May 13, 2026

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा भारत के औषधि सुरक्षा नियमों में खामियों को लेकर चिंता व्यक्त करने को संदर्भित करते हुए विस्तृत चर्चा करें। 71th BPSC

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा भारत के औषधि सुरक्षा नियमों में खामियों को लेकर चिंता व्यक्त करने को संदर्भित करते हुए विस्तृत चर्चा करें।Discuss the World Health Organization (WHO) concerns over gaps in India's Drug Safety Regulations in the pharmaceutical Sector. [8] (71th BPSC Mains)

 

BPSC Mains special Notes

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उत्‍तर- हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत में निर्मित कुछ कफ सिरप में Diethylene Glycol और एथाइलीन ग्लाइकॉल जैसे विषाक्त पदार्थों का पता लगाने में असफलता एवं निम्न-गुणवत्ता वाली दवाओं के मामलों में भारत की औषधि सुरक्षा नियमों में गंभीर खामियों पर चिंता जताई।

 

भारत के औषधि सुरक्षा नियमों में प्रमुख खामियां

  • दवा निरीक्षण तंत्र कमजोर तथा निरीक्षकों की संख्या अपर्याप्त।
  • दवा निर्माण में वैश्विक (गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस) मानकों का पूर्ण पालन नहीं हो पाता।
  • औषधि नियमन कमियां जैसे लाइसेंस प्रदाता और केंद्रीय मानक अलग।
  • टेस्टिंग लैब्स, कच्चे माल की जांच, पैकेजिंग और लेबलिंग में लापरवाही ।
  • फार्माकोविजिलेंस (दुष्प्रभाव निगरानी) प्रणाली सीमित होना।
  • नकली एवं घटिया दवाओं की आपूर्ति रोकने हेतु डिजिटल ट्रैकिंग पर्याप्त प्रभावी नहीं।

 

यह केवल भारत का नहीं बल्कि वैश्विक मामला है क्योंकि गाम्बिया, उज्बेकिस्तान जैसे देशों में भी भारतीय सिरपों से मौतें हुईं और WHO ने गंभीर चेतावनी जारी की थी। इससे जहां भारतीय फार्मा की विश्वसनीयता प्रभावित हुई वहीं निर्यात छवि पर असर और WHO निगरानी बढ़ी। हालांकि भारत द्वारा सुधारात्मक के तहत कई इकाइयों का लाइसेंस निलंबित करने, WHO के दवा विनिर्माण मानकों को सख्त बनाने, फार्माकोविजिलेंस को मजबूत किए जाने जैसे कदम उठाए गए हैं किंतु उनका प्रभावी क्रियान्वयन अभी भी चुनौती बना हुआ है।

 

भारत के लिए गुणवत्तापूर्ण दवा स्वास्थ्य के साथ-साथ वैश्विक विश्वास और आर्थिक प्रतिष्ठा का भी प्रश्न है। अतः वैश्विक मानकों के पालन, संस्‍थागत समन्‍वय, बेहतर निगरानी एवं ट्रेकिग के द्वारा सुरक्षित, पारदर्शी एवं जवाबदेह औषधि नियामक प्रणाली विकसित करना आवश्यक है।

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