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Jan 15, 2026

Bihar tourism-bihar me paryatan Kshetra Vikas

 

बिहार में पर्यटन क्षेत्र


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भारत में पर्यटन क्षेत्र की स्थिति

विश्व यात्रा एवं पर्यटन परिषद की आर्थिक प्रभाव रिपोर्ट 2020 के अनुसार भारत के सकल घरेलू उत्पाद में यात्रा एवं पर्यटन का संयुक्त रूप से 6.8% योगदान है । फलतः देश के सकल घरेलू उत्पाद में यात्रा और पर्यटन के लिहाज से भारत का 185 देशों के बीच 10वां स्थान है तथा यात्रा और पर्यटन से भारत में 3.98 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है।

  • पर्यटन संबंधी निर्माण परियोजनाओं जैसे होटल, रिसॉर्ट्स और मनोरंजन सुविधा विकास में स्वचालित मार्ग से 100% FDI  की अनुमति।
  • इन्वेस्ट इंडिया के अनुसार पर्यटन क्षेत्र 2028 तक भारत की GDP में 512 बिलियन अमेरिकी डॉलर का योगदान कर सकता है
  • अनुमान है कि पर्यटन क्षेत्र द्वारा 2029 तक 53 मिलियन नौकरियां सृजित हो सकती है।
  • पर्यटन की बेहतर अवसंरचना से जहां जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि होती है वहीं एक-दूसरे की संस्कृति के प्रति समझ और सम्मान बढ़ता है।
  • पर्यटन देश की सांस्कृतिक विविधता, अमूर्त विरासत आदि को पुनर्जीवित करता है।

 

पर्यटन विकास का उद्देश्‍य

  • भारत के सकल घरेलू उत्पाद में पर्यटन की भागीदारी बढ़ाना।
  • घरेलू पर्यटन पर फोकस करते हुए स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं में पर्यटन के योगदान को बढ़ाना।
  • स्थानीय समुदायों हेतु स्व-रोज़गार सहित नौकरियां पैदा करना।
  • पर्यटन और आतिथ्य में स्थानीय युवाओं के कौशल को बढ़ाना।
  • स्थानीय सांस्कृतिक व प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और संवर्धन करना।
  • पर्यटन स्थलों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं विकसित कर एकीकृत विकास को बढ़ावा ।

 

बिहार में वर्ष 2023 में कुल 8.21 करोड़ पर्यटक आए जिनमें 8.15 करोड़ देसी और 5.46 लाख विदेशी पर्यटक शामिल थे। यह आंकड़ा पर्यटन के क्षेत्र में बिहार की संभावनाओं एवं क्षमता को प्रदर्शित करता है। हालिया आंकड़ों के अनुसार उत्‍तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बाद बिहार तीसरे स्थान पर है जहां टूरिज्म एंड हॉस्पिटलिटी के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की संख्‍या 3.96 लाख से ज्‍यादा है।


केंद्र सरकार के ई-श्रम पोर्टल से पता चलता है कि बिहार में पर्यटन में महिलाओं की भूमिका भी बढ़ी है जहां टूरिज्म एंड हॉस्पिटलिटी के क्षेत्र में 69% (लगभग 2.74 लाख) महिलाएं ट्रेवल गाइड, वेटर, किचेन हेल्‍पर, केयर-टेकर, रूम अटेंडेंट के रूप में  काम कर रही है।

 



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केन्‍द्रीय बजट 2025-26 एवं बिहार पर्यटन क्षेत्र की घोषणाएं

केंद्रीय वित्त मंत्री ने बजट 2025-26 में देश के 50 महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों के विकास की योजना बनाई है। इनमें बिहार के कई स्थल शामिल किए जा सकते हैं। बजट घोषणा के अनुसार बुद्ध से जुड़े सभी स्थलों को विकसित की जाएगी। इसके अंतर्गत बिहार के गया, बोधगया, राजगीर, वैशाली, केसरिया जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा, कई छोटे और कम प्रसिद्ध बौद्ध स्थलों को भी विकसित किया जाएगा, जिससे बौद्ध धर्मावलंबियों और अन्य पर्यटकों के लिए सुविधाएँ बढ़ेंगी।

 

बुद्ध सर्किट का महत्व

भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े सभी प्रमुख स्थलों को जोड़कर "बुद्ध सर्किट" कहा जाता है। इस सर्किट में नेपाल के लुंबिनी से शुरू होकर केसरिया, नालंदा, राजगीर, बोधगया, सारनाथ, कुशीनगर, सांची और अमरावती जैसे स्थल शामिल हैं।

  • लुंबिनी (नेपाल) – भगवान बुद्ध का जन्मस्थल।
  • बोधगया – यहाँ बोधि वृक्ष के नीचे बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ।
  • सारनाथ – यहाँ बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया।
  • कुशीनगर – यहाँ भगवान बुद्ध ने महापरिनिर्वाण प्राप्त किया।
  • राजगीर – वेणु वन में बुद्ध ने अपने शिष्यों को प्रवचन दिए।
  • नालंदा – ऐतिहासिक खंडहर और बौद्ध शिक्षा का केंद्र।

 

बिहार के पयर्टन स्‍थलों का विकास

बोधगया

 

  • यहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ थाइस योजना के तहत इस स्‍थल को विशेष रूप से विकसित किया जाएगा। गया के विष्णुपद मंदिर और बोधगया में महाबोधि मंदिर के लिए विशेष विकास योजनाएँ बनायी जाएगी।
  • सरकार महाबोधि मंदिर कॉरिडोर को काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित करने की योजना बना रही है।

राजगीर

 

  • हिन्दूबौद्ध और जैन तीनों धर्मों के लिए महत्वपूर्ण स्थल के तौर पर चिह्नित राजगीर को और विकसित करने की योजना है। इसके तहत निम्‍न कार्य किया जाएगा 
  • राजगीर में वेणु वन और बुद्ध के पवित्र मार्ग का संरक्षण।
  • जैन कॉम्प्लेक्स जैन के 20वें तीर्थंकर मुनि सुवर्ता के मंदिर का पुनरुद्धार।
  • गर्म पानी की सात धाराओं और ब्रम्हकुंड समेत अन्‍य स्‍थलों का पुनरुद्धार।
  • नालंदा विश्वविद्यालय खंडहर को विरासत के रूप में संरक्षित कर पर्यटन केन्‍द्र के रूप में विकास किया जाएगा।

पर्यटन स्थलों की संपर्कता

केन्‍द्रीय बजट 2025-26 में बिहार में वायु संपर्क को बढ़ाने के लिए कई ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे बनाने के निर्णय के अलावा पर्यटन स्थलों की संपर्कता को बेहतर करने की घोषणा की गयी इससे निवेशरोजगार वृद्धि  होगी तथा अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट

