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Mar 19, 2026

BPSC Mains Answer writing current affairs

 

71th BPSC Mains Answer writing Practice

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प्रश्न:रक्षा बल विज़न 2047’ किस प्रकार भारत को भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए सक्षम बनाने में सक्षम है, चर्चा करें।  (8 अंक )

उत्तर -रक्षा बल विज़न 2047’ भारतीय सशस्त्र बलों को एक आधुनिक, एकीकृत और तकनीकी रूप से उन्नत सेना में बदलने का दीर्घकालिक रोडमैप है। एकीकृत रक्षा स्टाफ द्वारा तैयार तीन चरणों वाले इस रोडमैप का लक्ष्य भविष्य के युद्धों के लिए तैयार सेना बनाना है।

 

चरणबद्ध क्रियान्वयन

  1. चरण 1 (2030 तक)- संगठनात्मक सुधार और संसाधन अनुकूलन।
  2. चरण 2 (2030–2040)- मल्टी-डोमेन और डेटा आधारित क्षमताओं का विकास।
  3. चरण 3 (2040–2047)- विश्वस्तरीय सैन्य शक्ति के रूप में रूपांतरण।

 

प्रमुख विशेषताएँ

  1. युद्ध तत्परता और आधुनिकीकरण -आधुनिक हथियार प्रणालियों, इंटेलिजेंट प्लेटफॉर्म और थिएटर कमांड रणनीतियों के माध्यम से सैन्य क्षमता और निवारण शक्ति को मजबूत किया जाएगा।
  2. अंतर्संचालनीयता और एकीकरण-तीनों सेनाओं के बीच एकीकृत लॉजिस्टिक्स और संयुक्त संचालन केंद्र स्थापित कर समन्वय बढ़ाया जाएगा।
  3. नई क्षमताओं का विकास-ड्रोन फोर्स, डेटा फोर्स और उन्नत वायु रक्षा प्रणाली जैसे उपायों से मल्टी-डोमेन युद्ध क्षमता विकसित होगी।
  4. युद्ध की नई अवधारणाएँ- पारंपरिक युद्ध से आगे बढ़ते हुए डेटा-सेंट्रिक और संज्ञानात्मक युद्ध पर जोर दिया गया है, जिससे निर्णय क्षमता मजबूत होगी।
  5. मानव संसाधन और प्रशिक्षण-अग्निपथ योजनाको सुदृढ़ करते हुए युवाओं को आकर्षित करना तथा AI जैसी उभरती तकनीकों में प्रशिक्षण देना शामिल है।
  6. रक्षा कूटनीति- भारत को क्षेत्र में HADR केप्रथम प्रतिक्रियाकर्ताके रूप में स्थापित कर वैश्विक भूमिका मजबूत करना।

 

इस प्रकार रक्षा बल विजन 2047 केवल सैन्य आधुनिकीकरण नहीं बल्कि संरचना, तकनीक और रणनीतिक सोच में समग्र परिवर्तन का रोडमैप है जो भारत को भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए सक्षम बनाता है।

 

 

प्रश्न:वैश्वीकरण के दौर में WTO जैसी बहुपक्षीय संस्थाओं के कमजोर होने के कारणों का विश्लेषण कीजिए। (8 अंक)

उत्तर: वैश्वीकरण के शुरुआती दौर में डॉक्स कॉमर्सकी अवधारणा को देखते हुए यह विश्वास था कि विश्‍व व्यापार के माध्‍यम से विभिन्‍न देशों के बीच सहयोग बढेगा और संघर्ष की संभावना कम होगी। इसके अनुसार आर्थिक परस्पर निर्भरता भू-राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर हावी हो जाएंगे और देशों को जिम्मेदार भागीदार बनाएगी। किंतु हाल के वर्षों में यह धारणा कमजोर पड़ती दिख रही है जिसके प्रमख कारणों को निम्‍न प्रकार देख सकते हैं


  1. परस्पर निर्भरता का जोखिम-अत्यधिक विदेशी निर्भरता अब सुरक्षा के दृष्टिकोण से खतरा मानी जा रही है, क्योंकि संकट के समय आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है।
  2. देशों के आपसी हित- विकसित तथा विकासशील देशों के बीच सब्सिडी, व्‍यापार सुगमता, संरक्षणवाद आदि मुद्दों पर हितों का टकराव।  
  3. व्यापार का शस्त्रीकरण-देश अब टैरिफ, प्रतिबंध और निर्यात नियंत्रण का उपयोग राजनीतिक दबाव और रणनीतिक लाभ के लिए कर रहे हैं, जिससे मुक्त व्यापार की भावना कमजोर होती है।
  4. बहुपक्षीय व्यवस्था का विखंडन-WTO जैसे मंचों की बजाय देश अब द्विपक्षीय और क्षेत्रीय समझौतों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे वैश्विक व्यापार प्रणाली बिखर रही है।
  5. आपूर्ति श्रृंखला रणनीति में बदलाव- विभिन्‍न देशों द्वारा फ्रेंड-शोरिंगऔरनियर-शोरिंगकी नीति अपनाकर भरोसेमंद या नजदीकी देशों पर निर्भरता बढ़ा रहे हैं। WTO जैसी बहुपक्षीय संस्थाओं की भूमिका कमजोर हो रही है।
  6. विविध मुद्दे- नयी उभरती व्‍यवस्‍थाएं, ई-कामर्स, डिजीटलीकरण आदि में स्‍पष्‍ट दिशा-निर्देशों संबंधी नियम नही बना पाना।

