डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) नियम, 2025
भारत सरकार द्वारा
अधिसूचित DPDP नियम, 2025, डिजिटल व्यक्तिगत
डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 को लागू करने का व्यावहारिक ढांचा प्रदान करते
हैं। इसका उद्देश्य व्यक्तिगत गोपनीयता और वैध डेटा उपयोग के बीच संतुलन स्थापित
करना है। अधिनियम को देखा जाए तो स्पष्ट होता है कि डेटा को अधिकार और
संसाधन दोनों रूपों में स्वीकार किया गया है।
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DPDP नियम, 2025 के प्रमुख प्रावधान
सहमति
एवं पारदर्शिता
- डेटा फिड्यूशियरी को स्पष्ट, सरल और स्वतंत्र सहमति नोटिस जारी करना होगा जिसमें डेटा और उसके उपयोग का उद्देश्य बताया जाए।
- सहमति वापस लेने की प्रक्रिया उतनी ही सरल होनी चाहिए जितनी सहमति देने की प्रक्रिया ।
सुरक्षा
एवं जवाबदेही
- किसी भी डेटा उल्लंघन की स्थिति में प्रभावित व्यक्तियों को बिना देरी पूरी जानकारी और समाधान के साथ सूचित करना होगा।
- संस्थाओं को डेटा संरक्षण अधिकारी का संपर्क विवरण सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा।
- नागरिकों के अनुरोधों का उत्तर 90 दिनों के भीतर देना आवश्यक होगा।
डेटा
प्रबंधन एवं भंडारण
- यदि डेटा निर्धारित उद्देश्य के लिए आवश्यक नहीं रह जाता, तो उसे हटाना अनिवार्य होगा।
- डेटा प्रोसेसिंग से जुड़े लॉग्स को कम-से-कम 1 वर्ष तक सुरक्षित रखना होगा।
विशेष
प्रावधान
- बच्चों के डेटा के प्रोसेसिंग से पहले अभिभावक की सत्यापन योग्य सहमति लेना अनिवार्य।
- डेटा संरक्षण बोर्ड की स्थापना की गई है जो डिजिटल माध्यम से शिकायतों का निवारण करेगा।
- महत्वपूर्ण डेटा फिड्यूशियरी के लिए नियमित ऑडिट और डेटा प्रभाव आकलन अनिवार्य।
- कंसेंट मैनेजर केवल भारत आधारित कंपनियां होंगी जिससे डेटा संप्रभुता सुनिश्चित हो सके।
- दिव्यांग व्यक्तियों के लिए विशेष सुरक्षा प्रावधान किए गए हैं।
इस प्रकार इसके
प्रावधान यह दर्शाता है कि नियमों में संस्थागत मजबूती और जवाबदेही पर विशेष ध्यान
दिया गया है।
- गोपनीयता संरक्षण- बिना सुरक्षा उपाय के नागरिक निगरानी, प्रोफाइलिंग और दुरुपयोग का शिकार हो सकते हैं।
- साइबर अपराध की रोकथाम-पहचान की चोरी, वित्तीय धोखाधड़ी और लक्षित हेरफेर जैसे अपराधों में वृद्धि हो रही है।
- राष्ट्रीय सुरक्षा-साइबर अपराध की 2024 में 22.68 लाख हो गईं जिससे खतरा बढ़ा है।
- डिजिटल अर्थव्यवस्था-सुरक्षित डेटा वातावरण डिजिटल अर्थव्यवस्था में विश्वास बढ़ाता है जिसका योगदान GDP का 11.74% है।
- संवेदनशील वर्गों का संरक्षण-बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग डेटा शोषण के प्रति अधिक संवेदनशील हैं।
प्रमुख आलोचनाएं
- सरकारी छूट-सरकार को व्यापक छूट दिए जाने से निगरानी के दुरुपयोग की आशंका है।
- अधिकारों की कमी-डेटा पोर्टेबिलिटी और “भूल जाने का अधिकार” जैसे महत्वपूर्ण अधिकार शामिल नहीं हैं।
- अस्पष्टता-“महत्वपूर्ण डेटा फिड्यूशियरी” जैसी परिभाषाएं स्पष्ट नहीं हैं।
- आर्थिक प्रभाव-उच्च अनुपालन लागत और जटिल प्रक्रियाएं नवाचार और स्टार्टअप पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।
निष्कर्ष DPDP नियम, 2025 भारत को सुरक्षित, भरोसेमंद
और भविष्य उन्मुख डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में आगे बढ़ाते हैं। हालांकि इनके
सफल क्रियान्वयन हेतु पारदर्शिता,
जवाबदेही और संतुलित नियमन
सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।
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