बिहार
में बाल विकास कार्यक्रम
बिहार में बाल
विकास कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं, बच्चों और किशोरियों के
पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा को मजबूत करना है। यह कार्यक्रम
आंगनवाड़ी सेवाओं के माध्यम से संचालित होकर समग्र विकास (Holistic
Development) को सुनिश्चित करता है।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना
- यह केंद्र
प्रायोजित योजना गर्भवती महिलाओं को डीबीटी के माध्यम से नकद सहायता प्रदान करती
है। इसका उद्देश्य मजदूरी हानि की भरपाई, संस्थागत प्रसव और
स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देना है।
पूरक पोषाहार कार्यक्रम
- वर्ष 2017 में शुरू
यह कार्यक्रम राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत गर्भवती
महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और 6 माह से 6 वर्ष तक
के बच्चों को पोषण का अधिकार सुनिश्चित करता है।
- इसमें 3 वर्ष तक के
बच्चों और माताओं को टेक-होम राशन या गर्म पका भोजन दिया जाता है, जबकि
3-6 वर्ष के बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों में ऊर्जा युक्त भोजन और नाश्ता उपलब्ध
कराया जाता है।
- बिहार सरकार की विशेष पहल के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को सप्ताह में दो दिन सुधा दूध पाउडर दिया जाता है ताकि उन्हें अतिरिक्त ऊर्जा और प्रोटीन मिल सके।
- बच्चों को सप्ताह में दो दिन अंडा दिया जाता है तथा अंडा नहीं खाने वालों को पोषण के विकल्प के रूप में भुनी मूंगफली दी जाती है।
पोषण अभियान (2018)
इस अभियान का
लक्ष्य सुपोषित भारत बनाना है, जिसमें विभिन्न विभागों के समन्वय से
पोषण सुधार पर काम किया जाता है। इसके प्रमुख घटक निम्न हैं
- जनांदोलन-
पोषण, स्वच्छता
और स्वास्थ्य व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए “पोषण माह” और “पोषण पखवारा” जैसे
अभियान चलाए जाते हैं।
- पोषण पखवारा- यह वार्षिक जागरूकता कार्यक्रम समुदाय को स्वस्थ आहार और स्वच्छता के लिए प्रेरित करता है।
- पोषण
ट्रैकर- 24 भाषाओं में
उपलब्ध यह डिजिटल प्रणाली बच्चों के वजन, ऊंचाई और कुपोषण स्तर की
निगरानी कर सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाती है।
BPSC Mains special Notes
विद्यालय-पूर्व शिक्षा एवं विकास
6
वर्ष की उम्र तक बच्चे के दिमाग का 85% विकास हो जाता है,
इसलिए यह अवधि अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। आंगनवाड़ी केंद्रों
में 35-40 बच्चों को पोषण, नाश्ता और प्री-स्कूल शिक्षा दी
जाती है, जिससे उनके संज्ञानात्मक और सामाजिक कौशल विकसित
होते हैं।
- “सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0” – इसके तहत संचालित कार्यक्रम द्वारा बच्चों के
संज्ञानात्मक,
सामाजिक और भावनात्मक विकास की मजबूत नींव तैयार किया जाता है।
- सामुदायिक
भागीदारी- “पोषण भी पढ़ाई भी” कार्यक्रम के तहत अभिभावकों को जोड़कर बच्चों की प्रगति
की निगरानी की जाती है और स्कूल में आसान संक्रमण सुनिश्चित किया जाता है।
किशोरी सशक्तिकरण
- किशोरी
योजना (अब पोषण 2.0 में शामिल)- 14-18 वर्ष की किशोरियों को 600 कैलोरी और 18-20 ग्राम प्रोटीन युक्त पूरक पोषण 300 दिनों तक दिया जाता है। इसके साथ आयरन-फोलिक एसिड, स्वास्थ्य
जांच और कौशल प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है।
बिहार सरकार की शिक्षा एवं स्वास्थ्य
की योजनाएं
बिहार सरकार ने
बच्चों,
विशेषकर बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और
स्कूल में निरंतर उपस्थिति बढ़ाने के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं। इनका उद्देश्य
है नामांकन बढ़ाना, ड्रॉपआउट घटाना और शिक्षा को आसान बनाना।
मुख्यमंत्री
बालिका/बालक साइकिल योजना
- इस योजना का लक्ष्य
उच्च कक्षाओं में उपस्थिति बढ़ाना है। कक्षा 9 के 75% उपस्थिति वाले विद्यार्थियों
को ₹3000
DBT के माध्यम से साइकिल खरीदने के लिए दिए जाते हैं।
- इससे खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल तक पहुंच आसान हुई है।
मुख्यमंत्री
बालिका/बालक पोशाक योजना
- इस योजना के तहत कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को 75% उपस्थिति पर पोशाक हेतु सहायता दी जाती है। इससे नामांकन, उपस्थिति और समानता को बढ़ावा मिला है।
बालिका/बालक
प्रोत्साहन एवं छात्रवृत्ति योजना
- योजना के तहत 10वीं में प्रथम श्रेणी से पास छात्रों बालिका और बालक को ₹10,000 मिलते हैं। साथ ही कक्षा 9-10 के छात्रों को ₹1800 वार्षिक छात्रवृत्ति दी जाती है।
- यह योजना छात्रों को अच्छे प्रदर्शन के लिए प्रेरित करती है।
शताब्दी
मुख्यमंत्री बालिका पोशाक योजना
- वर्ष 2011-12 में
शुरू इस योजना के तहत कक्षा 9 से 12 की छात्राओं को ₹1500 DBT के माध्यम से यूनिफॉर्म के लिए दिए जाते हैं।
- इससे बालिकाओं की स्कूल में निरंतरता बढ़ी है।
मुख्यमंत्री
किशोरी स्वास्थ्य योजना
- वर्ष 2014-15 में शुरू इस योजना के तहत कक्षा 7 से 12 की 75% उपस्थिति वाली छात्राओं को ₹300 सहायता दी जाती है।
- इसका उद्देश्य स्वास्थ्य जागरूकता और स्वच्छता को बढ़ावा देना है।
खेल एवं शारीरिक विकास
- खेलकूद एवं शारीरिक शिक्षा- विद्यालयों में खेल सामग्री उपलब्ध कराकर बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा दिया जाता है।
- खेलो इंडिया- इस कार्यक्रम का उद्देश्य खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को विकसित करना और बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराना है।
- पंचायत
स्तर पर खेल मैदान-
मनरेगा के तहत हर ग्राम पंचायत में खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं, जिससे
ग्रामीण युवाओं और लड़कियों की भागीदारी बढ़े।

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