Oct 12, 2026

साइबर युद्ध/साइबर हमला

 

साइबर युद्ध/साइबर हमला


परम्परागत हथियारों के स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों जैसे- इंटरनेट और कंप्यूटरों से लड़ा जानेवाले युद्ध् साइबर युद्ध कहलाता है । इसमें इंटरनेट, कम्प्यूटर के माध्यम से वायरस, हैकिंग, मालवेयर आदि द्वारा कम्प्यूटर आधरित प्रशासनिक-तंत्र, संचार-व्यवस्था, सार्वजनिक सेवाओं आदि की डिजीटल कार्यप्रणाली को बाधित किया जाता है।




वर्तमान डिजीटल युग में भारत सरकार तथा निजी सेवा प्रदाताओं द्वारा अनेक प्रकार की सार्वजनिक, प्रशासनिक, आर्थिक, तकनीकी सेवाएं डिजीटल माध्यम से उपलब्ध करायी जा रही है। यद्यपि इससे सेवाओं की उपलब्धता में सुगमता, पारदर्शिता तथा गतिशीलता आयी है किन्तु इसके साथ-साथ कई सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भी आयी है । 


 

APK स्कैम : एक बढ़ता साइबर खतरा

APK स्कैम आज देश में सबसे तेजी से फैलते साइबर अपराधों में से एक बन चुका है। इसमें अपराधी सोशल इंजीनियरिंग तकनीक का उपयोग कर लोगों को उनके मोबाइल पर मैलिशियस एंड्रॉइड पैकेज किट (APK) फाइल इंस्टॉल करने के लिए मजबूर करते हैं।

स्कैम की प्रक्रिया

  1. अपराधी स्वयं को बैंक कर्मचारी, सरकारी अधिकारी या किसी भरोसेमंद संस्था का प्रतिनिधि बताकर विश्वास पैदा करते हैं।
  2. डर, लालच या जल्दबाजी का माहौल बनाकर यूज़र से APK फाइल डाउनलोड करवा लेते हैं।
  3. APK इंस्टॉल होते ही ठग पीड़ित के मोबाइल पर नियंत्रण पा लेते हैं और उसकी वित्तीय जानकारी तक पहुँच बना लेते हैं।
  4. इस डेटा का इस्तेमाल कर अपराधी अनधिकृत लेन-देन करते हैं, जिससे यूज़र को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है।


साइबर हमला

  • गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार साइबर क्राइम केस 2024 तक बढ़कर 22 लाख से अधिक हो गया। 
  • 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत में साइबर हमलों की सबसे बड़ी लहर देखी गई और 15 लाख से अधिक साइबर अटैक हुए​।
  • विभिन्न साइबर सुरक्षा रिपोर्टों के अनुसार भारत मैलवेयर अटैक के लिए विश्व में सबसे ज्यादा निशाना बनने वाला देश है​।
  • India Cyber Threat Report 2025 के अनुसार सुरत (कुल 14.6% साइबर अटैक) भारत में सबसे अधिक साइबर अटैक झेलने वाला शहर बना​ ​।
  • AI-enhanced malware को 60% IT विशेषज्ञों द्वारा सबसे बड़ा खतरा माना गया​, डीपफेक तकनीक का दुरुपयोग तेजी से बढ़ रहा है​
  • जेनरेटिव AI के कारण फिशिंग ईमेल और नकली चालान बनाना आसान हो गया है​
  • Panama सरकार- अर्थव्यवस्था और वित्त मंत्रालय पर रैंसमवेयर हमला।
  • Harrods- लक्जरी रिटेल कंपनी पर हमला जिसमें 430,000 ग्राहकों का डेटा प्रभावित​ हुआ।
  • चीनी हैकर्स ने "साल्ट टाइफून" अभियान के तहत 20+ देशों के दूरसंचार नेटवर्क को हैक किया।
  • जापान की अंतरिक्ष एजेंसी पर साइबर हमले हुए, लेकिन संवेदनशील डेटा सुरक्षित रहा।
  • जर्मनी की विपक्षी पार्टी पर यूरोपीय चुनावों से पहले साइबर हमला हुआ।
  • पाकिस्तानी साइबर जासूसों ने भारत के सरकारी, रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्रों पर मैलवेयर तैनात किया।

 

स्पष्ट है कि भारत को साइबर सुरक्षा के मोर्चे पर अभूतपूर्व चुनौतियां है। हालांकि सरकार और निजी क्षेत्र दोनों मिलकर इन खतरों से निपटने के लिए तेजी से कदम उठा रहे हैं, लेकिन साइबर अपराधियों की बढ़ती परिष्कृत तकनीकों के कारण यह एक निरंतर चलने वाली लड़ाई है।



