Nov 30, 2022

बिहार में नवीकरणीय ऊर्जा

 बिहार में नवीकरणीय ऊर्जा

"नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बिहार सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास आर्थिक विकास को गतिमान रखने के साथ साथ पर्यावरण संतुलन की संभावनाओं को भी पोषित करता है।" चर्चा करें


बिहार में परिवहन और संचार अधिसंरचना

 बिहार में परिवहन और संचार अधिसंरचना

दीर्घकालिक निम्न- कार्बन उत्सर्जन विकास रणनीति (LT-LEDS )


दीर्घकालिक निम्न- कार्बन उत्सर्जन विकास रणनीति (LT-LEDS ) 

प्रश्‍न - कॉप 27 में भारत द्वारा प्रस्‍तुत की दीर्घकालिक निम्न- कार्बन उत्सर्जन विकास रणनीति (LT-LEDS ) की क्‍या विशेषताएं हैं और यह किस प्रकार भारत के वर्ष 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन लक्ष्य प्राप्ति में सहायक है?

भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा वर्ष 2021 में हुए जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP-26) में भारत के लिए 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्य की घोषणा की गयी थी जिसके परिप्रेक्ष्‍य में नवम्‍बर 2022 में मिस्र में हुए COP 27 में  भारत ने अपनी दीर्घकालिक निम्न- कार्बन उत्सर्जन विकास रणनीति (LT-LEDS ) प्रस्‍तुत की ।

         

उल्‍लेखनीय है कि वैश्विक आबादी का भारत का 17% हिस्सा होने के बावजूद ग्‍लोबल वार्मिग में बहुत कम योगदान है तथा भारत की अपने विकास के लिए ऊर्जा संबंधी आवश्‍यकताओं को पूरी करने के साथ साथ कम कार्बन उत्‍सर्जन वाली रणनीतियों के पालन हेतु प्रतिबद्ध है । इसी आधार पर भारत द्वारा ने अपनी दीर्घकालिक निम्न- कार्बन उत्सर्जन विकास रणनीति (LT-LEDS ) प्रस्‍तुत की जिसमें वर्ष 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में उठाए जाने वाले कदमों का उल्लेख किया गया है।

 

भारत की (LT-LEDS ) में निम्न कार्बन आधारित मार्ग 

निम्न-कार्बन आधारित विद्युत ऊर्जा

जीवाश्म ईंधन का विवेकपूर्ण उपयोग तथा ग्रीन हाइड्रोजन, जैव ईंधन आदि में अनुसंधान ।

एकीकृत परिवहन प्रणाली का विकास 

परिवहन साधनों का विद्युतीकरण एवं आधुनिकीकरण द्वारा ईंधन दक्षता सुधार ।

जलवायु अनुकूल नगरीकरण 

जलवायु अनुकूल भवन डिजाइन तथा कम-कार्बन उत्सर्जन आधारित नगरपालिका सेवाएं ।

संवृद्धि गतिविधियों से उत्सर्जन को अलग करना

स्टील,सीमेंट आदि जैसे हार्ड-टू-एबेट क्षेत्रकों में पदार्थ दक्षता और कम कार्बन विकल्‍प अपनाना ।

हरित आवरण में वृद्धि

वनों से बाहर वृक्षों तथा हरित आवरण की बहाली, संरक्षण और प्रबंधन

वायुमंडल से CO2 हटाना

सार्वजनिक-निजी भागीदारी ढांचे की संभावनाओं का पता लगाना।

वित्त पोषण

इक्विटी निवेश, बॉण्ड और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश द्वारा निजी वित पोषण।

 

इस प्रकार भारत दीर्घकालिक निम्न-कार्बन उत्सर्जन विकास रणनीति के माध्‍यम से ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जीवाश्म ईंधन से अन्य स्रोतों में बदलाव न्यायसंगतसरलस्थायी और सर्व-समावेशी तरीके कर सकता है ।

 