बिहार में राजगीरभागलपुर और सोनपुर में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट स्थापित करने की योजना बनाई गई है। ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट ऐसे हवाई अड्डे होते हैंजो बिल्कुल नई जगहों पर बनाए जाते हैंजहाँ पहले से कोई हवाई अड्डा नहीं होता। इसका उद्देश्य किसी नए शहर या क्षेत्र में हवाई यात्रा के विस्तार के लिए किया जाता है।

ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लाभ

  • बिहार के इन क्षेत्रों से अन्य राज्यों और देशों तक यात्रा आसान होगी।
  • पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
  • हवाई परिवहन सुविधाओं के कारण स्थानीय अर्थव्यवस्था में सुधार होगा।
  • इन क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

ब्राउनफील्ड एयरपोर्ट

  • बिहार में सहरसावाल्मीकिनगरपूर्णियाबेगूसरायमुंगेरगोपालगंजमोतिहारी और रक्सौल में ब्राउनफील्ड एयरपोर्ट के निर्माण की योजना है। ब्राउनफील्ड एयरपोर्ट वे होते हैंजो पहले से मौजूद हवाई अड्डों के विस्तार और आधुनिकीकरण के रूप में विकसित किए जाते हैं।

अन्य प्रमुख विकास घोषणाएं

  • पटना एयरपोर्ट का नया टर्मिनल फरवरी के अंत तक तैयार होगा तथा पटना एयरपोर्ट पर सुविधाएं बढ़ायी जाएगी।
  • बिहटा एयरपोर्ट का विस्तार किया जाएगाजिससे बड़े विमान (एयरबस 120बोइंग 737) उतर सकेंगे।
  • इन हवाई अड्डों के निर्माण और विस्तार से पर्यटनव्यापार और उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।

घोषणाओं का प्रभाव

बुद्ध से जुड़े स्थलों के विकास से बिहार में पर्यटन को बढ़ावा तथा बिहार को वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी । इस घोषणा के बाद जहां निवेश के अवसर बढ़ेगे,आर्थिक गतिविधियाँ तेज होंगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे वहीं स्थानीय व्यापार, होटल, परिवहन और हस्तशिल्प उद्योगों को भी लाभ मिलेगा।  उल्‍लेखनीय है कि 2024 में लगभग 6.5 लाख पर्यटक बिहार आए जिनकी संख्‍या में आनेवाले समय में और बढ़ेगी।

 

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निष्कर्षत: केन्‍द्रीय बजट में घोषित बुद्ध पर्यटन स्थल विकास योजना से बिहार को एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का अवसर मिलेगा। इसके माध्यम से न केवल बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए सुविधाएँ बढ़ेंगी, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था, निवेश और रोजगार में भी सकारात्मक बदलाव आएगा।

 

बिहार में पर्यटन स्‍थल

बिहार भौगौलिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से अनेक महत्‍वपूर्ण स्‍थलों से युक्‍त राज्‍य है जहां पर्यटकों के लिए काफी संभावनाएं है।  बिहार के आर्थिक विकास में वृद्धि तथा रोजगार के अवसर पैदा करने के उद्देश्य से बिहार में पर्यटन का विशेष महत्व होने के कारण बिहार सरकार धार्मिक, विरासत, स्वास्थ्य, मनोरंजन, तटीय और सांस्कृतिक पर्यटन के विकास के लिए लगातार काम करती रही है।

 

बिहार में आनेवाले पर्यटकों की संख्‍या ( लाख में )

वर्ष

देशी

विदेशी

योगफल

2019

339.9

10.9

350.8

2020

56.4

3.0

59.5

2021

25.0

0.01

25.0

2022

253.3

0.86

254.17

2023

815

5.46

821

 

 

बिहार में पर्यटन क्षेत्र के विकास की संभावनाओं को देखते हुए बिहार सरकार पर्यटन क्षेत्र के विकास हेतु सतत रूप से प्रयासरत है । बिहार के पर्यटन उद्योग को निम्न श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है।

 

तीर्थ पर्यटन- बिहार में अनेक धर्मों के पावन स्थल है। गया (हिन्दू), पटना साहिब (सिक्ख), मनेर एवं फलवारी शरीफ (मुस्लिम), राजगीर वैशाली एवं बोधगया (बुद्ध), पावापुरी(जैन) उल्लेखनीय धार्मिक स्थल है ।


ऐतिहासिक स्थल- मगध सामाज्य के अवशेष पटनाराजगीरनालंदावैशाली में जबकि मौर्य के अवशेष पाटलीपुत्र तथा गया में मिलते हैं। मध्यकालीन अवेशष सासारामपटना सिटीबिहार शरीफमुगेरभोजपुर आदि में मिलते है। आधुनिक काल में महात्मा गांधी का चम्पारणसदाकत आश्रमगोलघर आदि जैसे स्थल है।


वन अभ्यारणय पर्यटन- हिमालय की तराई में स्थित चम्पारण में बाल्मिकी अभ्यारणयबेगूसराय में कांवर झीलकुशेश्वर आदि पर्यटकोंशोधकर्ताओंप्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करते हैं।


स्वास्थ्य पर्यटन- राजगीर का गर्म पानी कुंडमूगेर का योगा संस्थान इतयादि स्वास्थ्य लाभ हेतु पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इसी प्रकार पटना में स्वास्थ्य हेतु चिकित्सा संस्थान जैसे -महावीर कैंसर संस्थानएम्स आदि में अपना इलाज कराने आते हैं।


खेलकुद पर्यटन-पटना में विश्व स्तरीय गोल्फ एवं टेनिस क्लब। हिमालय की तराई में साहसिक तथा पर्वतारोहण जैसे खेलकूद की व्यापक संभावना है तो गंगा में बोट पर्यटन आकर्षण है।

 

नालंदा विश्वविद्यालय

शिक्षा और ज्ञान का प्राचीन केंद्र नालंदा विश्वविद्यालय कई बार आक्रांताओं के हमलों का शिकार हुआ लेकिन आज यह फिर से अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को प्राप्त कर रहा है।

