Jul 24, 2026

प्रश्‍न- देश के विकास में रेलवे की भूमिका पर चर्चा कीजिए। देश के उत्तर-पूर्वी भाग में अपनी रसद दक्षता बढ़ाने में भारतीय रेलवे के सामने आने वाली भौगोलिक, आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। [38]

71th BPSC. प्रश्‍न- देश के विकास में रेलवे की भूमिका पर चर्चा कीजिए। देश के उत्तर-पूर्वी भाग में अपनी रसद दक्षता बढ़ाने में भारतीय रेलवे के सामने आने वाली भौगोलिक, आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।[38]


उत्‍तर- “रेलवे भारत की जीवन-रेखा है” जो केवल परिवहन तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण की व्यापक प्रक्रिया को अभिव्यक्त करता है। भारतीय रेलवे जहां देश की आर्थिक एकता, सामरिक सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन का प्रमुख आधार है वहीं उत्तर-पूर्व भारत में संपर्क का माध्यम होने के साथ राष्ट्रीय एकीकरण और “एक्ट ईस्ट नीति” की सफलता का आधार भी है।

 


देश के विकास में रेलवे की भूमिका

आर्थिक विकास की धुरी

  • कच्चे माल, कोयला, इस्पात, सीमेंट एवं कृषि उत्पादों के सस्ते परिवहन का प्रमुख माध्यम।
  • बंदरगाहों, औद्योगिक गलियारों और कृषि मंडियों को जोड़कर राष्ट्रीय बाज़ार का  एकीकरण किया।
  • 12 लाख से अधिक प्रत्यक्ष कर्मचारी और करोड़ों अप्रत्यक्ष रोज़गार का माध्‍यम।

सामाजिक एवं क्षेत्रीय एकीकरण

  • दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़कर राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ किया।
  • श्रमिक प्रवासन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच आसान बनाई।
  • महिला, दिव्यांग एवं वरिष्ठ नागरिक सुविधाओं द्वारा समावेशी विकास को प्रोत्साहन।

राष्ट्रीय सुरक्षा एवं सामरिक भूमिका

  • सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य रसद और सैनिकों की त्वरित आवाजाही सुनिश्चित करता है।
  • जम्मू-कश्मीर तथा उत्तर-पूर्व की रेल परियोजनाएँ सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं।

हरित एवं सतत विकास

  • रेल परिवहन ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण-अनुकूल है।
  • विद्युतिकरण एवं हरित ऊर्जा आधारित रेल प्रणाली कार्बन उत्सर्जन कम करने में सहायक है।

 


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उत्तर-पूर्व भारत में रसद दक्षता की चुनौतियाँ

उत्तर-पूर्व भारत के 8 राज्य देश की भूमि का 8% और सीमा का 98% साझा करते हैं परंतु रेल कनेक्टिविटी अत्यंत अपर्याप्त है जिससे इसकी रसद दक्षता अनेक बाधाओं से प्रभावित है।

भौगोलिक चुनौतियाँ

  • पर्वतीय भूभाग, घने वन, भूकंपीय क्षेत्र एवं अत्यधिक वर्षा रेल निर्माण हेतु कठिन।
  • ब्रह्मपुत्र एवं बराक जैसी विशाल नदियों पर पुल निर्माण महँगा और तकनीकी रूप से जटिल।
  • भूस्खलन और बाढ़ से रेल संचालन बाधित होना।

आर्थिक चुनौतियाँ

  • कम जनसंख्या घनत्व और सीमित औद्योगिक आधार से कम यात्री एवं माल राजस्व।
  • पहाड़ी क्षेत्रों में प्रति किलोमीटर निर्माण लागत तुलनात्‍मक रूप से उच्‍च होना।
  • उच्च परिवहन लागत से क्षेत्रीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता कम होना।

राजनीतिक चुनौतियाँ

  • चीन, म्यांमार और बांग्लादेश से लगी संवेदनशील सीमाएँ।
  • उग्रवाद, जातीय संघर्ष और भूमि अधिग्रहण विवाद से परियोजनाओं में विलंब।
  • छठी अनुसूची क्षेत्रों में सामुदायिक भूमि अधिकारों के कारण समन्वय जटिल होना।

 

निष्कर्षत: भारतीय रेलवे देश के आर्थिक विकास, सामाजिक समावेशन और राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार स्तंभ है। उत्तर-पूर्व भारत में इसकी चुनौतियाँ भौगोलिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से जटिल हैं।

भारत-बांग्लादेश रेल संपर्क, “एक्ट ईस्ट नीति” उत्तर-पूर्व को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने की दिशा में जहां महत्त्वपूर्ण अवसर प्रदान करती हैं वहीं इसकी रसद दक्षता के लिए औद्योगिक विकास, सीमा व्यापार का समानांतर विस्तार, स्थानीय उत्पादन, वेयरहाउसिंग और क्षेत्रीय बाज़ार तंत्र का विकास आवश्‍यक होगा।

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