विश्वभर में प्रवासन-विरोधी नीतियों में बयानबाजी, प्रतिक्रिया, विरोध और प्रदर्शन, विशेषकर पश्चिमी लोकतंत्रों से लेकर एशिया के भागों तक बढ़ती नकारात्मकता का उल्लेख करें। 71th BPSC Mains
Write
a note on the increasing surge in anti-immigration rhetoric, protests, and
policies worldwide from Western democracies to parts of Asia. [7]
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BPSC Mains special Notes
उत्तर- आर्थिक
असुरक्षा,
पहचान-आधारित राजनीति तथा सुरक्षा चिंताओं के बीच विश्वभर में
प्रवासन-विरोधी नीतियों एवं बयानबाजी में तीव्र वृद्धि हुई है। पश्चिमी लोकतंत्रों
से लेकर एशिया के कई भागों तक प्रवासियों और शरणार्थियों को रोजगार, संस्कृति तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए “खतरे” के रूप में प्रस्तुत किया
जा रहा है जिससे सामाजिक एवं राजनीतिक नकारात्मकता बढ़ी है।
पश्चिमी
लोकतंत्रों में बढ़ती नकारात्मकता
पश्चिमी देशों में लोकलुभावन
राजनीति और धुर-दक्षिणपंथी विचारधारा ने जहां प्रवासी विरोधी बयानबाजी को मजबूत
किया है वहीं “स्थानीय नौकरियों की रक्षा” और “राष्ट्रीय पहचान बचाने” जैसे नारों
के माध्यम से कठोर आव्रजन नीतियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। जैसे
- अमेरिका में सीमा सुरक्षा एवं निर्वासन नीतियों का कठोर होना।
- ब्रिटेन की Rwanda Deportation
Policy।
- जर्मनी, फ्रांस
एवं इटली में धुर-दक्षिणपंथी दलों का उभार।
- प्रवासी-विरोधी
रैलियों,
विरोध प्रदर्शनों एवं घृणा अपराधों में वृद्धि।
एशिया
में बढ़ती प्रवासी-विरोधी प्रवृत्तियाँ
एशिया के कुछ देशों
में आर्थिक दबाव,
जनसंख्या वृद्धि एवं राष्ट्रवादी भावनाओं के कारण प्रवासी और
शरणार्थियों के खिलाफ विरोध बढ़ा है। रोहिंग्या संकट, सीमा
नीतियाँ तथा प्रवासी-विरोधी अभियानों ने इसे और तेज किया है जिससे
- विदेशी लोगों को नापसंद करने तथा प्रवासी/शरणार्थियों के प्रति असहिष्णुता बढ़ी।
- मानवाधिकार उल्लंघन एवं सामाजिक बहिष्करण में वृद्धि।
- क्षेत्रीय सहयोग एवं सामाजिक सद्भाव पर प्रतिकूल प्रभाव।
इस प्रकार कल्याणकारी
राष्ट्रवाद और जनांकिकीय चिंताओं के कारण नकारात्मक प्रवासन राजनीति बढ़ रही है। अतः
सुरक्षा चिंताओं और मानवीय मूल्यों के बीच संतुलन स्थापित करते हुए समावेशी एवं
संवेदनशील प्रवासन दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
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