नालंदा विश्वविद्यालय संबंधी महत्‍वपूर्ण तथ्‍य

  • 5वीं और 7वीं शताब्दी में हुए विदेशी आक्रमणों के दौरान नालंदा को नष्ट किया गया था।
  • 1193 ई. में बख्तियार खिलजी द्वारा अंतिम हमला किया गया।
  • 19वीं शताब्दी में नालंदा के अवशेष सर अलेक्जेंडर कनिंघम ने खोजे।
  • 2000 के दशक की शुरुआत में पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने पुनरुद्धार का विचार रखा।
  • भारत सरकार व पूर्वी एशियाई देशों के सहयोग से इसे आधुनिक क्षेत्रीय ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित किया गया।
  • 2016 में प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया।
  • नालंदा विश्वविद्यालय अधिनियम 2010 के अंतर्गत संसद से स्वीकृति प्राप्त हुई और इस नव‍स्‍थापित संस्‍था को कानूनी आधार प्रदान किया गया।
  •  नवनिर्मित परिसर को आर्किटेक्ट बी.वी. दोषी द्वारा डिजाइन किया गया जो “नेचर पॉजिटिव ग्रीन कैंपस” की अवधारणा पर आधारित है । इसमें जल संचयनसौर ऊर्जाठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसी सुविधाएं हैं।
  • नालंदा विश्‍वविद्यालय में संचालित शैक्षणिक कार्यक्रम में बौद्ध अध्ययनऐतिहासिक अध्ययनपर्यावरणनीतिअंतरराष्ट्रीय संबंध आदि विषयों में शिक्षण और शोध प्रमुख है ।

 


 

पर्यटन के नए आयाम

  1. इको-एडवेंचर टूरिज्म- वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व और रोहतास-कैमूर की पहाड़ियों पर साहसिक खेल और जंगल सफारी।
  2. माइस टूरिज्म और टूरिज्म ऑन व्हील्स- कॉर्पोरेट मीटिंग्स और घूमते हुए पर्यटन के लिए योजनाएं।
  3. स्थानीय कला और संस्कृति का प्रचार- हर प्रखंड में पर्यटन स्थलों की खोज के लिए प्रतियोगिताएं।
  4. तारामंडल- एशिया के सबसे पुराने तारामंडलों में से एक जहां थ्रीडी स्क्रीन पर अंतरिक्ष की दुनिया का अनुभव किया जा सकता है।
  5. बापू टावर (गर्दनीबाग)- चंपारण सत्याग्रह और महात्मा गांधी के विचारों से जुड़ी स्मृतियों को प्रदर्शित करने के लिए म्यूजियम।
  6. मरीन ड्राइव- गंगा किनारे विकसित मनोरंजन क्षेत्र, क्रूज सैर, वाटर स्पोर्ट्स, और खाने-पीने की सुविधाएं।

 

हालिया वर्षों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बिहार सरकार के प्रयास

बिहार के पर्यटन गंतव्यों में विरासत, संस्कृति, पारिस्थितिकी पर्यटन, आध्यात्मिक पर्यटन, साहसिक पर्यटन अनेक प्रकार की थीमों पर आधारित पर्यटन संपदा मौजूद है । बिहार सरकार का मुख्य फोकस पर्यटन के क्षेत्र में बिहार को ब्रांड बनाने पर है। बिहार में पर्यटन को विकसित करने के लिए अवसंरचनात्मक विकास, आधुनिक सुविधाओं और पर्यटकीय स्थलों के सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

  • विश्वस्तरीय अधिसंरचना के लिए दिसंबर 2023 में नई पर्यटन नीति (2023–28) को स्वीकृति।
  • पर्यटन को उद्योग का दर्जा देकर पर्यटन संबंधित क्रिया-कलापों होटल, रापवे, परिवहन, संरचनात्मक सुविधाओं का विस्तार।
  • पटना और बोधगया में फाइव-स्टार होटलों की स्थापना, राष्ट्रीय व राजकीय राजमार्गों पर रेस्टोरेंट, फूड प्लाजा, शौचालय, पेयजल, चिकित्सा सुविधा और हस्तशिल्प स्टॉल विकसित करने की योजना।
  • जापानी पर्यटकों को बिहार के बौद्ध स्थलों की ओर आकर्षित करने की पहल।
  • बिहार पर्यटन: ब्रांडिंग और विपणन नीति-2024 लागू कर राज्य को राष्ट्रीय-वैश्विक स्तर पर प्रचार।
  • बिहार पर्यटन एवं बाज़ार नीति-2024 को मंजूरी, जिससे सतत पर्यटन व आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
  • गया के विष्णुपद मंदिर और बोधगया के महाबोधि मंदिर को कॉरिडोर तर्ज पर विकसित करने की घोषणा।
  • बाबा हरिहरनाथ मंदिर,सोनपुर को काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित।
  • केंद्र द्वारा सहरसा की मत्स्यगंधा झील और करमचट डैम (रोहतास-कैमूर) को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की मंजूरी।
  • स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत गया (बौद्ध), नालंदा (हेरिटेज) और विक्रमशिला (कल्चर एवं हेरिटेज) का चयन।
  • रोपवे से राज्य के पहाड़ी क्षेत्र पर्यटकों की पहुंच में लाने के तहत राजगीर व मंदार पर्वत पर रोपवे निर्माण में कार्य पूर्ण।
  • बीबी कमाल मकबरा (जहानाबाद), पुनौराधाम (सीतामढ़ी) और पटना में सिख विरासत केंद्र जैसे प्रमुख कार्य पूरे किए गए।
  • बड़ी पटन देवी, (पटना) गया, विष्णुपद मंदिर, असरगंज (मुंगेर), अशोक धाम (लखीसराय), मत्स्यगंधा झील (सहरसा) में पर्यटकीय सुविधाओं विकास तथा सौंदर्यीकरण ।
  • ककोलत एवं मुंडेश्वरी इको-पार्क चालू किए गए और करमचट (कैमूर) में इको टूरिज्म एवं एडवेंचर हब का विकास हेतु स्‍वीकृति । 
  • बोधगया (सीलौंजा) में "Seven Wonders of World" प्रतिकृति निर्माण हेतु आवंटन।
  • वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में सामुदायिक संरक्षण प्रयासों के लिए SKOCH अवार्ड 2024 प्राप्त।
  • स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए "मेरा प्रखंड, मेरा गौरव" प्रतियोगिता का आयोजन किया गया ताकि गुमनाम पर्यटकीय स्थलों को पहचान दिलायी जा सके।
  • सरकार द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु राज्य में तथा राज्य के बाहर पर्यटक सूचना केन्द्र स्थापित किए गए हैं ।
  • समय-2 पर सांस्कृतिक महोत्सवों का आयोजन जैसे- राजगीर महोत्सव, बिहार दिवस आदि ।
  • पर्यटकों की सुरक्षा हेतु विभिन्न स्थानों पर विशेष व्यवस्था तथा पर्यटक पुलिस फोर्स का गठन ।
  • पर्यटन से संबंधित बैठक, सम्मेलन और अन्य आयोजनों को बढ़ावा देने हेतु बोधगया में सांस्कृतिक केंद्र का विकास ।
  • बोधगया में पर्यटक सूचना केंद्र का आधुनिकीकरण,राजकीय अतिथि गृह निर्माण तथा कोटेश्वर धाम मंदिर, गया का उन्नयन ।
  • वैशाली जिले में विश्व शांति स्तूप के निकट अवस्थित अभिषेक पुष्करणी झील के कायाकल्प ।
  • सिंगापुर, जापान के साथ बौद्ध स्थलों के विकास हेतु योजना ।
  • तीर्थस्थल कायाकल्प एवं आध्यात्मिक संवर्धन अभियान (प्रसाद) धरोहर शहर विकास एवं संवर्धन योजना (हृदय),  स्वदेश दर्शन के थीम आधारित परिपथों के लिए अधिसंरचना विकास द्वारा प्रमुख पर्यटक गंतव्य के बीच संपर्क में सुधार का कार्य ।

