Aug 4, 2026

71BPSC PYQ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी लघु उत्‍तरीय प्रश्‍न-उत्‍तर-भाग-2

d) How has the use of remote sensing satellites in disaster management redefined the principle of "Disaster Risk Reduction"? Explain the role of India's NETRA project with suitable examples. [6]

आपदा प्रबंधन में सुदूर संवेदन उपग्रहों के उपयोग ने "आपदा जोखिम न्यूनीकरण" के सिद्धांत को किस प्रकार पुनर्परिभाषित किया है? भारत के NETRA परियोजना की भूमिका को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

 

उत्‍तर- "आपदा प्रबंधन का सर्वोत्तम उपाय आपदा के बाद राहत नहीं, बल्कि आपदा से पूर्व तैयारी है।" सुदूर संवेदन उपग्रहों ने आपदा प्रबंधन को प्रतिक्रियात्मक (Reactive) दृष्टिकोण से पूर्वानुमानात्मक एवं जोखिम-न्यूनीकरण दृष्टिकोण में परिवर्तित कर आपदा जोखिम न्यूनीकरण अवधारणा को पुनर्परिभाषित किया है।

 

पारंपरिक दृष्टिकोण

उपग्रह-आधारित आपदा जोखिम न्यूनीकरण

आपदा के बाद प्रतिक्रिया

आपदा से पूर्व तैयारी

राहत एवं पुनर्वास

जोखिम न्यूनीकरण

अनुमान आधारित निर्णय

डेटा आधारित निर्णय

सीमित क्षेत्रीय निगरानी

रियल-टाइम निगरानी

 

इस प्रकार पूर्व में आपदा प्रबंधन का केंद्र राहत एवं पुनर्वास था, जबकि आज उपग्रह आधारित प्रणालियाँ जोखिम पहचान, पूर्व चेतावनी और क्षति न्यूनीकरण पर बल देती हैं।

  1. जोखिम मानचित्रण- RISAT एवं कार्टोसेट उपग्रहों द्वारा बाढ़, भूस्खलन एवं भूकंप-संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान।
  2. पूर्व चेतावनी प्रणाली- INSAT एवं ओशनसेट द्वारा चक्रवात, बाढ़ एवं सूखे की वास्तविक समय निगरानी।
  3. भेद्यता एवं क्षति आकलन - सुभेद्यता एवं जोखिम का वैज्ञानिक आकलन, आपदा के बाद प्रभावी राहत एवं संसाधन आवंटन। जैसे-चक्रवात बिपरजॉय (2023) के दौरान उपग्रह आधारित पूर्वानुमान से लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया गया।

 

NETRA परियोजना की भूमिका

NETRA (Network for Space Object Tracking and Analysis) ISRO की स्वदेशी पहल है जो अंतरिक्ष मलबे एवं संभावित टक्करों से भारतीय उपग्रहों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। इसके प्रमुख योगदान हैं-

  • लगभग 3400 किमी दूरी तक अंतरिक्ष वस्तुओं की निगरानी।
  • INSAT, RISAT, Cartosat जैसे उपग्रहों की निर्बाध कार्यशीलता बनाए रखना।
  • बाढ़, चक्रवात, वनाग्नि जैसी आपदाओं की सतत निगरानी को सक्षम बनाना।

 

इस प्रकार सुदूर संवेदन उपग्रहों ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण को “प्रतिक्रिया और सुधारसे “अनुमान लगाना, रोकना और कम करनामॉडल में रूपांतरित कर दिया है। सुदूर संवेदन उपग्रह आपदा प्रबंधन की “आँखें” हैं तो NETRA उनका “सुरक्षा कवच”।

 


केवल 199/- रु. में BPSC Mains का कंटेट

 

v 72वीं BPSC के लिए टेलीग्राम ग्रुप बनाया गया है जिसमें 72वीं के लिए मुख्‍य परीक्षा हेतु हिन्‍दी/अंग्रेजी भाषा कंटेट शेयर किया जा रहा है।

v इसकी सदस्‍यता शुल्‍क 199/- है। 

v इसमें केवल मुख्‍य परीक्षा से संबंधित कंटेट (GK BUCKET Notes का अध्‍यायवार पीडीएफ, उत्‍तर लेखन ग्रुप का मॉडल उत्‍तर ) पीडीएफ शेयर किया जाएगा।

v यदि आप जुड़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए QR Code (GK BUCKET) पर पेमेंट कर या 74704-95829 पर Google pay/Phone Pay द्वारा पेमेंट कर अपना टेलीग्राम नम्‍बर और नाम सेंड करें।

v For more information Whatsapp/Contact- 74704-95829





e) The high end indigenization of space, IT and defence is believed to be the base of India's long term strategic autonomy. Examine the key institutional, financial and technological barriers that still inhibit complete indigenization, despite considerable national progress. [6]

