Aug 3, 2026

71th BPSC PYQ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी लघु उत्‍तरीय प्रश्‍न-उत्‍तर-भाग-1

निम्नलिखित प्रश्नों के लघु उत्तर लिखिए :

a) What role has the philosophy of Jai Anusandhan, Jai Anuprayog" played in the process of technological Indigenization in India? Critically analyze India's current state of  technological self reliance in the field of artificial Intelligence and Robotics. [6]

भारत में प्रौद्योगिकी के स्वदेशीकरण की प्रक्रिया में "जय अनुसन्धान, जय अनुप्रयोग" के दर्शन की क्या भूमिका रही है? कृत्रिम बुद्धिमता एवं रोबोटिक्स के क्षेत्र में भारत की वर्तमान तकनीकी स्वावलम्बन की स्थिति का आलोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत कीजिए।

उत्‍तर- प्रधानमंत्री द्वारा प्रतिपादित “जय अनुसंधान, जय अनुप्रयोग” का दर्शन अनुसंधान को उत्पाद, सेवा एवं सामाजिक समाधान में परिवर्तित करने पर बल देता है। यह “मेक इन इंडियासे आगे बढ़कर “इन्‍वेंट इन इंडियाअवधारणा का आधार है।

 

प्रौद्योगिकी के स्वदेशीकरण में भूमिका

  • अनुसंधान एवं उद्योग के बीच सेतु बनाकर प्रयोगशाला-से-बजार को जोड़ने का प्रयास।
  • इंडिया एआई मिशन, राष्‍ट्रीय क्‍वांटम मिशन, सेमीकंडक्‍टर मिशन द्वारा स्वदेशी तकनीकी क्षमता विकसित करने का प्रयास।
  • कोविन, यूपीआई, चन्‍द्रयान जैसे सफल उदाहरण से भारतीय अनुसंधान को वैश्विक मान्यता।

इस प्रकार स्टार्टअप एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देकर तकनीकी आत्मनिर्भरता को गति प्रदान किया जा रहा है। AI एवं रोबोटिक्स में भारत की स्थिति देखा जाए तो स्‍पष्‍ट होता है कि

 

सकारात्मक पक्ष

  • भारत विश्व के अग्रणी AI प्रतिभा केंद्रों में है तथा AI स्टार्टअप्स संख्या तेजी से बढ़ रही है।
  • IndiaAI Mission और भारतीय भाषायी AI मॉडल महत्वपूर्ण पहल हैं।
  • प्रज्ञान रोवर, Daksh जैसे स्वदेशी रोबोटिक प्लेटफॉर्म।

 

भारत में रक्षा, स्वास्थ्य, कृषि एवं शासन में AI का व्यापक उपयोग हो रहा है हांलाकि अभी कुछ चुनौतियाँ है जैसे-

  • AI चिप्स, GPU, सेंसर एवं सेमीकंडक्टर निर्माण में विदेशी निर्भरता।
  • R&D व्यय GDP के लगभग 0.7% तक सीमित।
  • औद्योगिक रोबोट घनत्व विकसित देशों की तुलना में अत्यंत कम।
  • पेटेंट, उच्च-स्तरीय कंप्यूटिंग अवसंरचना एवं डेटा गवर्नेंस में कमी।

 

निष्कर्ष भारत AI एवं रोबोटिक्स में शक्ति के रूप में उभर रहा है किंतु वास्तविक तकनीकी स्वावलम्बन के लिए हार्डवेयर निर्माण, अनुसंधान निवेश और नवाचार-व्यावसायीकरण को सुदृढ़ करना होगा तभी “जय अनुसंधान, जय अनुप्रयोग” विकसित भारत 2047 की तकनीकी आधारशिला बन सकेगा।

 


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b) To what extent has the expansion of STEM education in Bihar been successful in bridging regional educational disparities? Discuss the hurdles of 'Digital Divide' and 'Teacher capacity, in the context of providing quality education. [6]

बिहार में STEM शिक्षा का विस्तार क्षेत्रीय शैक्षणिक असमानताओं को दूर करने में किस सीमा तक सफल रहा है? गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के संदर्भ में 'डिजिटल डिवाइड' एवं 'शिक्षक क्षमता' की बाधाओं पर चर्चा कीजिए।

उत्‍तर- बिहार में NEP-2020, अटल टिंकरिंग लैब्स, विज्ञान-गणित प्रयोगशालाओं तथा डिजिटल शिक्षण पहलों के माध्यम से STEM (Science, Technology, Engineering and Mathematics) शिक्षा के विस्तार से शैक्षिक अवसरों का विस्तार हुआ है किंतु क्षेत्रीय असमानताएं अभी भी है।

 

STEM शिक्षा विस्तार की उपलब्धियाँ

  • विज्ञान एवं गणित विषयों में नामांकन तथा उत्तीर्णता दर में सुधार हुआ है।
  • बालिकाओं तथा वंचित वर्गों की STEM शिक्षा में भागीदारी बढ़ी है।
  • अटल टिंकरिंग लैब्स, विज्ञान प्रयोगशालाओं और तकनीकी संस्थानों (IIT पटना, NIT पटना) ने नवाचार संस्कृति को बढ़ावा दिया है।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्मों (DIKSHA, PM eVIDYA) ने गुणवत्तापूर्ण सामग्री तक पहुँच।