 

इस प्रकार, प्रभावी विपणन, मजबूत अधिसंरचना, कौशल विकास, पर्यटक सुविधा-सुरक्षा, डिजिटल पहल, सतत पर्यटन और निवेश सुगमीकरण पर केंद्रित नीतियों के माध्यम से बिहार को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित कर सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देने का प्रयास किया जा रहा है।

 

बिहार सरकार बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने, फिल्म उद्योग को प्रोत्साहित करने, संग्रहालयों का विकास और सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के जीर्णोद्धार संबंधी अनेक कार्य कर रही है जो बिहार की कला एवं संस्‍कृति को संरक्षण करने के साथ साथ बिहार पर्यटन को भी प्रोत्‍साहित करेगी ।

ऐतिहासिक स्थलकला एवं संस्‍कृति के संरक्षण हेतु प्रयास

  • पटना के गोलघर परिसर में लाइट व लेजर साउंड शो विकसित किया जाएगा।
  • मॉरिसन भवन (पटनाऔर अहिल्या स्थान (दरभंगाका संरक्षण व सौंदर्यीकरण।
  • चिरान्द (सारणमें प्रागैतिहासिक पार्क तथा लाल पहाड़ी (लखीसरायव चिरान्द के पुरातात्विक स्थलों का संरक्षण।
  • चंपारण सत्याग्रह से जुड़े स्थलों का विकास। बेतिया व मोतिहारी में 2,000 क्षमता वाले प्रेक्षागृह तैयार हैं तथा मुजफ्फरपुर में स्वीकृत।
  • वैशाली में बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय एवं स्मृति स्तूप का निर्माणजहां बुद्ध के अस्थि-अवशेष व ऐतिहासिक सामग्री प्रदर्शित होगी।
  • आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र’ की स्थापना कर स्थानीय कला-संस्कृति को बढ़ावा दिया जाएगाजिसे सभी जिलों में विस्तारित किया जाएगा।
  • बिहार फिल्म प्रोत्साहन नीति, 2024’ के तहत सिंगल विंडो प्रणाली व वित्तीय सहायता से फिल्म उद्योग को सशक्त किया जाएगा।
  • नए संग्रहालयों की स्थापना और पुराने संग्रहालयों के जीर्णोद्धार की योजना। बेतिया संग्रहालयदीपनारायण संग्रहालयबाबा कारू खिरहर संग्रहालय जैसे नए संग्रहालयों तथा नवादाजमुईबेगूसराय और भागलपुर के पुराने संग्रहालयों का जीर्णोद्धार की योजना।
  • बिहारपटना और गया संग्रहालय को ‘श्रेष्ठ प्रस्तुतीकरण’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है।
  • जिलों में प्रेक्षागृह-सह-आर्ट गैलरी तथा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित किया जाएगा।

महत्‍वपूर्ण कॉरिडोर

विष्णुपद मंदिर और महाबोधि मंदिर कॉरिडोर

*     काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर ही विष्णुपद मंदिर और महाबोधि मंदिर कॉरिडोर को समेकित रूप से विकसित किए जाने की योजना से इन स्‍थानों को विश्वस्तरीय तीर्थ और पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। 

राजगीर में सप्तऋषि कॉरिडोर

*     राजगीर हिन्दू, बौद्ध और जैन धर्मों के लिए अत्यधिक महत्त्वपूर्ण स्थल है। यहां 20 वें तीर्थकर मुनिसुव्रत का प्राचीन मंदिर, सप्तऋऋषि और सात गर्म झरने तथा गर्म पानी वाला ब्रह्मकुंड पवित्र स्थल हैं जिसे देखते हुए राजगीर का समेकित विकास किया जाएगा।

*     बिहार में नये एयरपोर्ट, मेडिकल कॉलेज बनेंगे, खेल की आधारभूत संरचना के निर्माण में भी केंद्र मदद देगा।

बिहार इंटीग्रेटेड सेंटर

देश के कुछ अन्‍य प्रमुख मेट्रो शहरों (दिल्ली, मुंबई के अलावा) में बहुआयामी उपयोग वाले "बिहार इंटीग्रेटेड सेंटर" की स्थापना की जाएगी जो बिहार की सांस्कृतिक, आर्थिक एवं पर्यटन संभावनाओं को बढ़ावा देंगे। इसके उपयोग में पारंपरिक शिल्प एवं हस्तकला का प्रचार-प्रसार, लोक कला, संस्कृति एवं त्योहारों का आयोजन, बिहारी व्यंजनों को बढ़ावा देना, निवेश संवर्धन केंद्र की स्थापना और बिहार फाउंडेशन कार्यालय का संचालन आदि श‍ामिल है ।

 

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बिहार सरकार पिछले कुछ वर्षों से राज्‍य के विभिन्न पर्यटन गंतव्यों पर अधिसंरचना और सुख-सुविधाओं के विकास के लिए कार्य कर रही है पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु बिहार में अनेक पर्यटन परिपथों, स्‍थलों के विकास हेतु केन्‍द्र सरकार को प्रस्‍ताव भेजा गया है जिनमें रामायण परिपथ, बौद्ध परिपथ, सूफी परिपथ के विकास के अलावा उत्तर बिहार में पर्यटन का समग्र विकास, प्रसाद योजना के तहत पुनौरा धाम का विकास, पूर्व चंपारण में वृंदावन आश्रम, कालीबाग मंदिर एवं राजमहल का विकास शामिल है। 

 

प्रधानमंत्री के विशेष पैकेज की स्वदेश दर्शन योजना के तहत कुछ  पर्यटन परिपथ के निर्माण कार्य लगभग पूर्ण हो चुके हैं और कुछ निर्माण कार्य प्रगति पर है जैसे- जैन परिपथ, कांवरिया परिपथ, मंदार पर्वत और अंग प्रदेश परिपथ, गांधी परिपथ का विकास एवं बिहार में पारिस्थितिकी पर्यटन।

 

