ़ाने हेतु उपाए।

·        चीन के साथ व्यापार घाटे को कम करने हेतु भारतीय सेवा क्षेत्र की भूमिका बढ़ाया जाए।

·        भारत अपने विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने के साथ चीन पर आर्थिक निर्भरता, आयात कम करने हेतु प्रयास।

·        भारत को इलेक्ट्रोनिक्स क्षेत्र के श्रेष्ठता हसिल करने हेतु मेक इन इंडिया, स्टार्ट अप को बढ़ावा दिया जाए।

·        भारत क्षेत्रीय मंचों जैसे सार्क, आसियान आदि के साथ समन्वय, सहयोग एवं भागीदारी को बढ़ाए।

·        एक्ट ईस्ट नीति  के और प्रभावी क्रियान्वयन पर प्रयास।

·        दक्षिणी चीन सागर के वैसे देशों जिनके साथ चीन का विवाद है जैसे ताइवान, फिलीपिंस, जापान आदि के साथ संबंधों एवं सहयोग को बढ़ाया जाए। 

 

पूर्व के अनुभवों तथा चीन की आक्रामक नीतियों को ध्‍यान में रखते हुए भारत द्वारा चीन को प्रतिसंतुलित करने हेतु सप्लाई चेन रेज़ीलिएंस इनीशिएटिव, क्वाड पहल, एक्ट ईस्ट पॉलिसी, मालाबार अभ्यास, उत्तर-पूर्वी भारत का विकास जैसे कदमों को अपनाया गया है फिर भी दोनों देशों के बीच शांति स्‍थापित करने के उपायों प्रोत्‍साहन देकर आपसी संबंधों को मधुर बनाया जाना बेहतर उपाए होगा।

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