भारतीय अंतरिक्ष, सूचना प्रौद्योगिकी तथा रक्षा प्रौद्योगिकी के उच्च स्तरों के स्वदेशीकरण को भारत की दीर्घकालिक सामरिक स्वायत्तता का आधार माना जाता है। उल्लेखनीय राष्ट्रीय प्रगति के बावजूद पूर्ण स्वदेशीकरण में बाधा उत्पन्न करने वाली प्रमुख संस्थागत, वित्तीय तथा तकनीकी अवरोधों की परिक्षा कीजिए।

 

उत्‍तर- पिछले कुछ वर्षों में भारत ने चंद्रयान-3, गगनयान, ब्रह्मोस, तेजस, UPI तथा ONDC जैसी उपलब्धियों के माध्यम से अंतरिक्ष, सूचना प्रौद्योगिकी एवं रक्षा क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। फिर भी पूर्ण स्वदेशीकरण का लक्ष्य अधूरा है जो भारत की दीर्घकालिक सामरिक स्वायत्तता के लिए चुनौती बना हुआ है। इस दिशा में प्रमुख अवरोधों को निम्‍न प्रकार देख सकते हैं

 

संस्थागत अवरोध

  • DRDO–उद्योग–सेना के बीच समन्वय की कमी के कारण अनुसंधान से उत्पादन तक की प्रक्रिया बाधित।
  • रक्षा खरीद प्रक्रिया एवं प्रशासनिक लालफीताशाही परियोजनाओं में विलंब।
  • HAL, BEL जैसे सार्वजनिक उपक्रमों के प्रभुत्व से निजी नवाचार एवं प्रतिस्पर्धा सीमित होना।
  • ISRO, IN-SPACe, NSIL तथा डिजिटल संस्थाओं के बीच बेहतर संस्थागत समन्वय की कमी।

 

वित्तीय अवरोध

  • भारत का R&D व्यय GDP का केवल लगभग 0.7% है, जबकि प्रमुख नवाचार अर्थव्यवस्थाओं में यह 2–5% तक है।
  • उच्च जोखिम परियोजनाओं (कावेरी इंजन, सेमीकंडक्टर) हेतु दीर्घकालिक पूंजी का अभाव।
  • रक्षा स्टार्टअप्स के लिए scale-up funding सीमित।

 

तकनीकी अवरोध

  • सेमीकंडक्टर, GPU, उन्नत सामग्री एवं एवियोनिक्स, विशेष मिश्रधातुओं में विदेशी निर्भरता।
  • कुशल मानव संसाधन की कमी एवं Brain Drain समस्‍याएं।
  • MTCR, Wassenaar Arrangement व्यवस्थाओं से उन्नत प्रौद्योगिकियों तक सीमित पहुँच।

 

स्वदेशीकरण की चुनौती केवल तकनीकी नहीं है। कम R&D निवेश तकनीकी निर्भरता बढ़ाता है, तकनीकी निर्भरता आयात बढ़ाती है और आयात-आधारित व्यवस्था संस्थागत सुधारों की गति को कमजोर करती है। अतः तीनों अवरोध परस्पर जुड़े हुए हैं।

 

चंद्रयान-3, ब्रह्मोस और UPI ने भारत की क्षमता सिद्ध कर दी है और अब लक्ष्य मेक इन इंडिया से आगे बढ़कर “इनोवेट इन इंडियाहोना चाहिए। सेमीकंडक्टर, AI, अंतरिक्ष प्रणालियों और रक्षा प्लेटफॉर्मों में पूर्ण स्वदेशीकरण ही भारत की वास्तविक सामरिक स्वायत्तता का आधार बनेगा।

 

f) How do social networking sites act as a 'force multiplies' in the challenges to internal security posed through communication networks? Analyze the judicial and technical implications of this internal security versus civil liberty dilemma. [6]

संचार नेटवकों के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को उत्पन्न चुनौतियों में सोशल नेटवर्किंग साइट्स एक 'बल गुणक' के रूप में कैसे कार्य करती है? आंतरिक सुरक्षा बनाम नागरिक स्वतन्त्रता के द्वन्द्व का विश्लेषण करते हुए इसके न्यायिक एवं तकनीकी निहितार्थ बताइए।

 

