बिहार विधानसभा 2025
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दलवार
विधायक संख्या |
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भाजपा |
89 |
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जदयू |
85 |
|
राजद |
25 |
|
लोजपा (रामविलास) |
19 |
|
हम (सेकुलर) |
5 |
|
रालोमो |
4 |
|
अन्य |
शेष |
|
कुल |
243 |
बिहार विधानसभा चुनाव 2025- महत्वपूर्ण जानकारी
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के चुनाव परिणाम को देखा जाए तो
स्पष्ट होता है कि में MY (मुस्लिम–यादव) समीकरण की जगह MY (महिला–युवा) समीकरण केंद्र में रहा जो एनडीए
की प्रचंड जीत को रेखांकित करता है।
MY (महिला–युवा) समीकरण
¶
बिहार चुनाव में महिला–युवा आधारित माई समीकरण ने न केवल
एनडीए को निर्णायक बढ़त दिलाई, बल्कि विधानसभा की जातीय संरचना को भी नया स्वरूप दिया।
¶ पिछड़ा और अतिपिछड़ा वर्ग का बढ़ा
प्रतिनिधित्व तथा यादव और अल्पसंख्यक विधायकों की घटती संख्या इस बदलाव को स्पष्ट करती
है।
¶
यह चुनाव बिहार की राजनीति में सामाजिक और चुनावी रणनीति
के नए दौर का संकेत देता है।
|
विधानसभा में जातीय
प्रतिनिधित्व |
|
|
वर्ग/
समुदाय |
विधायक
संख्या |
|
पिछड़ा
वर्ग |
83 |
|
अतिपिछड़ा
वर्ग |
37 |
|
सवर्ण
समाज |
72 |
|
दलित/आदिवासी |
40 |
|
अल्पसंख्यक |
11 |
|
यादव |
28 |
|
कुल |
243 |
जातीय संरचना
¶
वर्ष 2025 में सम्पन्न हुए 18वीं विधानसभा में कुल 243 विधायकों में से लगभग आधे पिछड़ा
और अतिपिछड़ा वर्ग से हैं। पिछड़ा वर्ग के 83 और अतिपिछड़ा श्रेणी के 37 विधायक चुने गए। सवर्ण समाज के 72 विधायक सदन में पहुंचे, जबकि आरक्षित सीटों से 40 दलित और आदिवासी विधायक निर्वाचित
हुए।
¶
अल्पसंख्यक समुदाय से केवल 11 विधायक चुने गए। सबसे अधिक आबादी
वाली यादव जाति के विधायकों की संख्या 28 रह गई।
मंत्रियों पर आपराधिक मामले
¶
एडीआर के अनुसार, 46% (11) मंत्रियों पर आपराधिक मामले दर्ज
है। वहीं,
38% (9) मंत्रियों
के ऊपर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज है।
|
चुनाव वर्ष |
करोड़पति विधायक |
|
2010 |
20% |
|
2015 |
67% |
|
2020 |
81% |
|
2025 |
90% |
संपत्ति की स्थिति
बिहार विधानसभा 2025 के 243 निर्वाचित विधायकों के शपथ पत्रों
के विश्लेषण से एडीआर और बिहार इलेक्शन वॉच द्वारा तैयार रिपोर्ट के अनुसार
¶
विधानसभा 2025 में 90% विधायक करोड़पति हैं जिनकी संख्या 218 है।
¶
वर्ष 2010 में यह मात्र 20% था जो 2015 में 67% और 2020 में 81% हो गया था।
मंत्रियों के पास संम्पत्ति
¶
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और बिहार इलेक्शन वॉच ने बिहार विधानसभा
चुनाव
2025 में मुख्यमंत्री
सहित
27 में से 24 मंत्रियों के शपथ पत्रों का विश्लेषण
कर रिपोर्ट जारी की है। इनमें से 88% यानी 21 मंत्री करोड़पति पाए गए हैं।
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विधायकों की शैक्षणिक स्थिति |