यह रणनीति जैव ईंधन, इथेनॉल मिश्रण, राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन, इलेक्ट्रिक वाहनों के अनुकूल माहौल उपलब्‍ध कराने में भी सहायक होगी जिससे न केवल परिवहन क्षेत्र कम कार्बन उत्सर्जन होगा बल्कि सार्वजनिक परिवहन के साधनों में एक सशक्त बदलाव आएगा ।

 

इस रणनीति में जलवायु अनुकूल शहरी विकास, स्मार्ट सिटी पहल, संसाधन दक्षता में वृद्धि, ग्रीन बिल्डिंग कोड, ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन जैसे प्रयासों में तेजी लाने के साथ साथ  हरित आवरण में वृदिध हेतु भी रणनीति प्रस्‍तुत करती है ।

उल्‍लेखनीय है कि बिहार सरकार द्वारा पूर्व से ही दिशा में जहां जल, जीवन हरियाली, बिहार स्वच्छ ऊर्जा नीति 2019, हरित टैक्‍स जैसी प्रयासों को क्रियान्वित किया जा रहा है वहीं बिहार राज्‍य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा UNEP के साथ मिलकर जलवायु परिवर्तन अनुकूल और निम्‍न कार्बन उत्‍सर्जक विकास रणनीति भी बनायी गयी है।

उपरोक्‍त से स्‍पष्‍ट है भारत द्वारा प्रस्‍तुत दीर्घकालिक निम्न-कार्बन उत्सर्जन विकास रणनीति(LT-LEDS ) एक महत्‍पूर्ण घोषणा है जो वित्‍त, तकनीकी बाधाओं आदि के बावजूद भारत के वर्ष 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में सहायक  है ।

Nov 28, 2022

जलवायु प्रेरित आपदा एवं कॉप 27

 जलवायु प्रेरित आपदा एवं कॉप 27 

बिहार की ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था -पशुपालन एवं मत्‍स्‍यन

 

बिहार ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था -पशुपालन एवं मत्‍स्‍यन

प्रश्‍न- बिहार के ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था के महत्‍वपूर्ण अंग के रूप में पशुपालन एवं मत्‍स्‍यन जैसी सहवर्ती क्रियाओं में हालिया प्रगति पर टिप्‍पणी करते हुए इस दिशा में सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं को बताएं ।

बिहार में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने वाले प्रमुख संस्थान, योजनाएं तथा नीतियां

बिहार में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने वाले प्रमुख संस्थान, योजनाएं तथा नीतियां

प्रश्‍न: बिहार में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने वाले प्रमुख संस्थान, योजनाओं, नीतियों को संक्षिप्‍त रूप में बताएं ।

बिहार कृषि निवेश प्रोत्साहन नीति 2020

 

बिहार कृषि निवेश प्रोत्साहन नीति 2020

प्रश्‍न- बिहार सरकार की कृषि निवेश प्रोत्साहन नीति 2020 बिहार में कृषि आधिारित औद्योगिक विकास की व्‍यापक संभावनाओं को विस्‍तार देने में मददगार है। चर्चा करें।

Nov 27, 2022

COP 27 एवं संबंधित मुद्दे

 

COP 27  एवं संबंधित मुद्दे


Nov 25, 2022

सतत विकास लक्ष्‍य एवं कोविड 19 महामारी

प्रश्‍न- यद्यपि सतत विकास लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करने की दिशा में भारत की प्रगति धीमी रही है लेकिन कोरोना महामारी, लॉकडाउन के कारण पलायन और बढ़ती बेरोजगारी से SDG लक्ष्य और दूर हो गए हैं। चर्चा करें ।

 

ऐसा विकास जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति इस प्रकार करें जिसमें भावी पीढ़ी को अपनी आवश्यकता पूरी करने हेतु समझौता न करना पड़े सतत विकास कहलाता है।

वर्ष 2015 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा ‘2030 सतत् विकास हेतु एजेंडाको अपनाया गया जिसके तहत गरीबी, पोषण, स्‍वास्‍थ्‍य, शिक्षा, लैंगिक समानता, स्‍वच्‍छता, जलवायु परिवर्ततन, वैश्विक भागीदारी आदि जैसे 17 विकास लक्ष्य को अंगीकृत किया गया ।