भारत सरकार द्वारा पर्यटन क्षेत्र के प्रोत्‍साहन हेतु प्रयास

प्रसाद/PRASAD राष्ट्रीय मिशन

भारत की प्राचीन विरासत की सुरक्षा के लिए आरंभ मिशन ।

स्वदेश दर्शन 2.0

संधारणीय और जिम्मेदार पर्यटन स्थलों को विकसित करने हेतु आरंभ।

अतुल्य भारत टूरिस्ट फैसिलिटेटर प्रमाणन कार्यक्रम

डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से पेशेवर टूरिस्ट गाइड्स को प्रशिक्षित करने के लिए आरंभ।

देखो अपना देश

घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आरंभ की गयी पहल। 

एक राज्‍य एक पर्यटन शुभंकर

पर्यटन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विभिन्‍न राज्‍यों के पर्यटन विभागों हेतु विज्ञापन शुभंकर।

जिम्‍मेवार, समावेश, हरित पर्यटन (अधिकार)

प्राकृतिक पारितंत्र में न्यूनतम हस्तक्षेप के साथ हरित पर्यटन को बढ़ावा देना और संवहनीय अवसंरचना को बनाए रखना।

एकीकृत पर्यटन प्रणाली

पर्यटन स्थलों और प्रमुख बाज़ारों एवं क्षेत्रों की पहचान द्वारा एक भारत, श्रेष्‍ठ भारत के मूल तत्‍व को प्रोत्‍साहन।

 

नई पर्यटन नीति (2023-28)

  • नई पर्यटन नीति (2023-28) के तहत वर्णित विभिन्न प्रोत्साहनों और रणनीतियों का लक्ष्य पर्यटन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करना है। इस नीति के तहत बिहार सरकार स्वीकृत परियोजनाओं को निम्‍न प्रकार से सब्सिडी प्रदान करेंगी
  • 10 करोड़ रु. तक निवेश के लिए 30% पूँजीगत सब्सिडी जिसमें सब्सिडी की अधितकम सीमा 3 करोड़ रु. है।
  • 50 करोड़ रु. तक निवेश के लिए 25% पूँजीगत सब्सिडी, जिसमें सब्सिडी की अधितकम सीमा 10 करोड़ रु. है।
  • 50 करोड़ रु. से अधिक निवेश के लिए 25% पूँजीगत सब्सिडी, जिसमें सब्सिडी की अधितकम सीमा 25 करोड़ रु. है।

 

नई पर्यटन नीति (2023-28) नीति के प्रावधान

  • विश्वस्तरीय अधिसंरचना विकसित की जाएगी।
  • पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्रों में विशेषज्ञता वाली कुशल श्रमशक्ति तैयार और संधारित की जाएगी।
  • पर्यटकों की सुरक्षा संरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
  • राज्य में पर्यटन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए उसमें और अधिक पूँजी निवेश किया जाएगा।
  • बिहार में थीम आधारित पर्यटन गंतव्यों और संबंधित अधिसंरचना का विकास किया जाएगा।

 

पर्यटन नीति गाइडलाइन 2024

वर्ष 2023 में पर्यटन नीति की मंजूरी के बाद जुलाई 2024 में बिहार सरकार ने नई पर्यटन नीति गाइडलाइन 2024 जारी की गयी। इसका उद्देश्‍य बिहार में विश्वस्तरीय पर्यटकीय आधारभूत संरचना एवं पर्यटकीय उत्पादों का निर्माण,कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभाशाली कार्यबल का विकास करना है।

 

पर्यटन नीति गाइडलाइन 2024 के मुख्य बिंदु

विरासत भवनों का रूपांतरण: सरकार पुराने भवनों या हेरिटेज भवनों को होटल में तब्दील करने पर भी मदद करेगी, जैसे किले, महल, हवेली और अन्य आवासीय स्थल।

अनुदान: नीति के तहत सरकार 18 प्रकार के प्रोजेक्ट्स को अनुदान और अन्य सुविधाएं प्रदान करेगी। 10 करोड़ रुपये तक के प्रोजेक्ट्स को अधिकतम 3 करोड़ रुपये का अनुदान मिलेगा, जबकि 50 करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट्स पर 25% या अधिकतम 25 करोड़ रुपये का अनुदान मिलेगा।

माइेस (MICE) टूरिज्म: सरकार मीटिंग, इंसेंटिव, कॉन्फ्रेंस और एग्जीबिशन (MICE) टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए नए और पुराने प्रोजेक्ट्स को सहायता प्रदान करेगी।

 

इस प्रकार यह नीति पर्यटन उद्योग में निवेश को बढ़ावा देने, रोजगार सृजन, और राज्य की पर्यटन क्षमता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से बनाई गई है। इस नीति का लाभ होटल, पुराने प्रोजेक्टों के मरम्मत या सौंदर्यीकरण, और विरासत भवनों को होटल में बदलने जैसे प्रोजेक्ट्स को मिलेगा।

 

इस गाइडलाइन में  कुल 18 तरह के प्रोजेक्ट किए गए शामिल किए गए हैं जिसमें नया फोर स्टार होटल, रिसोर्ट, कन्वेंशन सेंटर (माइस), सड़क किनारे पर्यटकीय सुविधा, सड़क किनारे पर्यटकीय सुविधा अपग्रेड करना, स्थायी टेंट सुविधा, एडवेंचर टूरिज्म प्रोजेक्ट, इको टूरिज्म प्रोजेक्ट, वेलनेस टूरिज्म रिसोर्ट, थीम पार्क, एम्युजमेंट पार्क, इंटरटेनमेंट जोन, गोल्फ कोर्स यूनिट, कार्वान टूरिज्म, टूरिस्ट बस और वैन, थीम आधारित रेस्टोरेंट, ग्रामीण पर्यटन प्रोजेक्ट, पर्यटन गांव आदि शामिल है ।

 

 

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बिहार पर्यटन एवं बाज़ार नीति-2024

पर्यटन और बाजार को सशक्त बनाने की दिशा में बिहार पर्यटन एवं बाज़ार नीति-2024 को मंजूरी दी गयी जिसका उद्देश्‍य बिहार में सांस्कृतिक, पारिस्थितिक, और विरासत पर्यटन का आकर्षण बढ़ाना और सतत् पर्यटन विकास को बढ़ावा देना है। यह पर्यटन संबंधी गतिविधियों द्वारा स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और रोज़गार के अवसर उत्पन्न करने में सहायक होगा। इसकी विशेषताएँ निम्‍न हैं

अवसंरचना विकास

  • पर्यटन स्थलों तक पहुँचने के लिये परिवहन सुविधाओं में सुधार।
  • पर्यटकों की सुविधा के लिये आधुनिक आवासीय परियोजनाएँ।
  • सुरक्षा, चिकित्सा और पर्यटक सहायता सेवाओं की उपलब्धता।