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साइबर सुरक्षा

हाल ही में किए गए एक शोध के अनुसार शीर्ष देशों की सूची में रूस, यूक्रेन, चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देश शामिल है। साइबर अपराध की इस सूची में भारत को 10वां स्थान दिखाता है कि देश में साइबर अपराधों की गंभीरता और उनके खिलाफ संघर्ष की आवश्यकता है।

 

साइबर सुरक्षा से अभिप्राय आपके इंटरनेट और नेटवर्क आधारित डिजिटल उपकरणों तक अनधिकृत पहुंच को रोकने तथा सूचना की सुरक्षा से संबंधित है। साइबर सुरक्षा का प्रमुख उद्देश्य डाटा की चोरी को रोकना तथा सभी डिजीटल दस्तावेजों, फाइलों को सुरक्षित रखना है । 





साइबर सुरक्षा की आवश्यकता

  • सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार के लिए, ऑनलाइन धोखाधड़ी, ब्लैकमेलिंग, डाटा लीक जैसी घटनाओं पर नियंत्रण हेतु ।
  • अनाधिकृत पहुंच, हमले, डेटा संप्रभुता, डेटा दुरूपयोग, आतंकवादी, असामजिक तत्वों से सुरक्षा हेतु ।
  • भारतीय अर्थव्यवस्था में लगभग 15% भाग डिजिटल अर्थव्यवस्था है जो आनेवाले वर्षों में तेजी से बढ़ने की संभावना है।
  • शिक्षा,चिकित्सा, प्रशासन, सुरक्षा वित्तीय कार्यों आदि में ऑनलाइन का बढ़ता दायरा।
  • व्यक्तियों, संगठनों, सरकारों, व्यवसाय के संवेदनशील डेटा,सूचनाओं को सुरक्षित रखने हेतु ।
  • कम्प्यूटर जासूसी द्वारा देश की सैन्य, आर्थिक सुरक्षा संबंधी खतरे की संभावना, हैकिंग में संपूर्ण सेवा बाधित।
  • अज्ञात दुश्मन, अज्ञात हमला होने के कारण त्वरित जवाबी कार्यवाहीं करने के लिए।
  • डिजीटल भारत तथा डिजीटल सेवाओं की उपलब्धता में विदेशी वेवसाईट, एप पर निर्भरता।


साइबर सुरक्षा- राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न अंग

राष्ट्रीय सुरक्षा के अभिन्न अंग के रूप में एक सक्षम साइबर सुरक्षा बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता पर कारगिल समीक्षा समिति 1999 द्वारा ज़ोर दिया गया था। ऑपरेशन सिंदूर में भी इस आवश्‍यकता को महसूस किया गया। AI, IoT, ब्लॉकचेन, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, जैव प्रौद्योगिकी, ओटोमेशन इत्यादि ऐसी नवीन प्रौद्योगिकियां है जो राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी अनेक चुनौतियों को उत्पन्न कर रही है

  1. भारत तथा चीन के बीच भारत को लगातार चीन की विकसित अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से खतरा बना हुआ है।
  2. ड्रोन का प्रयोग सुरक्षा बलों को धोखा देने, ध्यान भटकाने आदि के लिए किया जा सकता है।
  3. डिजीटल व्यवस्था में आतंकवादी तथा अन्य राष्ट्र विरोधी समूह, साइबर घुसपैठिए नियंत्रण प्रणाली तक पहुंच प्राप्त कर खतरे संबंधी नियमों, क्षेत्र, अनुमति में बदलाव कर सकते हैं।
  4. ऑटोमेशन, हैकिंग संबंधी जोखिम, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक पर अतिनिर्भरता से साइबर हमलों तथा सुरक्षा संबंधी तकनीक जटिलता में वृद्धि होने की संभावना है।
  5. सैन्य सिद्धांतों तथा खतरों की प्रकृति में हो रहे परिवर्तन तथा साइबर कमांड की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए साइबर सुरक्षा रणनीति में बदलाव सुरक्षा ढाँचे के अद्यतनीकरण आपेक्षित है।

 


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साइबर सुरक्षा की चुनौतियाँ

साइबर सुरक्षा एक अत्यंत महत्वपूर्ण और जटिल क्षेत्र बन चुका है, जहां निरंतर नए-नए खतरे उत्पन्न हो रहे हैं। निम्नलिखित बिंदुओं में साइबर सुरक्षा से संबंधित प्रमुख चुनौतियों का विवरण दिया गया है:-