|
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श्रेणी |
प्रतिशत |
|
स्नातक |
60% |
|
5वीं–12वीं |
35% |
|
डिप्लोमा/साक्षर |
5% |
शैक्षणिक स्थिति
¶
रिपोर्ट के अनुसार 60% विधायक स्नातक जबकि 35% की शिक्षा 5वीं से 12वीं के बीच है।
¶
पांच विधायकों ने डिप्लोमा और सात ने स्वयं को साक्षर बताया
है। आयु वर्ग में
41–60 वर्ष
के विधायक सर्वाधिक
(59%) हैं।
महिला मंत्री एवं विधायक
¶
महिला विधायकों की संख्या 29 (12%) है, जो पिछली विधानसभा में 11% थी।
¶
नवगठित मंत्रिमंडल में कुल 27 मंत्रियों में केवल 3 महिलाएं हैं जिससे महिला प्रतिनिधित्व
लगभग
11% है।
स्पष्ट
है कि बिहार विधानसभा में संपन्न विधायकों का वर्चस्व लगातार बढ़ा है। हालांकि आपराधिक
मामलों वाले विधायकों की संख्या में कमी आई है, लेकिन गंभीर मामलों का प्रतिशत अब
भी चिंता का विषय है। शिक्षा और महिला प्रतिनिधित्व में हल्का सुधार दिखता है, पर सामाजिक संतुलन और जनप्रतिनिधित्व
की चुनौती बनी हुई है।
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BPSC Mains special Notes
बिहार चुनाव और बदलती राजनीतिक दिशा
बिहार
विधानसभा चुनाव का परिणाम लगभग सभी आकलनों को गलत साबित करता है। भाजपा–जद (यू) गठजोड़ ने दो-तिहाई से अधिक (80% से ज्यादा) सीटें जीतकर बड़ी सफलता हासिल की
जबकि राजद,
कांग्रेस, वीआईपी और वाम दलों वाला महागठबंधन
करारी हार झेल गया। बिहार विधानसभा चुनावों में एनडीए की जीत ने गठबंधन राजनीति को
नई दिशा दी है और इसके नतीजों का असर अन्य राज्यों, की राजनीति पर भी पड़ता दिख रहा
है।
सत्ता-विरोधी धारणा टूटी
¶
चुनाव से पहले यह माना जा रहा था कि दो दशक के शासन के बाद
नीतीश कुमार के खिलाफ सत्ता-विरोधी लहर है और जद (यू) एनडीए की कमजोर कड़ी बनेगी लेकिन
नतीजों ने इसे गलत साबित किया ।
महिला वोटरों की निर्णायक भूमिका
¶
इस चुनाव में महिलाएं एनडीए की सबसे बड़ी ताकत बनीं। जहां
करीब
63% पुरुषों
ने मतदान किया वहीं
71% से अधिक
महिलाओं ने वोट डाले। महिला-हितकारी योजनाओं और चुनाव से पहले खातों में 10-10 हजार रुपये की सहायता ने इस समर्थन
को और मजबूत किया।
|
महागठबंधन के हार के कुछ महत्वपूर्ण
कारण * नीतिश कुमार का विकल्प
फिलहाल नहीं होना। * मजबूत सरकार का विकल्प पेश
करने में विपक्ष नाकामयाब * महागठबंधन के घटक दलों के बीच
समन्वय की कमी। * महागठबंधन की चुनावी घोषणाओं
में बड़बोलापन जैसे-परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी |
नीतीश कुमार की रणनीतिक बढ़त
¶
महिलाओं को राजनीति के केंद्र में लाने की नीतीश कुमार की
नीति शिक्षा,
साइकिल योजना, पंचायत आरक्षण, नौकरियों में हिस्सेदारी पहले से
ही भरोसे का आधार बना चुकी थी। नकद सहायता ने इसमें ‘उत्प्रेरक’ की भूमिका निभाई ।
रणनीतिक प्रबंधन और संगठन
¶
बिहार में एनडीए की सहयोगी दलों के बीच मतभेद दूर किए गए
और उन्हें साथ बनाए रखा गया।