उत्‍तर- डिजिटल युग में सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने सूचना के लोकतंत्रीकरण के साथ-साथ सुरक्षा खतरों के डिजिटलीकरण को भी संभव बनाया है। अपनी तीव्र गति, व्यापक पहुँच, गुमनामी तथा समन्वय क्षमता के कारण ये आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों को कई गुना बढ़ा देती हैं, इसलिए इन्हें ‘बल गुणक’ कहा जाता है।

 

आंतरिक सुरक्षा के लिए ‘बल गुणक’ के रूप में भूमिका

सोशल मीडिया स्वयं खतरा नहीं है, बल्कि यह किसी भी सुरक्षा चुनौती की गति, पहुँच और प्रभाव को गुणात्मक रूप से बढ़ा देता है जैसे-

  • सांप्रदायिक तनाव एवं अफवाहें- मुज़फ्फरनगर (2013) तथा मॉब लिंचिंग घटनाओं में भ्रामक संदेशों की भूमिका।
  • कट्टरपंथीकरण-आईएसआईएस द्वारा टेलीग्राम आदि मंचों द्वारा युवाओं का कट्टरपंथीकरण।
  • भीड़-संगठन एवं अशांति- व्हाट्सऐप समूहों द्वारा त्वरित लामबंदी।
  • सूचना युद्ध- डीपफेक, बॉट नेटवर्क तथा दुष्प्रचार अभियानों द्वारा सामाजिक विभाजन।
  • साइबर एवं हाइब्रिड युद्ध- शत्रुतापूर्ण तत्वों द्वारा जनमत को प्रभावित करने का प्रयास।

 

आंतरिक सुरक्षा बनाम नागरिक स्वतंत्रता

सोशल नेटवर्किंग साइट्स तीव्र गति, विशाल पहुँच, गुमनामी क्षमताओं वाली होती है जो सुरक्षा चुनौतियों को गुणात्मक रूप से बढ़ाती हैं। इस संदर्भ में आंतरिक सुरक्षा बनाम नागरिक स्वतंत्रता के मुद्दे भी उठते हैं जो अनुच्छेद 19(1)(क) की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 21 के निजता के अधिकार बनाम राज्य की सुरक्षा-आवश्यकताओं के बीच संतुलन का प्रश्न है।

  • निगरानी बनाम निजता।
  • सामग्री नियंत्रण बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता।
  • इंटरनेट प्रतिबंध बनाम डिजिटल अधिकार।

 

न्यायिक एवं तकनीकी निहितार्थ

सोशल नेटवर्किंग साइट्स से उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियों ने सुरक्षा और नागरिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन का प्रश्न खड़ा किया है। श्रेया सिंघल (2015) में सर्वोच्च न्यायालय ने धारा 66A को निरस्त कर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को संरक्षण दिया, पुट्टास्वामी (2017) में निजता को मौलिक अधिकार माना तथा अनुराधा भसीन (2020) में इंटरनेट प्रतिबंधों पर आनुपातिकता की कसौटी लागू किया।

 

तकनीकी स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी, डीपफेक पहचान आदि फेक न्यूज़ और ऑनलाइन कट्टरपंथ से निपटने में सहायक हैं किंतु इनके अति प्रयोग से व्यापक निगरानी और निजता-हनन का खतरा उत्पन्न हो सकता है। अत: समाधान कठोर नियंत्रण या पूर्ण स्वतंत्रता में नहीं, बल्कि न्यायिक निगरानी, तकनीकी उत्तरदायित्व, डिजिटल साक्षरता तथा आनुपातिक प्रतिबंधों पर आधारित संतुलित व्यवस्था में निहित है।



केवल 199/- रु. में BPSC Mains का कंटेट

 

v 72वीं BPSC के लिए टेलीग्राम ग्रुप बनाया गया है जिसमें 72वीं के लिए मुख्‍य परीक्षा हेतु हिन्‍दी/अंग्रेजी भाषा कंटेट शेयर किया जा रहा है।

v इसकी सदस्‍यता शुल्‍क 199/- है। 

v इसमें केवल मुख्‍य परीक्षा से संबंधित कंटेट (GK BUCKET Notes का अध्‍यायवार पीडीएफ, उत्‍तर लेखन ग्रुप का मॉडल उत्‍तर ) पीडीएफ शेयर किया जाएगा।

v यदि आप जुड़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए QR Code (GK BUCKET) पर पेमेंट कर या 74704-95829 पर Google pay/Phone Pay द्वारा पेमेंट कर अपना टेलीग्राम नम्‍बर और नाम सेंड करें।

v For more information Whatsapp/Contact- 74704-95829






No comments:

Post a Comment