विरासत संवर्धन                                                                      

  • नालंदा, बोधगया, और राजगीर जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण और प्रचार-प्रसार पर बल।
  • बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को वैश्विक मंच पर पेश करना।

सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP)

  • पर्यटन अवसंरचना और सेवाओं में निजी निवेश को प्रोत्साहन।
  • स्टार्टअप्स और व्यवसायों के लिए वित्तीय सहायता और सब्सिडी।

विपणन एवं प्रचार-प्रसार

  • बिहार के पर्यटन स्थलों को उजागर करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया का उपयोग।
  • घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार अभियान।


पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा हेतु सुरक्षा प्रहरी/पर्यटक पुलिस

बिहार के पर्यटन स्थलों को पर्यटकों के अनुकूल बनाने, बेहतर  साफ-सफाई और शौचालय के इंतजाम करने के अलावा पर्यटकों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा प्रहरी यानी पर्यटक पुलिस की तैनाती किए जाने का निर्णय लिया गया है।


वर्तमान में बिहार में 100 से भी ज्‍यादा पर्यटन स्थल हैं तथा इनमें से कई पर्यटन स्थलों पर साफ-सफाई, सुरक्षा, विश्रामगृह आदि की बेहतर सुविधा नहीं है जिसके कारण पर्यटक इन स्‍थानों पर जाने से कतराते हैं।


पिछले कुछ समय से बिहार में पर्यटन का दायरा बढ़ा है लेकिन उसके अनुसार सुविधाओं का विस्‍तार नहीं हुआ है। इन समस्‍याओं के समाधान हेतु ही बिहार सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया है जिसमें साफ-सफाई और शौचालय के लिए आवश्‍यकतानुसार निजी एजेंसी की मदद भी ली जाएगी। 


होम स्टे पॉलिसी

बिहार पर्यटन विभाग पर्यटकों को ठहरने की सुविधा देने के लिए होम स्टे पॉलिसी की योजना बना रहा है। उल्‍लेखनीय है कि बिहार में विशेष अवसरों जैसे मलमास मेले, पितृपक्ष, कालचक्र पूजा, कांवड़ यात्रा, हरिहर क्षेत्र मेला आदि के समय पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर होटल कम पड़ जाते हैं। इसके अलावा कई पर्यटन स्थल ऐसे भी हैं जहां आसपास होटल या ठहरने की सुविधा नहीं है।

अत: इस स्थिति को देखते हुए पर्यटन विभाग द्वारा ऐसे पर्यटन स्थलों को चिह्नित किया जा रहा है जहां पर्यटकों को ठहरने की सुविधा मिल सके। इस नीति के बाद पर्यटकों को घर जैसा माहौल एवं सुरक्षा भी मिलेगी। उल्‍लेखनीय है कि वर्तमान में कई राज्य इस तरह की सुविधा पर्यटकों को दे रहे हैं।

 

छठ पूजा और होम-स्टे योजना (धार्मिक पर्यटन)

बिहार सरकार की धार्मिक पर्यटन और होम-स्टे योजना छठ महापर्व को वैश्विक मंच पर पहुँचाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगी, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर बिहार को एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने में भी सहायक होगी।

 

प्रमुख बिंदु

  • गंगा नदी के सूखे क्षेत्र पर टेंट सिटी- छठ पर्व के दौरान पर्यटकों और श्रद्धालुओं के ठहरने की सुविधा के लिए अस्थायी टेंट सिटी बनाई जाए।
  • विशेष छठ घाटों का निर्माण-पर्यटकों के लिए अलग से छठ घाट तैयार किए जाएँ, जहाँ कम संख्या में श्रद्धालु हों, ताकि अनुभव अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित रहे।
  • अर्घ्य देने की सुविधा-पर्यटकों को भी प्रतीकात्मक अर्घ्य देने का अवसर मिले जिससे वे इस अद्वितीय संस्कृति से जुड़ सकें।
  • प्रचार- योजना को सफल बनाने के लिए सरकार को सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों पर विशेष प्रचार अभियान चलाना होगा।
  • पर्यटन गाइड प्रशिक्षण- स्थानीय महिलाओं को पर्यटन गाइड के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
  • होम-स्टे और होटल व्यवसाय को बढ़ावा- योजना के तहत सूर्य मंदिरों के आसपास होटल संचालन में सहायता दी जाएगी और होम-स्टे मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • पर्यटन बुकिंग पैकेज- सरकार पर्यटकों के लिए विशेष पैकेज तैयार करेगी, ताकि आवास, भोजन और पूजा अनुभव सुव्यवस्थित हो सके।

 

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पर्यटन से आर्थिक और सांस्कृतिक लाभ

अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

 

  • होम-स्टे मॉडल से स्थानीय निवासियों को आय का नया स्रोत मिलेगा।
  • होटलगेस्ट हाउस और लोकल ट्रांसपोर्ट व्यवसाय को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • विदेशी और बाहरी पर्यटकों के आगमन से राज्य के पर्यटन क्षेत्र को नई पहचान मिलेगी।

छठ महापर्व को वैश्विक पहचान

  • कुंभ मेले की तरह छठ पर्व भी सांस्कृतिक पर्यटन के रूप में स्थापित किया जा सकता है। जैन और बौद्ध सर्किट से जुड़े पर्यटक इसका अनुभव करने बिहार आ सकते हैं।

स्थानीय समुदायों को नए अवसर

  • महिलाओं को पर्यटन गाइड में प्रशिक्षित किया जाएगाजिससे रोजगार अवसर बढ़ेंगे।
  • पर्यटन व्यवसायोंजैसे गाइडस्थानीय कारीगरों और हस्तशिल्प उत्पादकों को नया बाज़ार मिलेगा।

 

 

हर प्रखंड में पर्यटन स्थल विकसित करने की योजना

बिहार सरकार राज्य के प्रत्येक प्रखंड में एक पर्यटन स्थल विकसित करने पर कार्य कर रही है। इसमें हर प्रखंड में एक पर्यटन स्थल का चयन कर चयनित स्थलों पर पेयजल, शौचालय, स्वच्छता, सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का विकास और प्रचार-प्रसार किया जाएगा जिससे इससे बिहार के स्थलों को पर्यटन मानचित्र पर लाने में मदद मिलेगी और बिहार में पर्यटन को नई दिशा मिलेगी। इसके लाभ निम्न प्रकार हैं-

  • कम प्रसिद्ध स्थलों की पहचान कर उनका विकास होगा।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी और घरेलू पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन होगा तथा महिलाओं की आय में वृद्धि होगी।
  • स्थानीय सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान सुदृढ़ होगी।

 

बिहार विभूतियों के गांव का पर्यटक स्‍थल रूप में विकास

बिहार पर्यटन विभाग द्वारा बिहार की विभूतियों के गांवों में पर्यटन स्थल बना कर ऐसे स्थलों को मिलाकर एक पर्यटन सर्किट बनाए जाने पर कार्य किया जा रहा है।