 

सतत विकास की दिशा में सरकार के प्रयास

भारत सरकार द्वारा भी इन लक्ष्‍यों के प्रति प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की गयी और इन लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु कार्यान्वयन, निगरानी तथा विभिन्‍न विभागों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी नीति आयोग को सौंपी गयी ।

इस दिशा में जहां  सरकार के अधिकांश कार्यक्रम सतत विकास लक्ष्य को ध्यान में रखकर ही बनाए जा रहे हैं वहीं राज्यों को भी सतत विकास पर अपने-अपने दृष्टि पत्र को तैयार करने तथा उसी के अनुसार कार्य करने की महत्‍वपूर्ण भूमिका दी गयी है ।

 

कोविड-19 महामारी एवं सतत विकास लक्ष्य 

SDG व्यापक रूप से सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय आयामों को कवर करते हैं। उल्लेखनीय है कि कोराना संकट से पहले ही भारत समेत कई देश लक्ष्यों को हासिल करने में पिछड़ रहे थे लेकिन अब कोरोना के बाद लॉकडाउन और पलायन के कारण निर्धनता, भूखमरी, स्‍वास्‍थ्‍य, शिक्षा, रोजगार जैसे लक्ष्‍य ओर दूर हो गए है।

निर्धनता-SDG 1 गरीबी दूर करने के लिए समर्पित है लेकिन महामारी के कारण जहां आशंका है कि करोड़ों लोग गरीबी की दलदल में फंस सकते हैं तथा समाज में आर्थिक असमानता की खाई गहरी होगी ।


भूखमरी- खाद्य और कृषि संगठन तथा अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के सहयोग से जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत सबसे बड़ी खाद्य असुरक्षित आबादी वाला देश है । उल्‍लेखनीय है कि वैश्विक प्रयासों से पिछले दो दशकों में कुपोषित लोगों की संख्या लगभग आधी हो गई लेकिन COVID-19 महामारी के कारण वर्ष 2030 तक शून्य भुखमरी के लक्ष्य को प्राप्त करना कठिन प्रतीत हो रहा है।


स्वास्थ्य- महामारी के कारण हाल के वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में प्राप्त उपलब्धि को आघात लग सकता है और स्वास्थ्य सेवाओं  तथा टीकाकरण अभियानों में बाधा के कारण शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर में में वृद्धि होने के साथ एड्स और मलेरिया नियंत्रण अभियानों की गति धीमी होने से इन बीमारियों की बढ़ने की संभावना है।


गुणवत्तापरक शिक्षा- वर्तमान महामारी के दौर में शिक्षा को डिजीटल माध्यम से दिया गया लेकिन भारत में डिजिटल डिवाइड की कमी के कारण सभी तक शिक्षा नहीं पहुंच पायी।


गुणवत्तापरक रोजगार- अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक कार्यबल का आधा भाग अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में काम करते हैं तथा महामारी में कई लोग अपने रोजगार तथा नौकरी खो चुके हैं।


स्‍पष्‍ट है कि कोरोना महामारी के व्‍यापक प्रभाव के कारण पलायन और बढ़ती बेरोजगारी से कुछ SDG लक्ष्य और दूर हो गए हैं। हांलाकि वर्ष 2020-21 में कोविड-19 महामारी द्वारा उत्‍पन्‍न  गंभीर बाधाओं के बावजूद भारत ने कुछ लक्ष्‍यों में अच्‍छा प्रदर्शन किया ।


यदि कोविड महामारी का प्रभाव नहीं होता तो भारत के प्रदर्शन और बेहतर होता फिर भी महामारी के दौर में 2020-21 में नीति आयोग SDG इंडिया इंडेक्स द्वारा मापे गए 15 SDG इंडेक्स में से 8 में अच्छा प्रदर्शन, भारत का समग्र स्कोर 60 से बढ़कर 66 होना तथा वर्ष 2021 में फ्रंट रनर राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या 22 होना संतोषजनक स्थिति को बताता है ।