Jun 25, 2026

प्रश्‍न- 1857 के विद्रोह के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक कारणों का विश्लेषण कीजिए तथा बिहार के योगदान का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। 71th BPSC PYQ

प्रश्‍न- 1857 के विद्रोह के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक कारणों का विश्लेषण कीजिए तथा बिहार के योगदान का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। [38] 71th BPSC PYQ

केवल 199/- रु. में 72th BPSC Mains का कंटेट 


उत्‍तर- भारतीय इतिहास में 1857 के विद्रोह को केवल सैनिक विद्रोह नहीं, बल्कि ब्रिटिश शासन के विरुद्ध राजनीतिक असंतोष, आर्थिक शोषण तथा सामाजिक-धार्मिक आशंकाओं से उत्पन्न व्यापक जनप्रतिरोध के रूप में देखा जाता है। इस विद्रोह के प्रमुख कारण निम्‍नलिखित है:-

 

राजनीतिक कारण

  • ब्रिटिश विस्तारवादी नीतियों ने भारतीय शासकों में असंतोष पैदा किया।
  • लॉर्ड डलहौजी की हड़प नीति के तहत झाँसी, नागपुर, सतारा आदि राज्यों का विलय।
  • अवध का विलय (1856) तथा मुगल सम्राट की प्रतिष्ठा को समाप्त करने के प्रयास।
  • भारतीयों को उच्च प्रशासनिक पदों से दूर रखना।

आर्थिक कारण

  • ब्रिटिश नीतियों ने पारंपरिक अर्थव्यवस्था को कमजोर कर दिया।
  • अत्यधिक भू-राजस्व वसूली से किसान ऋणग्रस्त हुए।
  • कुटीर एवं हस्तशिल्प उद्योगों का पतन।
  • व्यापारिक नीतियों के माध्यम से भारत का आर्थिक दोहन।
  • जमींदारों, किसानों और कारीगरों में व्यापक असंतोष।

सामाजिक कारण

  • अंग्रेजी हस्तक्षेप को भारतीय समाज ने अपनी परंपराओं के लिए खतरे के रूप में देखा।
  • ईसाई मिशनरियों की गतिविधियों, सामाजिक सुधारों को परंपरावादी वर्ग ने संदेह की दृष्टि से देखा।
  • रेल, तार एवं पाश्चात्य शिक्षा को सांस्कृतिक हस्तक्षेप माना गया।
  • चर्बी लगे कारतूसों की घटना ने विद्रोह को तत्कालिक रूप प्रदान किया।

 


बिहार का योगदान

1857 के विद्रोह में बिहार में वीर कुंवर सिंह ने दानापुर छावनी के विद्रोही सिपाही को अपने नेतृत्‍व में लेकर अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल फूंका। इसी क्रम में पटना में पीर अली खाँ ने क्रांतिकारी गतिविधियों का संचालन किया।


इस विद्रोह में वीर कुंवर सिंह के नेतृत्व ने बिहार में दानापुर, आरा और जगदीशपुर जैसे क्षेत्रों में अंग्रेजों को गंभीर चुनौती मिली। इसमें जहां सैनिकों, किसानों एवं स्थानीय नेतृत्व की उल्लेखनीय भागीदारी रही वहीं पीर अली खाँ और अन्य स्थानीय नेताओं में हिंदू-मुस्लिम सहयोग का उदाहरण भी दिखा। हांलाकि इस विद्रोह की सीमाएँ भी रही जैसे-

  • विद्रोह पूरे बिहार में समान रूप से नहीं फैल सका।
  • विभिन्न विद्रोही समूहों के बीच प्रभावी समन्वय का अभाव था।
  • संसाधनों, आधुनिक हथियारों और सैन्य संगठन की कमी रही।
  • कुछ स्थानीय अभिजात वर्ग अंग्रेजों के पक्ष में रहे, जिससे विद्रोह कमजोर पड़ा।

 

इस प्रकार 1857 का विद्रोह राजनीतिक दमन, आर्थिक शोषण और सामाजिक-धार्मिक असंतोष का संयुक्त परिणाम था। बिहार में वीर कुंवर सिंह, पीर अली खाँ तथा दानापुर के विद्रोही सिपाहियों ने इसे जनसंघर्ष का स्वरूप प्रदान किया। यद्यपि विद्रोह तत्काल सफल नहीं हुआ, फिर भी इसने राष्ट्रीय चेतना का बीजारोपण कर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की मजबूत आधारशिला रखी।


केवल 199/- रु. में 72th BPSC Mains का कंटेट 

  • 72वीं BPSC के लिए टेलीग्राम ग्रुप बनाया गया है जिसमें 72वीं के लिए प्रतिदिन के आधार पर मुख्‍य परीक्षा हेतु कंटेट शेयर किया जा रहा है।
  • इसकी सदस्‍यता शुल्‍क 199/- है। 
  • इसमें केवल मुख्‍य परीक्षा से संबंधित कंटेट (GK BUCKET Notes का अध्‍यायवार पीडीएफ, उत्‍तर लेखन ग्रुप का मॉडल उत्‍तर ) पीडीएफ शेयर किया जाएगा।
  • यदि आप जुड़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए QR Code (GK BUCKET) पर पेमेंट कर या 74704-95829 पर Google pay/Phone Pay द्वारा पेमेंट कर अपना टेलीग्राम नम्‍बर और नाम सेंड करें।
  • For more information Whatsapp/Contact- 74704-95829




No comments:

Post a Comment