¶ देशभर से 350 प्रमुख नेताओं को विधानसभा स्तर
पर तैनात किया गया,
जिन्होंने
गठबंधन की रणनीति को जमीनी स्तर तक पहुंचाया।
¶ भाजपा ने इस चुनाव में हर मोर्चे
पर गठबंधन को प्राथमिकता दी चाहे वह बूथ प्रबंधन हो, सीटों का बंटवारा, उम्मीदवार चयन, घोषणापत्र या प्रचार। पार्टी नेताओं
ने सहयोगी दलों की सीटों पर भी समान रूप से प्रचार किया और संसाधनों की कोई कमी नहीं
आने दी।
¶
चुनाव में युवा, महिला, किसान और रोजगार को केंद्र में रखा
गया। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर दिया गया।
बिहार
चुनाव का जनादेश बताता है कि एनडीए ने संगठन, सहयोगियों के साथ एकजुटता, रणनीति और सामाजिक समूहों को साधने
में बेहतर काम किया। महिला मतदाता, मजबूत गठबंधन प्रबंधन और स्पष्ट नेतृत्व ने इस जीत की नींव
रखी। यह जीत न केवल बिहार, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों के लिए भी गठबंधन राजनीति का
नया मॉडल प्रस्तुत करती है।
रिकॉर्ड मतदान और बिना पुनर्मतदान का ऐतिहासिक चुनाव
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बिहार में पुनर्मतदान |
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|
लोकसभा चुनाव
2014 |
96 बूथ |
|
लोकसभा चुनाव 2019 |
3 बूथ |
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लोकसभा चुनाव 2024 |
2 बूथ |
|
विधानसभा चुनाव 2020 |
3 बूथ |
|
विधानसभा चुनाव
2015 |
2 बूथ |
¶
बिहार में मतदाता सूची को अद्यतन रखने के लिए 2025 में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) शुरू किया गया जिसके तहत चुनाव में 7,45,26,858 मतदाता मतदान के योग्य घोषित किए
गए।
¶ आजादी के बाद पहली बार बिहार विधानसभा
चुनाव बिना किसी पुनर्मतदान के संपन्न हुआ। 67.13 प्रतिशत मतदान के साथ यह 1951 के बाद राज्य में दर्ज किया गया
अब तक का सर्वाधिक मतदान प्रतिशत रहा।
¶ इस चुनाव में पुरुष मतदाताओं का
मतदान
62.98 प्रतिशत
और महिला मतदाताओं का मतदान 71.78 प्रतिशत दर्ज किया गया। स्पष्ट है कि महिलाओं ने एक बार फिर
मतदान में बढ़त बनाई।
¶
पुनर्मतदान देखें तो स्पष्ट होता है कि अब तक बिहार में
लगभग हर चुनाव में किसी न किसी बूथ पर पुनर्मतदान कराना पड़ा था लेकिन 2025 में पहली बार एक भी बूथ पर पुनर्मतदान
की जरूरत नहीं पड़ी।
महिला मतदाताओं द्वारा बदली बिहार की राजनीति
की दिशा
2005
के बाद बिहार
की राजनीति में महिलाओं की भूमिका लगातार मजबूत होती गई है। विधानसभा चुनावों में महिला
मतदान प्रतिशत में निरंतर वृद्धि ने सत्ता संतुलन और राजनीतिक रणनीतियों को प्रभावित
किया।
2025
के बिहार
विधानसभा चुनाव में महिलाओं की ऐतिहासिक भागीदारी ने भारतीय लोकतंत्र में एक नया अध्याय
जोड़ा है। महिला मतदाताओं ने न केवल पुरुषों को पीछे छोड़ा, बल्कि राज्य को अब तक के सर्वाधिक
मतदान प्रतिशत तक पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाई।
रिकॉर्ड मतदान और महिलाओं की भूमिका