बढ़ती सुभेद्यता-क्लाउड कम्प्यूटिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और 5जी जैसी तकनीकों के विकास के कारण साइबर हमलों की सुभेद्यता बढ़ रही है। इन तकनीकों के माध्यम से साइबर हमलावरों के लिए नए रास्ते खुल रहे हैं, जो सुरक्षा को चुनौतीपूर्ण बनाते हैं।

त्वरित प्रतिक्रिया की कमी-नई और उन्नत तकनीकी के साथ होने वाले साइबर हमले तेजी से बदलते हैं, और इन हमलों पर त्वरित कार्रवाई न होने से नुकसान बढ़ जाता है। इसके अलावा, हमलावरों की गुमनाम प्रवृत्तियों के कारण अपराधियों को पकड़ने में कठिनाई आती है।

सक्रिय साइबर डिफेंस की कमी-यूरोपीय संघ की General Data Protection Regulation  और अमेरिका के Clarifying Lawful Overseas Use of Data (CLOUD) अधिनियम जैसे देशों में सक्रिय साइबर डिफेंस प्रणालियाँ हैं, लेकिन भारत में इस प्रकार का समग्र साइबर डिफेंस तंत्र का अभाव है।

डेटा सुरक्षा चुनौतियाँ- डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और सोशल मीडिया के दुरुपयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे सुरक्षा चुनौतियों को और बढ़ा रहे हैं।

साइबर अपराध में विविधता-साइबर अपराध में विभिन्न प्रकार के अपराधी होते हैं, जैसे राज्य-प्रायोजित हैकर, गैर-राज्य अभिकर्ता और विदेशी हैकर, जिससे समस्याएँ और चुनौतीपूर्ण हो जाती हैं।

कार्यप्रणाली में एकरूपता की कमी-भारत में साइबर सुरक्षा से संबंधित कई निकाय हैं, लेकिन उनके बीच समन्वय की कमी और कार्यप्रणाली में एकरूपता का अभाव है। अमेरिका, सिंगापुर और ब्रिटेन जैसे देशों में एक ही संगठन साइबर सुरक्षा मामलों का संचालन करता है।

कुशल मानव संसाधन की कमी-भारतीय सैन्य बलों, केंद्रीय पुलिस संगठनों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों में साइबर अपराध से निपटने के लिए कुशल मानव संसाधन की कमी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ब्लॉकचेन, मशीन लर्निंग, जैसी अत्याधुनिक तकनीकों में दक्ष पेशेवरों की भी कमी है।

आयातित उपकरणों पर निर्भरता-भारत की साइबर सुरक्षा अवसंरचना में आयातित उपकरणों पर अत्यधिक निर्भरता है, जिससे साइबर हमलों के प्रति सुभेद्यता बढ़ जाती है। यह स्थिति सुरक्षा के लिहाज से एक गंभीर चुनौती उत्पन्न करती है।


 

प्रभावी साइबर सुरक्षा हेतु साइबर स्पेस के निम्न तत्वों को मजबूत किया जाना चाहिए

नेटवर्क सुरक्षा

नेटवर्क सुरक्षा हेतु एंटी वायरस, एंटी स्पाइवेयर, फायरवॉल का उपयोग किया जा सकता है जो नेटवर्क तक अनधिकृत पहुंच को रोकता है।

डेटा सुरक्षा

प्रमाणीकरण, पार्सवर्ड, क्रिप्टोग्राफी द्वारा डेटा सुरक्षा की जाती है । इसके द्वारा उपयोगकर्ता की गोपनीयता तथा निजी डाटा की सुरक्षा होती है।

क्लाउड सुरक्षा

सुरक्षित तथा मजबूत क्लाउड स्पेस के द्वारा साइबर हमलों को रोका जा सकता है।

रिकवरी प्लान

किसी आपात स्थिति से निपटने हेतु रिकवरी रणनीति महत्वपूर्ण होती है अतः इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

यूजर एजुकेशन

नेटवर्क उपयोगकर्ताओं को साइबर सुरक्षा, पासवर्ड बदलने, सुरक्षित उपयोग का पर्याप्त प्रशिक्षण ।

मोबाइल सुरक्षा

मोबाईल उपयोगकर्ताओं की बढती संख्या को देखते हुए सुरक्षित साइबर स्पेस उपलब्ध कराना आवश्यक है।

एप्लीकेशन सुरक्षा

एप्लीकेशन के डिजाइन, विकास तथा निर्माण में खतरों से बचने हेतु उपायों को समाहित किया जाना चाहिए।

 

