Jul 6, 2026

71th BPSC प्रश्‍न- देश में बिहार 'प्रधानमंत्री फॉरमालाईज़ेशन माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेज अपग्रेडेशन' (PMFME) योजना में टॉप परफॉर्मिंग राज्य के रूप में उभरा है। बिहार के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में आर्थिक विकास में योगदान में PMFME की संभावित भूमिका का विश्लेषण करें। [38]

प्रश्‍न- देश में बिहार 'प्रधानमंत्री फॉरमालाईज़ेशन माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेज अपग्रेडेशन' (PMFME) योजना में टॉप परफॉर्मिंग राज्य के रूप में उभरा है। बिहार के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में आर्थिक विकास में योगदान में PMFME की संभावित भूमिका का विश्लेषण करें।  [38]

 

उत्‍तर- प्रधानमंत्री फॉर्मलाइज़ेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेज (PMFME) योजना वर्ष 2020 में असंगठित सूक्ष्म खाद्य-प्रसंस्करण इकाइयों के औपचारिकीकरण, तकनीकी उन्नयन एवं प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने हेतु प्रारंभ की गई थी।

 

बिहार वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 93% लक्ष्य पूर्ति, 23,572 स्वीकृत प्रस्ताव, 10,296 ऋण स्वीकृत तथा 6,589 इकाइयों को ऋण वितरण के साथ देश का शीर्ष प्रदर्शन करने वाला राज्य बनकर उभरा है। यह योजना बिहार के ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।

 


ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक विकास में भूमिका

  1. कृषि आधारित मूल्य संवर्धन- बिहार की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था में PMFME योजना मक्का, फल, सब्जी, मखाना, लीची एवं गन्ने जैसे उत्पादों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देती है। इससे किसानों को कच्चे उत्पादों के बजाय मूल्य-संवर्धित उत्पाद बेचने का अवसर मिलता है।
  2. स्थानीय विकास- “वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट” (ODOP) दृष्टिकोण से प्रत्येक जिले की विशेष कृषि-उत्पाद श्रृंखला को बढ़ावा मिल रहा है जिससे स्थानीय उद्योगों एवं ग्रामीण बाजारों का विकास हो रहा है।
  3. रोजगार एवं पलायन में कमी- ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर खाद्य-प्रसंस्करण आधारित उद्यमिता एवं रोजगार के अवसर मिलते हैं जिससे श्रमिक पलायन कम करने में सहायता मिल सकती है।
  4. महिला सशक्तिकरण- योजना के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों (SHGs) एवं किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को प्रोत्साहन मिलने से ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी एवं वित्तीय आत्मनिर्भरता बढ़ रही है।

 


केवल 199/- रु. में 72th BPSC Mains का कंटेट

 

v 72वीं BPSC के लिए टेलीग्राम ग्रुप बनाया गया है जिसमें 72वीं के लिए मुख्‍य परीक्षा हेतु कंटेट शेयर किया जा रहा है।

v इसकी सदस्‍यता शुल्‍क 199/- है। 

v इसमें केवल मुख्‍य परीक्षा से संबंधित कंटेट (GK BUCKET Notes का अध्‍यायवार पीडीएफ, उत्‍तर लेखन ग्रुप का मॉडल उत्‍तर ) पीडीएफ शेयर किया जाएगा।

v यदि आप जुड़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए QR Code (GK BUCKET) पर पेमेंट कर या 74704-95829 पर Google pay/Phone Pay द्वारा पेमेंट कर अपना टेलीग्राम नम्‍बर और नाम सेंड करें।

v For more information Whatsapp/Contact- 74704-95829




शहरी क्षेत्रों में आर्थिक विकास में भूमिका

  1. सूक्ष्म उद्यमों का औपचारिकीकरण- मिठाई, बेकरी, अचार, स्नैक्स एवं डेयरी आधारित सूक्ष्म इकाइयों को FSSAI लाइसेंस, GST पंजीकरण एवं बैंकिंग प्रणाली से जोड़कर असंगठित क्षेत्र का औपचारिकीकरण किया जा रहा है।
  2. निवेश एवं उद्यमिता को बढ़ावा- योजना के अंतर्गत परियोजना लागत पर 35% तक क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी (अधिकतम ₹10 लाख) मिलने से शहरी युवाओं एवं स्टार्ट-अप आधारित उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलता है।
  3. ब्रांडिंग एवं बाजार विस्तार- पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़ाव के कारण स्थानीय उत्पादों की राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजारों तक पहुँच बढ़ रही है।

 

इस प्रकार PMFME योजना बिहार के आर्थिक विकास में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा सकता है हांलाकि वर्तमान में कोल्ड-चेन अवसंरचना की कमी, तकनीकी कौशल का अभाव, सीमित बाजार संपर्क तथा ऋण वितरण में अंतराल जैसी चुनौतियाँ विद्यमान हैं जिनको दूर किया जाए तो बिहार देश के प्रमुख खाद्य-प्रसंस्करण एवं ग्रामीण उद्यमिता केंद्र के रूप में उभर सकता है।

 

निष्‍कर्षत: PMFME बिहार में कृषि एवं उद्योग के बीच समन्वय स्थापित कर ग्रामीण-शहरी आर्थिक एकीकरण को मजबूत कर रही है जिससे इससे रोजगार, आय, खाद्य-मूल्य श्रृंखला एवं निर्यात क्षमता में वृद्धि की संभावना है।

 

No comments:

Post a Comment