¶
2025 के विधानसभा चुनाव में पुरुष मतदाताओं का मतदान 62.8 प्रतिशत रहा, जबकि महिलाओं का मतदान 71.6 प्रतिशत दर्ज किया गया। महिलाओं
की बढ़ी भागीदारी के कारण कुल मतदान 66.91 प्रतिशत तक पहुंचा, जो बिहार के इतिहास में अभूतपूर्व
है।
|
वर्षवार महिला मतदान प्रतिशत |
||
|
वर्ष |
महिला मतदान (%) |
वृद्धि (%) |
|
2005 |
44.49 |
+1.97 |
|
2010 |
54.49 |
+10.00 |
|
2015 |
60.48 |
+5.99 |
|
2020 |
59.69 |
-0.89 |
|
2025 |
71.80 |
+12.11 |
¶
1962 में जहां केवल 32.47 प्रतिशत महिलाएं मतदान करती थीं
और कुल मतदान
45 प्रतिशत
से कम रहता था।
¶ 2005 के विधानसभा चुनाव में महिलाओं
का मतदान मात्र 44.49
प्रतिशत
था। अगले एक दशक में जमीनी सशक्तिकरण के चलते 2015 में यह बढ़कर 60.48 प्रतिशत हो गया।
¶ 2010 के विधानसभा चुनाव में कुल मतदान 52.47 प्रतिशत रहा, जिसमें महिलाओं का मतदान 54.49 प्रतिशत और पुरुषों का 51.12 प्रतिशत था। पहली बार महिलाओं ने
मतदान में पुरुषों को पीछे छोड़ा।
¶ 2020 में कोरोना के कारण मामूली
गिरावट आई लेकिन 2025
में
रिकॉर्ड मतदान ने महिलाओं के बढ़ते आत्मविश्वास को स्पष्ट किया। 2020 के विधानसभा चुनाव में कुल मतदान 56.93 प्रतिशत रहा। इस दौरान महिलाओं के
मतदान प्रतिशत में मामूली कमी आई लेकिन वे फिर भी पुरुषों से आगे रहीं।
¶
2025 के विधानसभा चुनाव में महिलाओं के मतदान में उल्लेखनीय वृद्धि
दर्ज की गई और यह
71.8 प्रतिशत
तक पहुंच गया,
जो 2020 की तुलना में 12.11 प्रतिशत अधिक है।
बढ़ते मतदान के कारण
¶ नीतिगत हस्तक्षेप- 2006 में शुरू हुई मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना से बड़ी संख्या
में लड़कियां स्कूल पहुंचीं और वही पीढ़ी आज मतदान में आगे है।
¶ सामाजिक बदलाव-
पहले जहां परिवार के पुरुष मतदान का निर्णय लेते थे वहीं अब महिलाएं स्वयं उम्मीदवार
चुनने लगी हैं। भय और बाधाओं का कम होना लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाता है।
¶ पंचायत आरक्षण- 2006 में पंचायतों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण मिलने से गांव-गांव में उनकी भागीदारी बढ़ी। आज 58 प्रतिशत मुखिया और उप-मुखिया महिलाएं हैं।
¶ साक्षरता- बिहार
में महिला साक्षरता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में महिला-पुरुष साक्षरता के बीच करीब 20 प्रतिशत का अंतर बना हुआ है। स्नातक
स्तर और रोजगार में भी असमानता स्पष्ट है।
2005
के बाद बढ़ता
महिला मतदान बिहार की राजनीति में निर्णायक बदलाव का संकेत है। महिलाओं के लिए आरक्षण, महिला-केंद्रित योजनाएं और सुविधाओं पर
जोर दिए जाने से चुनाव दर चुनाव उनका राजनीतिक रुझान और मजबूत हुआ। बिहार में
महिला-केंद्रित विकास योजनाएं और बढ़ता
राजनीतिक विश्वास बिहार की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और सशक्त बना रहे हैं।

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