Jul 13, 2026

71th BPSC Mains PYQ GS Paper-II Cultural Nationalism and Constitutional Nationalism

2. a) Is there any meeting points between Cultural Nationalism and Constitutional Nationalism. Explain some basic features of cultural understanding under the Indian Constitution. [38]

क्या सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और संवैधानिक राष्ट्रवाद में कोई समानांतर रेखा है? भारतीय संविधान के अन्तर्गत सांस्कृतिक समझ के मुख्य तत्वों की चर्चा है।

 

उत्‍तर- भारत एक प्राचीन सभ्यता होने के साथ-साथ आधुनिक लोकतांत्रिक गणराज्य भी है। इसलिए भारतीय राष्ट्रवाद केवल राजनीतिक अवधारणा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत और संवैधानिक मूल्यों का समन्वित रूप है।

 

भारत का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद जहां साझा इतिहास, परंपरा, भाषा एवं सभ्यता पर आधारित है, वहीं संवैधानिक राष्ट्रवाद संविधान, नागरिक समानता, लोकतंत्र और विधि के शासन पर आधारित है। भारतीय संदर्भ में सांस्कृतिक एवं संवैधानिक राष्ट्रवाद के बीच कुछ समानांतर रेखाएँ स्पष्ट दिखाई देती हैं जिसे निम्‍न प्रकार देख सकते हैं:-

 

राष्ट्रीय एकता - दोनों धाराएँ राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना चाहती हैं। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद भावनात्मक जुड़ाव उत्पन्न करता है, जबकि संवैधानिक राष्ट्रवाद संस्थागत एकता प्रदान करता है।

 

सभ्यतागत विरासत का सम्मान- भारतीय संविधान की मूल प्रति में राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर एवं नंदी जैसे ऐतिहासिक-सांस्कृतिक प्रतीकों का चित्रण भारत की सांस्कृतिक चेतना को दर्शाता है। स्पष्ट है कि संविधान भारतीय सभ्यता की जड़ों से पूर्णतः अलग नहीं है।



विविधता में एकता-भारतीय संस्कृति बहुभाषी, बहुधार्मिक और बहुजातीय रही है। संविधान भी इसी विविधता को स्वीकार कर राष्ट्रीय एकता बनाए रखने का प्रयास करता है।

 

नैतिक एवं मानवीय मूल्य- सत्य, अहिंसा, सहिष्णुता, लोककल्याण एवं बंधुत्व जैसे भारतीय सांस्कृतिक मूल्य संविधान के न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्शों में प्रतिबिंबित होते हैं।

 

संवैधानिक राष्ट्रवाद किसी एक संस्कृति को राष्ट्र की अनिवार्य पहचान नहीं मानता, बल्कि सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करता है। इसी संदर्भ में भारतीय संविधान सांस्कृतिक गौरव के साथ-साथ समावेशिता और सामाजिक न्याय पर बल देता है।

 

भारतीय संविधान में सांस्कृतिक समझ के मुख्य तत्व

  1. सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकार-अनुच्छेद 29 एवं 30 के तहत अल्पसंख्यकों को अपनी भाषा, लिपि एवं संस्कृति के संरक्षण तथा शैक्षणिक संस्थाएँ स्थापित करने का अधिकार।
  2. धर्मनिरपेक्षता- “सर्वधर्म समभाव” पर आधारित भारतीय धर्मनिरपेक्षता जो सभी धर्मों एवं संस्कृतियों को समान सम्मान देती है।
  3. भाषाई विविधता-आठवीं अनुसूची द्वारा 22 भाषाओं को संवैधानिक मान्यता।
  4. मौलिक कर्तव्य-अनुच्छेद 51A भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को नागरिकों का कर्तव्य बनाता है।

 

निष्कर्षत: सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और संवैधानिक राष्ट्रवाद भारतीय संदर्भ में संतुलित रूप से पूरक हैं। संस्कृति राष्ट्र की आत्‍मा है जो भावनात्मक आधार देती है तो दूसरी ओर संविधान राष्‍ट्र का शरीर है जो उसे लोकतांत्रिक आकार एवं दिशा प्रदान करता है। यही समन्वय भारतीय लोकतंत्र और “विविधता में एकता” की वास्तविक शक्ति है।







 

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