आदिकर्मयोगी अभियन और जनजातीयग्राम दृष्टि 2030 की घोषणा के अधिक अधिकार केंद्रित व्यवस्था की ओर योगदान का संक्षेप में उल्लेख करें। Write a note on the role of Adi Karmayogi Abhiyan and Tribal Village Vision 2030 Declaration towards greater decentralisation. [8]
BPSC Mains special Notes
उत्तर- समावेशी
विकास के लिए जनजातीय समुदायों को केवल योजनाओं के लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि
निर्णय प्रक्रिया के सहभागी के रूप में सशक्त बनाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से
आदि कर्मयोगी अभियान एवं जनजातीय ग्राम दृष्टि 2030 जैसी
पहलें अधिकार-आधारित एवं विकेंद्रीकृत शासन व्यवस्था को मजबूत करती हैं।
आदि
कर्मयोगी अभियान
- जनजातीय कार्य
मंत्रालय द्वारा प्रारंभ यह विश्व का सबसे बड़ा जनजातीय नेतृत्व मिशन है, जिसका
लक्ष्य 30 राज्यों के लगभग 1 लाख
जनजातीय ग्रामों में 20 लाख “आदि कर्मयोगियों” को प्रशिक्षित
करना है। इससे स्थानीय नेतृत्व एवं संस्थागत क्षमता का विकास होगा, जिससे समुदाय सरकारी योजनाओं का निष्क्रिय लाभार्थी न रहकर विकास
प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बनेगा।
जनजातीय
ग्राम दृष्टि 2030
- विशेष ग्राम सभाओं
के माध्यम से जनजातीय समुदायों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना एवं आजीविका से जुड़े विकास ब्लूप्रिंट स्वयं तैयार किए।
यह Bottom-up Planning का उदाहरण है, जिसमें
स्थानीय आवश्यकताओं, सांस्कृतिक पहचान एवं सामुदायिक
प्राथमिकताओं को महत्व दिया गया है।
अधिक
अधिकार केंद्रित व्यवस्था में योगदान
- PESA Act, 1996 के अनुरूप ग्राम सभाओं की निर्णयकारी भूमिका मजबूत होती है।
- सामुदायिक परामर्श, FGDs एवं ट्रांजेक्ट वॉक द्वारा स्थानीय जरूरतों की पहचान सुनिश्चित होती है।
- जनजातीय स्वशासन, जवाबदेही
एवं प्रशासनिक विकेंद्रीकरण को बढ़ावा मिलता है।
- “लोगों के लिए शासन” से “लोगों द्वारा शासन” की अवधारणा सुदृढ़ होती है।
हालांकि, इन
पहलों की वास्तविक सफलता पर्याप्त वित्तीय संसाधनों, प्रशासनिक
क्षमता एवं प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। फिर भी ये पहलें जनजातीय
समुदायों को हाशिए से मुख्यधारा की निर्णय प्रक्रिया में लाकर सहभागी, अधिकार-केंद्रित एवं लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा
में महत्वपूर्ण कदम हैं।
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