 

स्पष्ट है कि वैश्विक व्यापार अब केवल आर्थिक नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक और सुरक्षा आधारित निर्णयों से प्रभावित हो रहा है। पहले जहां व्यापार से शांति की उम्मीद थी वहीं अब व्यापार भी शक्ति और रणनीति का साधन बन चुका है।


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प्रश्न: 23वें भारत–रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन (2025) पर टिप्‍पणी लिखे। (8 अंक)

उत्तर: हाल ही में हुए 23वें भारत–रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन दोनों देशों के मध्‍य 2000 में स्थापित साझेदारी के 25 वर्षों की निरंतरता दर्शाता है। यह सम्मेलन दर्शाता है कि भारत–रूस संबंध केवल ऐतिहासिक नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित हो रहे हैं जिसके मुख्‍य बिन्‍दु निम्‍न हैं:-

 

विज़न 2030 आर्थिक रोडमैप

  1. इसका लक्ष्य द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुँचाना।
  2. व्यापार विविधीकरण, लॉजिस्टिक्स सुधार और गैर-शुल्क बाधाओं को कम करने पर जोर दिया गया।
  3. रुपया–रूबल भुगतान तंत्र को बढ़ावा देकर बाहरी प्रतिबंधों से सुरक्षा का प्रयास किया गया।

 

रक्षा और प्रौद्योगिकी

  1. रूस ने भारत को निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति आश्वासन दिया जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
  2. उन्नत रक्षा प्रणालियों के सह-उत्पादन और तकनीक हस्तांतरण पर बल दिया गया।
  3. अंतरिक्ष और अनुसंधान सहयोग ने साझेदारी को भविष्य-उन्मुख दिशा दी।

 

वैश्विक और रणनीतिक आयाम

  1. दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र आधारित बहुपक्षवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थन किया।
  2. भारत की UNSC स्थायी सदस्यता के लिए रूस ने पुनः समर्थन व्यक्त किया।
  3. BRICS, G20 और SCO में सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया गया।

 

यह सम्‍मेलन स्पष्ट करता है कि दोनों देश बहुध्रुवीय विश्व के पक्षधर हैं। भारत के लिए जहां यह सम्मेलन उसकी रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करता है, जिससे वह रूस और पश्चिम दोनों के साथ संतुलन बनाए रखता है वहीं रूस के लिए भारत एक महत्वपूर्ण एशियाई साझेदार है, जो पश्चिमी प्रतिबंधों के प्रभाव को कम करता है। इस प्रकार वैश्विक स्तर पर यह सम्मेलन द्विध्रुवीयता के विरुद्ध बहुध्रुवीय सहयोग का संकेत देता है। 

 

प्रश्न: स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) क्या हैं? भारत द्वारा विकसित SMRs के संदर्भ में इनके महत्व और संभावनाओं का विश्लेषण कीजिए। (8 अंक)

उत्तर: स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स परमाणु ऊर्जा उत्पादन की एक उभरती तकनीक हैं, जिन्हें बड़े परमाणु संयंत्रों के छोटे, अधिक लचीले और सुरक्षित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। भारत इस क्षेत्र में सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहा है और तीन प्रकार के SMRs विकसित कर रहा है।

 

  1. BSMR (200 MWe)-स्वदेशी रिएक्टर PWR तकनीक पर आधारित जो अल्प संवर्धित यूरेनियम का उपयोग करेगा।
  2. SMR-55 Mwe- अत्यधिक मॉड्यूलर डिजाइन वाला रिएक्टर जो लचीले उपयोग की सुविधा देता है।
  3. हाई टेम्परेचर गैस कूल्ड रिएक्टर- उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोत के रूप में हाइड्रोजन उत्पादन करना है।

 

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अनुसार स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स 300 MWe तक ऊर्जा उत्पादन करते हैं जिसके महत्‍व और संभावनाएं निम्‍न प्रकार हैं

  • पारंपरिक रिएक्टरों की तुलना में कम ऊर्जा उत्‍पादन किंतु अधिक अनुकूलनीय मॉडल।
  • मॉड्यूलर और तेज निर्माण- SMRs के हिस्से कारखानों में तैयार होकर साइट पर जोड़े जाते हैं जिससे लागत और समय दोनों कम होते हैं।
  • स्केलेबिलिटी-इन्हें ऊर्जा मांग के अनुसार चरणबद्ध तरीके से स्थापित किया जा सकता है जो भारत जैसे देश के लिए उपयोगी है।
  • उन्नत सुरक्षा-इनमें निष्क्रिय सुरक्षा तंत्र होते हैं जो आपात स्थिति में स्वतः कार्य करते हैं जिससे जोखिम कम होता है।
  • स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण-यह कम-कार्बन ऊर्जा स्रोत जो डिजिटल अर्थव्यवस्था की बढ़ती ऊर्जा मांग पूरा करने के साथ भारत का 2047 तक 100 GW क्षमता का लक्ष्य में सहायक।  

 


इस प्रकार स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स  भारत के लिए केवल ऊर्जा समाधान नहीं बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता ऊर्जा सुरक्षा और हरित विकास की दिशा में एक रणनीतिक कदम हैं।

 

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