संसदीय समिति की साइबर अपराध पर चिंता

डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी पर संसद की स्थायी समिति ने वित्तीय सेवा विभाग के साइबर फ्रॉड रोकने संबंधी दावों को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि मौजूदा उपाय मुख्यतः कागजी और प्रक्रियागत हैं तथा पीड़ितों को प्रभावी राहत देने में असफल रहे हैं।

समिति की 44वीं रिपोर्ट में डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग और निवेश के नाम पर होने वाली ठगी के तेजी से बढ़ते और गंभीर स्वरूप को रेखांकित किया गया है। समिति ने साइबर अपराध से निपटने के लिए केवल प्रक्रियात्मक उपायों के बजाय त्वरित शिकायत निवारण, मजबूत निगरानी, बेहतर समन्वय और प्रभावी वित्तीय सुरक्षा तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया है।

  

भारत में साइबर अपराध पर संसदीय समिति की रिपोर्ट

क्षेत्र

मुख्य समस्या

समिति के सुझाव

शिकायत निवारण

मानकीकृत प्रारूप, सार्वजनिक आँकड़े और डेटा संरक्षण कानूनों से समन्वय की कमी

  1. बहुभाषी शिकायत प्रणाली, विशिष्ट ट्रैकिंग नंबर और समयबद्ध समाधान न होने पर स्वतः उच्च स्तर पर भेजने की व्यवस्था बनायी जाए।
  2. शिकायत संबंधी गुमनाम एवं अनाम डेटा सार्वजनिक किया जाए।

OTT व नाबालिग

स्व-विनियमन से बच्चों को अनुपयुक्त कंटेंट से पर्याप्त सुरक्षा नहीं

  1. स्वतंत्र पोस्ट-रिलीज़ समीक्षा समिति गठित की जाए।
  2. तकनीक आधारित उम्र सत्यापन, अभिभावकीय नियंत्रण अनिवार्य किया जाए और नियमों के उल्लंघन पर कड़ा दंड की व्‍यवस्‍था की जाए।

फर्जी ऑनलाइन विज्ञापन

विदेशी विज्ञापनों में विज्ञापनदाता की पहचान सत्यापन पर्याप्त नहीं

  1. डिजिटल दस्तावेज का अनिवार्य सत्यापन, लाइव वीडियो पहचान और जीरो-ट्रस्ट फ्रेमवर्क आधारित निगरानी की जाए।

म्यूल अकाउंट व भुगतान धोखाधड़ी

विभिन्न संस्थाओं के धोखाधड़ी संबंधी डेटा का बेहतर एकीकरण आवश्यक

  1. सेंट्रल पेमेंट फ्रॉड इंफॉर्मेशन रजिस्ट्री  को पूर्णतः कार्यात्मक, इंटर-ऑपरेबल और रियल-टाइम रजिस्ट्री बनाया जाए

CBI का क्षेत्राधिकार

सामान्य सहमति वापस लेने वाले राज्यों के कारण साइबर अपराध जांच में देरी

  1. केंद्र-राज्य सहयोग मजबूत किया जाए
  2. DSPE Act, 1946 में संशोधन कर बड़े साइबर अपराधों की जांच की शक्ति पर विचार

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल से FIR

शिकायतों को FIR में बदलने की मैनुअल प्रक्रिया से वसूली व रिफंड में देरी

  1. भारतीय  साइबर अपराध समन्वय केंद्र के माध्यम से समयबद्ध रोडमैप और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल शिकायतों को e-FIR में स्वतः बदलने की व्यवस्था

साइबर शिक्षा

स्कूलों में साइबर सुरक्षा शिक्षा समान रूप से लागू नहीं

  1. प्रारंभिक से वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक अनिवार्य चरणबद्ध साइबर सुरक्षा पाठ्यक्रम लागू किया जाए।
  2. शिक्षक प्रशिक्षण व बहुभाषी सामग्री तैयार किया जाए।

कानूनी सुधार

तकनीकी बदलावों के कारण मौजूदा कानूनों को लगातार अद्यतन करने की आवश्यकता

  1. साइबर  कानूनों की नियमित समीक्षा हेतु स्थायी बहु-विषयक तंत्र की व्‍यवस्‍था की जाए।

विखंडित साइबर कानून

अलग-अलग अधिनियमों में कानून होने से जांच, प्रवर्तन और न्यायिक प्रक्रिया में चुनौतियाँ

  1. व्यापक, एकीकृत व प्रौद्योगिकी-तटस्थ साइबर अपराध कानून तथा राष्ट्रीय अधिकार-क्षेत्र वाला विशेषीकृत एकीकृत साइबर अपराध कार्यबल गठित किया जाए।

