Jul 27, 2026

प्रश्‍न- खाद्य सुरक्षा के घटक क्या है? देश में भविष्य की घरेलू मांगों को पूरा करने में जलपौधों (हाइड्रोपोनिक) की खेती कितनी सहायक होगी? उपयुक्त उदाहरणों के साथ इसका औचित्य सिद्ध कीजिए। [38]

71th BPSC प्रश्‍न- खाद्य सुरक्षा के घटक क्या है? देश में भविष्य की घरेलू मांगों को पूरा करने में जलपौधों (हाइड्रोपोनिक) की खेती कितनी सहायक होगी? उपयुक्त उदाहरणों के साथ इसका औचित्य सिद्ध कीजिए। [38]

 

उत्‍तर- संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के अनुसार, “खाद्य सुरक्षा वह स्थिति है जब प्रत्येक व्यक्ति को हर समय पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध हो।”

भारत में बढ़ती जनसंख्या, घटती कृषि भूमि, जल संकट तथा जलवायु परिवर्तन के कारण खाद्य सुरक्षा एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में हाइड्रोपोनिक (जलपौध) खेती भविष्य की खाद्य मांगों को पूरा करने हेतु एक महत्त्वपूर्ण पूरक तकनीक के रूप में उभर रही है।

 

खाद्य सुरक्षा के मुख्य घटक

  1. खाद्य उपलब्धता (Availability)-देश में पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न, फल एवं सब्जियों का उत्पादन, भंडारण तथा वितरण। उदाहरण: भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा बफर स्टॉक।
  2. खाद्य पहुँच (Access)-प्रत्येक व्यक्ति की भोजन प्राप्त करने की आर्थिक एवं भौतिक क्षमता। उदाहरण: सार्वजनिक वितरण प्रणाली, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना।
  3. खाद्य उपयोगिता (Utilization)-भोजन का पोषणात्मक उपयोग, स्वच्छ जल एवं स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता। उदाहरण: मध्याह्न भोजन योजना।
  4. खाद्य स्थिरता (Stability)-समय के साथ खाद्य आपूर्ति और उपलब्धता में निरंतरता बनी रहना। उदाहरण के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य।

 


केवल 199/- रु. में 72th BPSC Mains का कंटेट

 

v 72वीं BPSC के लिए टेलीग्राम ग्रुप बनाया गया है जिसमें 72वीं के लिए मुख्‍य परीक्षा हेतु कंटेट शेयर किया जा रहा है।

v इसकी सदस्‍यता शुल्‍क 199/- है। 

v इसमें केवल मुख्‍य परीक्षा से संबंधित कंटेट (GK BUCKET Notes का अध्‍यायवार पीडीएफ, उत्‍तर लेखन ग्रुप का मॉडल उत्‍तर ) पीडीएफ शेयर किया जाएगा।

v यदि आप जुड़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए QR Code (GK BUCKET) पर पेमेंट कर या 74704-95829 पर Google pay/Phone Pay द्वारा पेमेंट कर अपना टेलीग्राम नम्‍बर और नाम सेंड करें।

v For more information Whatsapp/Contact- 74704-95829



हाइड्रोपोनिक खेती

हाइड्रोपोनिक खेती ऐसी तकनीक है जिसमें मिट्टी के स्थान पर पोषक तत्वयुक्त जल में पौधे उगाए जाते हैं। बढ़ते जल संकट, जलवायु परिवर्तन की स्थिति में यह भविष्‍य में भारत की घरेलू मांगों को पूरा करने में सहायक हो सकती है।

 

हाइड्रोपोनिक खेती की उपयोगिता

  • जल संरक्षण- पारंपरिक कृषि की तुलना 80–90% तक कम जल उपयोग। जैसे राजस्थान एवं शहरी क्षेत्रों में सीमित जल के बावजूद सब्जी उत्पादन।
  • अधिक उत्पादकता- कम भूमि में अधिक उत्पादन संभव है और वर्टिकल फार्मिंग द्वारा बहु-स्तरीय खेती की जा सकती है। उदाहरण के लिए मुंबई एवं बेंगलुरु के रूफटॉप फार्म।
  • जलवायु परिवर्तन से सुरक्षा- नियंत्रित वातावरण होने से सूखा, अनियमित वर्षा एवं तापमान परिवर्तन का कम प्रभाव और वर्षभर उत्पादन संभव।
  • शहरी खाद्य सुरक्षा- शहरों के निकट उत्पादन से परिवहन लागत एवं खाद्य बर्बादी कम होती है।
  • पोषण सुरक्षा- नियंत्रित पोषक तत्वों से उच्च गुणवत्ता वाली सब्जियाँ एवं फल की प्राप्ति।

 

इस प्रकार हाइड्रोपोनिक खेती सब्जियों और फल‑सब्जियों के लिए अग्रणी है लेकिन इसकी यह पारंपरिक कृषि का पूर्ण विकल्प नहीं बल्कि पूरक तकनीक है क्‍योंकि

  • पूँजी‑गहन- प्रारंभिक स्थापना व्‍यय उच्च होना इसे कम‑आय और पारंपरिक किसानों के लिए अव्यवहारिक बनाता है।
  • सीमित क्षेत्र- यह अभी भी धान, गेहूँ, मक्का आदि अनाजों के उत्पादन के लिए उपयुक्त नहीं है।

 

हाइड्रोपोनिक खेती भविष्य की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हालांकि भारत में यह पारंपरिक कृषि का प्रतिस्थापन नहीं बन सकती। इसलिए आवश्यक है कि हाइड्रोपोनिक तकनीक को सतत कृषि एवं नवाचार के साथ एक पूरक मॉडल के रूप में विकसित किया जाए ताकि “कम संसाधनों में अधिक उत्पादन” के लक्ष्य प्राप्त किया जा सके।

No comments:

Post a Comment