 

हालाँकि शिक्षा की पहुंच में वृद्धि हुई है, परंतु गुणवत्ता और समानता  के स्तर पर सफलता सीमित रही है। पटना, गया एवं मुज़फ्फरपुर जैसे शहरी क्षेत्रों की तुलना में सीमांचल, कोसी और अन्य दूरस्थ जिलों में प्रयोगशालाओं, इंटरनेट तथा प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता कम है जिससे STEM अवसर अभी असमान है।

 

डिजिटल डिवाइड

  • विद्यालयों में कंप्यूटर, स्मार्ट कक्षाएँ एवं इंटरनेट सुविधा का अभाव।
  • ग्रामीण-शहरी, लैंगिक तथा डिजिटल असमानताएँ से STEM शिक्षा पहुँच में बाधा।
  • डिजिटल डिवाइड से कोडिंग, रोबोटिक्स, वर्चुअल प्रयोगशाला जैसी आधुनिक शिक्षण पद्धतियाँ सीमित।

शिक्षक क्षमता

  • गणित एवं विज्ञान के प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी।
  • STEM आधारित प्रयोगात्मक शिक्षण में दक्षता का अभाव।
  • सतत प्रशिक्षण एवं डिजिटल शिक्षण कौशल कमी।

 

निष्कर्षत: बिहार में STEM शिक्षा का विस्तार शैक्षिक पहुँच बढ़ा रहा है लेकिन क्षेत्रीय असमानताओं को समाप्त करने में आंशिक रूप से सफल रहा है। वास्तविक परिवर्तन के लिए डिजिटल अवसंरचना का सार्वभौमिक विस्तार, STEM शिक्षकों की क्षमता-वृद्धि, तथा सीमांचल-कोसी जैसे पिछड़े क्षेत्रों पर लक्षित निवेश आवश्यक है।

 

c) Explain how the integration of nano technology with environmental monitoring systems can meaningfully address pollution and degradation in India's Industrial belts. Support your answer with examples of emerging innovations. [6]

भारत के औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण तथा पर्यावरणीय क्षरण से निपटने में नैनो प्रौद्योगिकी को पर्यावरण निगरानी प्रणालियों के साथ जोड़ने से किस प्रकार सार्थक समाधान प्राप्त हो सकते हैं। स्पष्ट कीजिए। अपने उत्तर को उभरते नवाचारों के उदाहरणों से समर्थित कीजिए।

 

उत्‍तर- भारत के औद्योगिक क्षेत्र जैसे वापी, अंकलेश्वर, कानपुर आदि वायु, जल एवं मृदा प्रदूषण की गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में नैनो प्रौद्योगिकी को पर्यावरण निगरानी प्रणालियों के साथ एकीकृत करना प्रदूषण नियंत्रण एवं पर्यावरणीय क्षरण रोकने की दिशा में एक प्रभावी समाधान प्रदान करता है जिसे निम्‍न प्रकार समझ सकते हैं :-

 

रियल-टाइम निगरानी एवं पूर्व चेतावनी

  • कार्बन नैनोटयूब, तथा क्‍वांटम डॉट सेंसर हानिकारक एवं भारी धातुओं को सूक्ष्‍म स्तर तक पहचान सकते हैं।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्‍ता और इंटरनेट ऑफ थिंग्‍स आधारित सेंसर नेटवर्क प्रदूषण के पैटर्न का विश्लेषण कर पूर्व चेतावनी जारी करते हैं। उदाहरण के लिए IIT खड़गपुर का ग्राफीन आधारित सेंसर तथा IIT मद्रास की स्मार्ट मॉनिटरिंग प्रणाली।
  • प्रदूषण बढ़ने पर चेतावनी और प्रतिक्रियास्‍वरूप ऑटोमेटिक फिल्टर सक्रिय होना या इकाई बंद होना प्रभावी समाधान है।

 

प्रदूषित जल एवं मृदा का उपचार

  • नैनोमैटेरियल मृदा शुद्धिकरण में उपयोगी है वहीं नैनोकार्बन फ्लोरेट्स, नैनो फाइबर फिल्‍टर आदि भारी धातु, माइक्रोप्लास्टिक एवं विषैले रसायनों को हटाने में सहायक है।
  • Nano Zero-Valent Iron आर्सेनिक, क्रोमियम एवं सीसा जैसी भारी धातुओं को निष्क्रिय करता है। जैसे CSIR-NGRI द्वारा भूजल उपचार, IIT मुंबई के अपशिष्ट जल शोधन संबंधी अनुसंधान।

 

इस प्रकार सूक्ष्म स्तर का हस्तक्षेप व्यापक पर्यावरणीय प्रभाव दे सकता है और यही नैनो प्रौद्योगिकी की वास्तविक शक्ति है। उभरते नवाचार के रूप में नैनो प्रौद्योगिकी और पर्यावरण निगरानी का समन्वय स्मार्ट एवं सतत औद्योगिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। हालाँकि, नैनोकणों की संभावित विषाक्तता, उच्च लागत तथा नियामक ढाँचे का अभाव चुनौतियाँ बने हुए हैं।




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