संसदीय समिति का मुख्य जोर शिकायत निवारण को मजबूत करने, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, वित्तीय साइबर धोखाधड़ी पर नियंत्रण, साइबर शिक्षा और एकीकृत साइबर कानून पर है।

 

 

भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदम

  1. साइबर सुरक्षा के खतरों के विश्‍लेषण और चेतावनी हेतु भारत कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया टीम (CERT-iN) को नोडल एजेंसी बनाया।
  2. वर्ष 2022 तक पूरे देश में 73 स्वदेशी सुपर कंप्यूटर स्थापित करने के लिए राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन का आरंभ।
  3. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 एवं व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, 2023 जैसे कानून ।
  4. विशिष्‍ट क्षेत्रों में साइबर सुरक्षा हेतु राष्‍ट्रीय प्रौद्योगिकी अनुसंधान संगठन को नोडल एजेंसी बनाया गया है।
  5. साइबर अपराधों के संबंध में केन्द्र सरकार द्वारा राज्‍यों/केंद्रशासित प्रदेशों हेतु अंतर-विभागीय समन्वय एवंआवश्यक दिशा-निर्देश जारी।
  6. वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने हेतु सरकार, बैंक, वित्तीय संस्थाएं द्वारा समय-समय पर जागरुकता अभियान। 
  7. भारतीयों के व्यक्तिगत डाटा की सुरक्षा हेतु भारत सरकार ने कई चीनी एप्स पर प्रतिबंध लगाए।
  8. साइबर अपराधों में मदद हेतु “राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल”।
  9. देश में सुरक्षित साइबर पारिस्थितिकी तंत्र हेतु राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति 2013 लाया गया।
  10. डिजिटल इंडिया के तहत साइबर अपराधों से निपटने हेतु 'साइबर स्वच्छता केंद्र' की स्थापना।
  11. कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीकों, भविष्य आधारित तकनीकों हेतु DRDO द्वारा समर्पित प्रयोगशालाएं की स्थापना।
  12. हैकर, विशेषज्ञों की सेवाओं लेना, साइबर अपराध के जागरुकता, प्रशिक्षण कार्यक्रम ।
  13. भारतीय सेना द्वारा मानवयुक्त लड़ाकू प्लेटफॉर्म और ग्रुप ड्रोन जैसी उन्नत सैन्य प्रणालियाँ का विकास।
  14. अंतरराष्ट्रीय सीमा तथा नियंत्रण रेखा की निगरानी आदि हेतु सुरक्षा बलों द्वारा हैंडहेल्ड थर्मल इमेजरका प्रयोग।
  15. साइबर हमलो को रोकने हेतु अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के प्रयासों में तेजी । 


बिहार में साइबर सुरक्षा के प्रयास

  • स्टेट डाटा सेंटर 2.0 की क्षमता बढ़ाने हेतु Phase-II की योजना।
  • साईबर अटैक एवं प्राकृतिक आपदा की स्थिति में डिजास्टर रिकवरी एवं बिजनेस कंटिन्यूटी प्रोजेक्ट।
  • सुरक्षा संचालन केंद्र– सूचना सुरक्षा टीमों को साइबर घटनाओं का अनुश्रवण, पहचान, विश्लेषण और प्रतिक्रिया की सुविधा।
  • उद्भवन केंद्र – सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा AI, IoT, मशीन लर्निंग और क्लाउड तकनीक के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा।
  • पुलिस प्रशिक्षण – साइबर अपराधों से निपटने हेतु SP, DIG, IG, ADG सहित सभी थानों में पदस्थ अधिकारियों को अनिवार्य साइबर प्रशिक्षण।
  • जागरूकता अभियान – आईटी विभाग द्वारा नुक्कड़ नाटक, एलईडी प्रचार वाहन, ब्रोशर के माध्यम से साइबर सुरक्षा के प्रति सजग करना।
  • बिहार कौशल विकास मिशन – पारंपरिक पाठ्यक्रमों के अतिरिक्त क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, डाटा एनालिटिक्स, जावा प्रोग्रामिंग, नेटवर्किंग इंजीनियरिंग जैसे नए युग के तकनीकी कोर्सों में प्रशिक्षण।
  • डिजिटल पुलिसिंग एवं साइबर सुरक्षा- CCTNS परियोजना को Go Live किया, थानों में FIR, स्टेशन डायरी आदि की डिजिटल प्रविष्टि।
  • बिहार में राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय के ऑफ-कैंपस की स्थापना की स्वीकृति।
  • पटना एवं राजगीर में साइबर फॉरेंसिक प्रयोगशाला इकाइयाँ स्थापित करने हेतु स्वीकृति प्रदान की गयी।



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