Aug 8, 2026

71th BPSC Science PYQ- साइबर सुरक्षा के मूल सिद्धांत, डिजिटल सार्वभौमिकता की आवश्यकता, तथा मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) की प्रभावशीलता के परिपेक्ष्य में एक समग्र आंतरिक सुरक्षा रणनीति के घटक सुझाइए।

71th BPSC PYQ- In the perspective of the basics of cyber security, the need for digital sovereignty and the effectiveness of the Prevention of Money Laundering Act (PMLA), suggest components for a comprehensive internal security strategy. [36]

साइबर सुरक्षा के मूल सिद्धांत, डिजिटल सार्वभौमिकता की आवश्यकता, तथा मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) की प्रभावशीलता के परिपेक्ष्य में एक समग्र आंतरिक सुरक्षा रणनीति के घटक सुझाइए।  [36]

उत्‍तर- 21वीं सदी में आंतरिक सुरक्षा का स्वरूप पारंपरिक सीमाई खतरों से आगे बढ़कर साइबर हमले, डेटा चोरी, डिजिटल निर्भरता, आतंकवाद वित्तपोषण तथा मनी लॉन्ड्रिंग जैसे बहुआयामी खतरों तक विस्तृत हो चुका है। अतः भारत को ऐसी समग्र आंतरिक सुरक्षा रणनीति की आवश्यकता है जो साइबर सुरक्षा, डिजिटल सार्वभौमिकता तथा वित्तीय अपराध नियंत्रण को एकीकृत दृष्टिकोण से संबोधित करे।




भारत पर होनेवाले साइबर हमलों ने भारत की डिजिटल अवसंरचना की कमजोरियों को उजागर किया और इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर “Zero Trust Architecture”, “Security by Design” तथा AI आधारित हमले की पहचान जैसे आधुनिक सुरक्षा उपाय विकसित किए गए हैं।

 

डिजिटल सार्वभौमिकता राष्ट्रीय संप्रभुता का नया आयाम है जिसका अर्थ है राष्ट्र का अपने डेटा, डिजिटल अवसंरचना, क्लाउड सेवाओं तथा एल्गोरिद्मिक प्रणालियों पर नियंत्रण होना। वर्तमान में विदेशी तकनीकी कंपनियों पर अत्यधिक निर्भरता “डेटा उपनिवेशवाद” तथा साइबर जासूसी का खतरा उत्पन्न करती है। अतः डेटा स्‍थानीयकरण, सेमीकंडक्‍टर मिशन, भारतनेट, IndiaAI Mission जैसी पहलों को सुदृढ़ करना आवश्यक है।

CERT-In तथा NCIIPC जैसी संस्थाएं जहां बैंकिंग, ऊर्जा, दूरसंचार एवं रक्षा क्षेत्र की रीयल-टाइम निगरानी करेगी वहीं DPDP Act, 2023 नागरिक डेटा सुरक्षा और डिजिटल अधिकारों की रक्षा हेतु महत्त्वपूर्ण होगा।

 

मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 काले धन, आतंकवाद वित्तपोषण तथा संगठित अपराधों पर नियंत्रण का कानूनी उपकरण है। इसने अवैध संपत्तियों की कुर्की तथा FATF मानकों के अनुपालन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है हांलाकि कम दोषसिद्धि दर, लंबी न्यायिक प्रक्रिया तथा राजनीतिक दुरुपयोग के आरोप इसकी प्रभावशीलता सीमित करते हैं। इसके अतिरिक्त क्रिप्‍टोकरेंसी, हवाला तथा डार्क वेव आधारित लेन-देन नई चुनौतियाँ प्रस्तुत कर रहे हैं। इसलिए AI आधारित लेनदेन निगरानी, Fast-Track PMLA Courts की स्थापना तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना आवश्यक है।

 

भारत की समग्र आंतरिक सुरक्षा रणनीति Cyber Security + Digital Sovereignty + Financial Intelligence के सूत्र पर आधारित होनी चाहिए जिसके अंतर्गत—

  • साइबर, वित्तीय एवं खुफिया एजेंसियों के बीच समग्र सुरक्षा अवसंरचना विकसित किया जाए।
  • IT Act, DPDP Act तथा PMLA का समन्वित कानूनी ढाँचा बनाया जाए।
  • स्वदेशी AI, Quantum Encryption तथा साइबर फॉरेंसिक क्षमताओं को बढ़ावा दिया जाए।
  • साइबर कमांडो एवं डिजिटल विशेषज्ञों का प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाए।
  • नागरिकों में डिजिटल साक्षरता एवं साइबर जागरूकता बढ़ाई जाए।

 

निष्कर्षतः, आधुनिक आंतरिक सुरक्षा केवल भौतिक सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि डेटा, डिजिटल नेटवर्क और वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा से भी जुड़ी है। अतः भारत को ऐसी संतुलित रणनीति विकसित करनी होगी, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ नागरिक स्वतंत्रता, डेटा गोपनीयता तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की भी रक्षा कर सके।



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