इस योजना के पहले चरण में मैथिली कवि विद्यापति के मधुबनी जिले स्थित गांव बिस्फी को विकसित किया जा रहा है। यहां पर महाकवि विद्यापति की प्रतिमा लगेगी तथा उनका पूरा जीवनवृत्त और उनसे जुड़ी प्रचलित कहानियों को स्थान देते हुए उनकी कृतियों को संरक्षित करने का कार्य किया जाएगा। बिस्फी के बाद मंडन मिश्र और उनकी पत्नी भारती के सहरसा जिले के गांव महिषी को विकसित किया जाना है। इसके अलावा प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह, बिहार विभूति अनुग्रह नारायण सिंह सहित कई स्वतंत्रता सेनानी, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के अलावा अन्य इतिहासकार, साहित्यकार आदि महान हस्तियों के गांवों को पर्यटन सर्किट से जोड़ा जाएगा।


बिहार सरकार द्वारा जन्मस्थली विकसित करने के साथ इन विभूतियों के गांवों तक आने-जाने का मार्ग भी सुगम बनाने तथा मूलभूत सुविधाएं विकसित करने का कार्य भी किया जाएगा ताकि पर्यटकों की पहुंच आसानी से हो।


उल्‍लेखनीय है कि बिहार में पहले से भी इस तरह के कार्य द्वारा प्रथम राष्ट्रपति और संविधान सभा के अध्यक्ष रहे डॉ. राजेंद्र प्रसाद के गांव जीरादेई का तो संपूर्ण क्रांति के जनक जयप्रकाश नारायण के गांव सिताब दियारा को विकसित किया जा चुका है।

 

बिहार में पर्यटन स्थलों की वैश्विक ब्रांडिंग के लिए फिल्म निर्माण पहल

बिहार सरकार ने राज्य के पर्यटन स्थलों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान और ब्रांडिंग के लिए 12 जिलों में पर्यटन आधारित फिल्मों की शूटिंग शुरू करने की घोषणा की है। बिहार सरकार के इस पहल का उद्देश्य बिहार के समृद्ध सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाना, वैश्विक ब्रांडिंग करना तथा अधिक संख्या में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करना है।


इसके तहत 12 जिलों के प्रसिद्ध स्‍थलों को शूटिंग के लिए चिह्नित किया है जैसे पटना में पटना जंक्शन, हनुमान मंदिर, तारामंडल, पटना म्यूजियम, बिहार म्यूजियम, गोलघर, तख्तश्री हरमंदिर साहिब, गांधी मैदान, मरीन ड्राइव का चयन। इसी प्रकार बेतिया और आसपास, सीतामढ़ी, दरभंगा, गया, मुंगेर, भागलपुर आदि जिले में चयन किया जाएगा।


सरकार के इस प्रयास से पर्यटन क्षेत्र में रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी वहीं बिहार के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर स्थलों को एक नई पहचान मिलेगी।

 

बिहार में प्री वेडिंग शूटिंग का क्रेज

बिहार में प्री वेडिंग फोटो शूट का क्रेज बढ़ता जा रहा है जिसको देखते हुए पर्यटन विभाग बिहार में पटना, नालंदा, राजगीर, बोधगया जैसे प्रसिद्ध स्‍थानों के अलावा ऐतिहासक किले व स्मारक को चिन्हित कर शादी समारोह स्थल (वेडिंग डेस्टिनेशन) विकसित करने  की योजना बना रहा है।  पर्यटन विभाग की योजना है कि इनको बिहार में ही ऐसी सुविधा देने के साथ साथ दूसरे राज्यों के लोगों को भी बिहार आकर्षिक किया जाए जिसके लिए प्राकृतिक सौंदर्य और थीम के हिसाब से पर्यटन स्थलों की पहचान की जा रही है।


बिहार में कई जगहों पर जोड़े जहां प्री वेडिंग फोटो शूट के लिए जाते हैं वहीं कई राज्य के बाहर जैसे राजस्थान, उत्तराखंड, महाराष्ट्र आदि राज्‍यों में शादियों का आयोजन भी करते हैं।

 

पितृपक्ष मेला: श्रद्धा और पर्यटन का संगम

बिहार के गया होनेवाला पितृपक्ष मेला श्रद्धालुओं को पिंडदान और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ पर्यटन का अद्भुत अवसर प्रदान करता है। देश-विदेश से श्रद्धालु इसमें भाग लेते हैं। ई-पिंडदान जैसी आधुनिक सुविधाओं के कारण यह मेला और भी विशेष बन गया है।


इस मेले में जहां श्रद्धालु गया और पुनपुन में पिंडदान कर सकते हैं वहीं जो श्रद्धालु मेला स्थल पर नहीं आ सकते, उनके लिए ई-पिंडदान की सुविधा भी उपलब्ध करायी गयी है। ई-पिंडदान के तहत विष्णुपद मंदिर, अक्षयवट और फल्गु नदी में विधिपूर्वक पिंडदान कर श्रद्धालुओं को वीडियो रिकॉर्डिंग भेजी जाएगी।

 

बोधगया में दुनिया के सात आश्चर्यों की प्रतिकृति

पर्यटन विभाग द्वारा निर्णय लिया गया है कि बिहार के बोधगया में दुनिया के सात आश्चर्यों की प्रतिकृतियाँ बनायी जा‍एगी जिसमें चीन की दीवार, आगरा का ताजमहल सहित अन्य प्रसिद्ध आश्चर्य शामिल होंगे।


इसका निर्माण सिलौंजा (बोधगया के पास) किया जाएगा जिसे अगले 2 वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य है। इसका उद्देश्य पर्यटकों को अधिक दिनों तक बिहार में रुकने के लिए प्रेरित करना तथा बोधगया आने वाले पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण केंद्र बनाना।

 

बिहार में पर्यटन क्षेत्र में उपलब्धियां

राजगीर का इको टूरिज्‍म पर्यावरणीय संरक्षण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्‍तुत करते हुए अन्‍य राज्‍यों के लिए पर्यावरण संरक्षण हेतु मॉडल बन गया है । उल्‍लेखनीय है कि 8 राज्यों ने इस  मॉडल को अपनाया है।


रोपवे जैसी पूंजी प्रधान अधिसंरचनात्मक परियोजनाओं से राज्य के पहाड़ी क्षेत्र पर्यटकों की पहुंच में लाने के क्रम में बांका जिले में मंदार रज्जुमार्ग तथा नालंदा जिले में राजगीर रज्जु मार्ग का आंरभ । गया में प्रेतशिला पहाड़ी, डुंगेश्वरी पहाड़ी, ब्रह्मयोनि पहाड़ी, जहानाबाद में बाणावर पहाड़ी, कैमूर में मुंडेश्वरी पहाड़ी और रोहतास में रोहतास गढ़ किला की रज्जुमार्ग (रोपवे) की परियोजनाएं जारी हैं ।

