71th BPSC प्रश्न- चौथी औद्योगिक क्रांति (उद्योग 4.0)
की अवधारणा का वर्णन कीजिए। भारत में उद्योग 4.0 प्रौद्योगिकियों को अपनाने के सबसे बड़े लाभों और जोखिमों का आलोचनात्मक
विश्लेषण कीजिए। [38]
उत्तर-
चौथी औद्योगिक क्रांति औद्योगिक (उद्योग 4.0)
विकास का वह चरण है जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), बिग डेटा, रोबोटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग तथा साइबर-फिजिकल
सिस्टम जैसी तकनीकों का एकीकृत उपयोग है जिसके माध्यम से उत्पादन, सेवाओं और शासन को “स्मार्ट” बनाया जा रहा है। इसमें उत्पादन प्रक्रिया
अधिक तेज, लचीली और उपभोक्ता की आवश्यकता के अनुरूप बनती है।
भारत में चौथी औद्योगिक क्रांति औद्योगिक (उद्योग 4.0) के प्रमुख लाभ
विनिर्माण एवं उत्पादकता में वृद्धि
AI और
रोबोटिक्स से उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ती है तथा लागत कम होती है। इससे “Make
in India” और “आत्मनिर्भर भारत” को बल मिलता है। उदाहरणत के लिए Tata Motors एवं Maruti
Suzuki ने स्मार्ट विनिर्माण तकनीकों को अपनाया है।
कृषि एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में परिवर्तन
IoT सेंसर,
ड्रोन और AI उपयोग से कृषि में जहां जल एवं
उर्वरक की बचत हो रही है वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में AI आधारित
रोग पहचान, टेलीमेडिसिन एवं रोबोटिक सर्जरी ने सेवाओं की
पहुँच बढ़ाई है।
शासन दक्षता
फास्टटैग, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण
तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म से पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता बढ़ी है। Industry
4.0 स्मार्ट लॉजिस्टिक्स एवं डेटा आधारित नीति निर्माण को भी
प्रोत्साहित करता है।
स्टार्टअप एवं नवाचार को बढ़ावा
भारत विश्व का
तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र
है। रेजरपे, ओला तथा जोमैटो जैसे स्टार्टअप डिजिटल
अर्थव्यवस्था को गति दे रहे हैं।
चौथी
औद्योगिक क्रांति पारंपरिक “मानव-श्रम आधारित उत्पादन” को “डेटा-संचालित एवं
स्वचालित प्रणाली” में परिवर्तित कर रही है। भारत के लिए जहां यह वैश्विक
विनिर्माण शक्ति बनने का अवसर भी है वहीं इसके साथ कुछ जोखिम भी उत्पन्न होते हैं।
Industry 4.0 के प्रमुख जोखिम
रोजगार विस्थापन
स्वचालन से
निम्न-कौशल नौकरियाँ जैसे बीपीओ,
टेक्सटाइल एवं असंगठित क्षेत्र में प्रभावित हो सकती हैं। यह उत्पादकता
बढ़ाता है किंतु “रोजगारविहीन वृद्धि” का खतरा भी है।
डिजिटल विभाजन एवं असमानता
शहरी एवं बड़े
उद्योग नई तकनीकों का लाभ उठा रहे हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्र एवं MSMEs
संसाधनों एवं कौशल की कमी से पीछे रह सकते हैं। इससे सामाजिक-आर्थिक
असमानता बढ़ने की आशंका है।
साइबर सुरक्षा
अधिक डेटा उपयोग से साइबर हमले, डेटा
चोरी तथा निगरानी का खतरा बढ़ा है।
तकनीकी निर्भरता
भारत सेमीकंडक्टर, क्लाउड
सेवाओं एवं उन्नत AI प्लेटफॉर्म के लिए विदेशी कंपनियों पर
निर्भर है। शिक्षा एवं कौशल प्रणाली अभी Industry 4.0 के
अनुरूप पूर्णतः तैयार नहीं है जिससे “तकनीकी उपनिवेशवाद” का
खतरा है।
पर्यावरणीय चुनौतियाँ
डेटा सेंटर एवं ई-वेस्ट पर्यावरणीय दबाव बढ़ा रहे हैं।
स्पष्ट
है कि यह भारत के लिए अवसर है वहीं यह बेरोजगारी, असमानता और डिजिटल
निर्भरता को बढ़ा सकता है। हांलाकि भारत सरकार ने India AI Mission,
Digital India, Skill India, Semiconductor Mission तथा DPDP
Act, 2023 जैसी पहलों के माध्यम से Industry 4.0 के लिए आवश्यक डिजिटल एवं तकनीकी आधार विकसित करने का प्रयास कर रही है।
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