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Feb 9, 2026

डिजिटल भूमि अभिलेख और कृषि के आधुनिकीकरण

प्रश्न-डिजिटल भूमि अभिलेख और ऑनलाइन सेवाएँ क्या वास्तव में भूमि विवाद और भ्रष्टाचार को कम कर सकती हैं? बिहार के अनुभव के आधार पर विवेचना कीजिए।8 अंक 

उत्तर-भूमि विवाद बिहार में न्यायिक बोझ और सामाजिक संघर्ष का बड़ा कारण रहे हैं। परंपरागत रिकॉर्ड प्रणाली में पारदर्शिता और अद्यतन की कमी के कारण स्वामित्व को लेकर लगातार विवाद उत्पन्न होते रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में डिजिटल भूमि प्रशासन को समाधान के रूप में प्रस्तुत किया गया है जैसे-

 

  • डिजिटल सुधारों से प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ी है।
  • ऑनलाइन खाता, नक्शा और भू-लगान भुगतान से बिचौलियों की भूमिका कम हुई।
  • ऑनलाइन दाखिल–खारिज से प्रक्रिया का ट्रैकिंग, विवाद निपटान में तेजी आई।
  • बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम के तहत समयबद्ध निर्णय प्रणाली लागू हुई।
  • डिजिटल रिकॉर्ड से साक्ष्य जुटाना आसान हुआ।

 

तकनीकी प्रगति एवं ऑनलाइन सेवाओं के माध्‍यम से सुधार तो आया है लेकिन कुछ संरचनात्मक सीमाएँ भी हैं जिनमें प्रमुख हैं-

  • पुराने सर्वे रिकॉर्ड की त्रुटियाँ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी स्थानांतरित हो जाती हैं।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और इंटरनेट पहुँच सीमित है।
  • भू-माफिया और राजनीतिक दबाव अब भी बाधक हैं।

 

इसलिए उपरोक्‍त तथ्‍यों को देखते हुए जहां डिजिटल भूमि सुधार को प्रशासनिक सुधार से जोड़ना आवश्यक है वही नियमित सर्वेक्षण, स्थानीय सत्यापन और ग्राम सभाओं की भागीदारी जरूरी है।

 

निष्कर्षत: डिजिटल भूमि प्रशासन विवाद कम करने का सशक्त उपकरण है, पर इसे अंतिम समाधान मानना भ्रम होगा। जब तकनीक, संस्थागत सुधार और सामाजिक निगरानी साथ मिलें, तभी भूमि शासन वास्तव में न्यायपूर्ण बन सकता है।

 

प्रश्न- बिहार में कृषि के आधुनिकीकरण एवं तकनीकी विकास की दिशा में किए जा रहे प्रमुख प्रयासों का विश्लेषण कीजिए। यह स्पष्ट कीजिए कि ये पहलें किसानों की आय वृद्धि और जलवायु अनुकूल कृषि में कैसे सहायक हैं। 38 अंक 

उत्तर- कृषि बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है किंतु जलवायु अनिश्चितता, छोटे जोत आकार और सीमित संसाधनों के कारण पारंपरिक कृषि अब पर्याप्त नहीं रह गई है। इसी संदर्भ में राज्य सरकार द्वारा तकनीक आधारित, नवाचारी और जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा देकर कृषि के आधुनिकीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं जिसे निम्‍न प्रकार देख सकते हैं:-

 

तकनीक आधारित खेती द्वारा नवाचार

  • सहरसा में तालाब आधारित मॉडल में नीचे मछली और ऊपर सब्जी उत्पादन द्वारा हाइड्रोपोनिक्स जैसी एकीकृत कृषि प्रणाली शुरू की गई।
  • दुल्हिन बाजार (पटना) में न्यूट्रिशनल विलेज के तहत पोषक तत्वों से भरपूर जैविक फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
  • ड्रोन से पौधा संरक्षण, AI आधारित फसल आकलन औरफसलमशीन के माध्यम से डेटा-संचालित स्मार्ट खेती को प्रोत्साहन मिल रहा है।

 

डिजिटल सेवाएँ और संसाधन प्रबंधन

  • मौसम बिहार ऐपसे 5 दिन पहले मौसम पूर्वानुमान मिलने से बुवाई और कटाई निर्णय बेहतर हो रहे हैं।
  • मिट्टी बिहार ऐपऔर बड़े पैमाने पर मृदा जांच से उर्वरकों का संतुलित उपयोग संभव हो रहा है।
  • 562 टेलिमेट्री सिस्टम से भूजल स्तर की निगरानी कर जल दोहन को नियंत्रित किया जा रहा है।

 

जलवायु अनुकूल कृषि और फसल विविधीकरण

  • बाढ़ और सूखा सहनशील फसलों के विकास हेतु कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चरल बायोटेक्नोलॉजी की स्थापना और नई प्रजातियों का रोडमैप।
  • मोटे अनाज, दलहन और तिल के लिए 100 बीज हब, जिससे स्थानीय बीज उपलब्धता बढ़ेगी।
  • सात आदर्श बागवानी केंद्रों से मखाना, मशरूम, शहद और फल-सब्जी आधारित मूल्य संवर्धन को बढ़ावा।

 

उपरोक्‍त के अलावा पशुपालन और मत्स्य क्षेत्र में तकनीकी प्रयास भी किसानों की आय वृद्धि एवं विविधता ला रहे हैं जिनमें e-Gopala ऐप, सीमेन स्टेशन, IVF तकनीक और पशु एम्बुलेंस से पशुधन उत्पादकता बढ़ रही है। मछली ब्रूड बैंक, फिश फीड मिल औरफिश ऑन व्हील्ससे मत्स्य मूल्य श्रृंखला मजबूत हुई है।


निष्कर्षत: बिहार में कृषि के आधुनिकीकरण में तकनीक, डिजिटल सेवाएँ, जलवायु अनुकूलता और आय विविधीकरण एक साथ जुड़े हैं। यदि किसान प्रशिक्षण, बाजार संपर्क और संस्थागत समर्थन को और सुदृढ़ किया जाए, तो ये पहलें बिहार की कृषि को टिकाऊ, प्रतिस्पर्धी और लाभकारी बनाने में निर्णायक सिद्ध होंगी।


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