  • बोधगया में भवन निर्माण विभाग द्वारा सांस्कृतिक केंद्र का निर्माण किया गया।
  • गया जिले में कोटेश्वर धाम के सौंदर्यीकरण और पश्चिम चंपारण के मझौलिया स्थित अमावा में पर्यटन सुविधाओं का विकास ।
  • पटना साहिब में विश्वस्तरीय संग्रहालय के बतौर बहुद्देश्यीय प्रकाशपुंज के विकास की स्वीकृति दी गयी ।
  • उत्तर भारत का पहला बर्ड रिंगिंग स्टेशन बिहार में बनाया गया।
  • दक्षिण अफ्रीका में स्थित कॉस्यूलेट जनरल ऑफ इंडिया ने बिहार को अपना टूरिज्म पार्टनर बनाया है
  • गोगाबिल झील, कटिहार को बिहार का पहला सामुदायिक रिर्जव बनने का गौरव।
  • बिहार में राजगीर नेचर सफारी में निर्मित ग्लास स्काई वॉक देश का दूसरा तथा बिहार का पहला स्काई वॉक है।
  • बिहार का पहला बायोडायवर्सिटी पार्क कुसियारगांव, अररिया में बनाया जा रहा है।
  • पारिस्थितिकी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जमुई के नागी पक्षी अभ्यारण में कलरव पक्षी उत्सव का आयोजन ।

 

इस प्रकार पर्यटन क्षेत्र में बिहार के सामाजिक आर्थिक रूपांतरण का नेतृत्व करने की व्यापक संभावनाएं हैं और इस क्षेत्र के चतुर्दिक विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा अनेक उपाय किए जा रहे हैं 

 

पटना- ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक धरोहरों का केन्द्र

पटना न केवल बिहार की राजधानी है बल्कि अपनी ऐतिहासिक धरोहर, धार्मिक स्थल, और सांस्कृतिक विविधता के कारण पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र भी है। आने वाले समय में साइंस सिटी और मरीन ड्राइव जैसे स्थान पटना को और आकर्षक पर्यटक स्थल बनाएंगे।

धार्मिक स्थल

² तख्त श्रीहरिमंदिर साहिब- सिखों का पवित्र धार्मिक स्थल, सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी की जन्मस्थली।

² मनेर शरीफ दरगाह- गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक, सूफी संतों और दोनों समुदायों (हिंदू और मुस्लिम) के लिए श्रद्धा का केंद्र।

² थीमेटिक गेट- मनेर शरीफ दरगाह को एक विशेष थीमेटिक गेट के साथ विकसित किया जा रहा है।

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थल

² गोलघर-  ब्रिटिश काल में अनाज भंडारण के लिए बनाए गए इस संरचना से पटना का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है।

² बिहार म्यूजियम-  चंद्रगुप्त मौर्य के परिकल्पित सिंहासन और प्रसिद्ध दीदारगंज यक्षिणी की मूर्ति समेत अद्भुत कलाकृतियों का संग्रहालय।

² बापू टावर (गर्दनीबाग)- चंपारण सत्याग्रह और महात्मा गांधी के विचारों से जुड़ी स्मृतियों को प्रदर्शित करने के लिए म्यूजियम।

² गांधी मैदान-पटना का ऐतिहासिक स्थल, स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आधुनिक बिहार की राजनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का साक्षी ।

आधुनिक स्थल

² तारामंडल- एशिया के सबसे पुराने तारामंडलों में से एक, जहां थ्रीडी स्क्रीन पर अंतरिक्ष की अद्भुत दुनिया का अनुभव किया जा सकता है।

² मरीन ड्राइव- गंगा किनारे विकसित हो रहा मनोरंजन क्षेत्र, जहां क्रूज सैर, वाटर स्पोर्ट्स, और खाने-पीने की सुविधाएं होंगी।

गांधी मैदान, पटना-ऐतिहासिक विरासत

भारत के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आधुनिक बिहार की राजनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों तक का मूक साक्षी रहा गांधी मैदान, पटना लगभग 62 एकड़ क्षेत्र में फैला यह मैदान  कभी अंग्रेज अधिकारियों का "पटना लॉन" कहलाता था, लेकिन अब यह जनता की आवाज और लोकतांत्रिक गतिविधियों का केंद्र बन चुका है।  

इतिहास और नामकरण

² खैरून मियां ने स्‍वतंत्रता आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए भूमि का यह टुकड़ दान में दिया था।

² आजादी से पहले इसे पटना लॉन या बांकीपुर मैदान कहा जाता था। 30 जनवरी 1948, महात्मा गांधी की हत्या के बाद उन्‍हें श्रद्धांजलि स्‍वरूप इसे ‘गांधी मैदान’ नाम दिया गया।

² यह मैदान पहले अंग्रेज अधिकारियों के लिए गोल्फ कोर्स और घुड़दौड़ ट्रैक के रूप में प्रयुक्त होता था।

² अंग्रेजी शासन में यह मैदान केवल यूरोपीय नागरिकों और उच्च भारतीय अधिकारियों के लिए आरक्षित था। गांधी जी के आगमन के बाद ही पहली बार आम भारतीयों को यहां बिना प्रतिबंध प्रवेश मिला।

समाजिक और सांस्कृतिक पहचान

गांधी मैदान पटना में जहां दशहरा के रावण दहन में हजारों की संख्या में लोग एकत्र होते हैं। जहां बिहार दिवस, गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के राजकीय समारोह यहीं आयोजित होते हैं वहीं राजनीतिक पार्टियों के लिए यह मैदान उनकी जनशक्ति का परीक्षण स्थल माना जाता है।

गांधी मैदान सिर्फ एक भौगोलिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक चेतना, धार्मिक सौहार्द, और राजनीतिक इतिहास का जीवंत प्रतीक है जिसे सहेजा और संरक्षित किया जाना आवश्‍यकता है ताकि यह आगामी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बना रहेगा।

 

1917

चंपारण सत्याग्रह के दौरान गांधी जी ने पहली बार यहां आम जनता को संबोधित किया। यही समय था जब पहली बार आम भारतीयों को बिना किसी प्रतिबंध के पटना लॉन में प्रवेश किया।

1942

भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी ने इसी मैदान से विशाल सभा को संबोधित किया।

1974

जेपी आंदोलन (संपूर्ण क्रांति) का केंद्र बना, जहां लाखों युवाओं ने लोकतंत्र के पक्ष में आवाज बुलंद की।

 

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