Jul 7, 2026

71th BPSC PYQ प्रश्‍न-हाल के वर्षों में छठ पूजा के त्यौहार में वैश्विक ध्यानाकर्षण किया है। छठ के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक प्रभावों तथा प्रवासियों द्वारा इसके प्रसार पर विस्तृत चर्चा करें। [38]

प्रश्‍न-हाल के वर्षों में छठ पूजा के त्यौहार में वैश्विक ध्यानाकर्षण किया है। छठ के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक प्रभावों तथा प्रवासियों द्वारा इसके प्रसार पर विस्तृत चर्चा करें।  [38]

उत्‍तर- छठ पूजा सूर्य उपासना एवं प्रकृति आराधना पर आधारित भारत के सबसे प्राचीन लोकपर्वों में से एक है। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं नेपाल की तराई से उत्पन्न यह पर्व आज प्रवासी भारतीयों के माध्यम से वैश्विक पहचान प्राप्त कर चुका है। न्यूयॉर्क, लंदन, दुबई एवं मॉरीशस जैसे शहरों में इसके सार्वजनिक आयोजन भारत की सांस्कृतिक “सॉफ्ट पावर” को भी प्रदर्शित करते हैं।

 

सामाजिक प्रभाव

  1. सामाजिक समरसता- सामूहिक भागीदारी पर आधारित पर्व जिसमें जाति, वर्ग एवं क्षेत्रीय विभाजनों से ऊपर उठकर लोग घाटों पर एक साथ पूजा करते हैं जिससे सामाजिक समरसता, सहयोग एवं भाईचारे को बढ़ावा मिलता है।
  2. महिला सशक्तिकरण- व्रत, अर्ध्‍य देने एवं पूजा-संचालन में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका उनकी सामाजिक एवं आध्यात्मिक स्वायत्तता का प्रतीक है।
  3. पर्यावरण चेतना- सूर्य, जल एवं प्रकृति की आराधना, प्राकृतिक सामग्री का उपयोग सतत जीवनशैली तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है। हालांकि कृत्रिम घाटों का प्रचलन और जल प्रदूषण जैसी चुनौतियाँ भी उभर रही हैं।

 

सांस्कृतिक प्रभाव

  1. लोक संस्कृति का संरक्षण-छठ गीत तथा इस पूजा के पारंपरिक रीति-रिवाज भोजपुरी एवं पूर्वांचली सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करते हैं। छठ पूजा को वैश्विक पहचान दिलाने और यूनेस्को की 'अमूर्त सांस्कृतिक विरासत' सूची में शामिल कराने के लिए सरकार प्रयासरत है।
  2. अंतर-सांस्कृतिक संवाद- दिल्ली, मुंबई तथा विदेशों में छठ पूजा में विभिन्न समुदायों की भागीदारी राष्ट्रीय एकीकरण एवं बहुसांस्कृतिक सह-अस्तित्व को प्रोत्साहित करती है।

 

आर्थिक प्रभाव

  1. स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा- छठ के दौरान फल, गन्ना, मिट्टी के दीये, बाँस उत्पाद एवं पारंपरिक खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने से कारीगरों, छोटे व्यापारियों एवं महिला उद्यमियों को रोजगार मिलता है। जिससे स्‍थानीय अनौपचारिक अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होती है।
  2. पर्यटन अर्थव्यवस्था-त्योहार के समय परिवहन, पर्यटन, भोजपुरी संगीत, यूट्यूब एवं डिजिटल मीडिया उद्योग को भी आर्थिक लाभ होता है। बिहार सरकार 'छठ पूजा' के लिए विशेष "धार्मिक पर्यटन योजना" भी आरंभ कर रही है।

 

प्रवासियों द्वारा वैश्विक प्रसार

  1. सांस्कृतिक जुड़ाव एवं सॉफ्ट पावर- प्रवासी भारतीय समुदाय ने विभिन्‍न देशों में छठ पूजा को स्थापित किया जिससे न केवल नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहती है बल्कि भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और सॉफट पावर का प्रभावी माध्यम बनी।  

 

प्रवासियों द्वारा वैश्विक प्रसार

अमेरिका

हडसन नदी के तट पर सामूहिक अर्घ्य

ब्रिटेन (लंदन)

टेम्स नदी और स्थानीय तालाबों पर आयोजन

मॉरीशस

भारतवंशी समुदाय द्वारा राजकीय स्तर पर मान्यता

फिजी, सूरीनाम

प्रवासी भारतीयों की सदियों पुरानी परंपरा

खाड़ी देश

इनडोर आयोजन और सोशल मीडिया के माध्यम से उत्सव

 

इस प्रकार छठ पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक अस्मिता, पर्यावरण चेतना एवं आर्थिक सक्रियता का संगम है। प्रवासी भारतीयों ने इसे स्थानीय लोकपर्व से वैश्विक सांस्कृतिक उत्सव में परिवर्तित कर भारतीय लोकसंस्कृति की वैश्विक जीवंतता को स्थापित किया है।



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